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शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, राष्ट्र और भविष्य की पीढ़ियों के निर्माण का सशक्त आधार: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

भूपाल नोबल्स संस्थान का 104 वां स्थापना दिवस हर्षाेल्लास के साथ मनाया उत्कृष्ट विभूतियों को लाइफ टाइम अचीवमेंट, खिलाड़ियो को  बीएन प्राइड अवा...




भूपाल नोबल्स संस्थान का 104 वां स्थापना दिवस हर्षाेल्लास के साथ मनाया

उत्कृष्ट विभूतियों को लाइफ टाइम अचीवमेंट, खिलाड़ियो को  बीएन प्राइड अवार्ड नवाजा

उदयपुर 2 जनवरी। शिक्षा व्यवस्था की मजबूती का आधार शिक्षक होता है। शिक्षक को समाज में सम्मान की दृष्टि से देखा जाना चाहिए, क्योंकि इतिहास साक्षी है कि शिक्षकों ने अनेक बार सामाजिक परिवर्तनों की नींव रखी है, जो झुकना जानता है, वही उठना भी जानता है। शिक्षा को सम्मान देने से शिक्षा स्वयं विकास का पर्याय बन जाती है।

यह विचार शुक्रवार को भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भूपाल नोबल्स विद्या प्रचारिणी सभा के 104 वें स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किए।

सिंह ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, राष्ट्र और भविष्य की पीढ़ियों के निर्माण का सशक्त आधार है। शिक्षा वही सफल मानी जाती है जो धर्म को धारण कराए। यहां धर्म का अर्थ किसी संप्रदाय से नहीं, बल्कि वह दायित्वबोध और चेतना है जो मानव चरित्र का निर्माण करती है। शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, संवेदनाओं तथा आंतरिक गुणों और शक्तियों के विकास का साधन है। आस्था और विश्वास के बल पर जीवन की बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधान संभव है।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि मनुष्य केवल शब्दों से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से विभूषित होता है। जीवन में सच्ची सफलता प्राप्त करने के लिए मन को अहंकार से मुक्त करना आवश्यक है। अहंकार रहित मन से ही अनंत सुख और परमानंद की प्राप्ति संभव है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि स्थापना दिवस भविष्य को उत्कृष्ट बनाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक होता है। उन्होंने संस्थान की विकास यात्रा, उसके संघर्षों तथा स्थापना के दौरान आए धैर्य और समय की परीक्षाओं का उल्लेख करते हुए जीवन के लक्ष्यों के प्रति समर्पण की आवश्यकता पर बल दिया। संस्थान विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है, जो आत्मनिर्भर भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण योगदान है।

महाराणा भूपाल सिंह के योगदान को किया स्मरण

राजनाथ सिंह ने महाराणा भोपाल सिंह द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए योगदान और साक्षरता बढ़ाने के प्रयासों को याद किया। उन्होंने कहा कि भूपाल सिंह जी का शौर्य और राष्ट्रभक्ति सर्वाेपरि थी तथा उनके लिए राष्ट्र सर्वाेच्च स्थान पर था।

समारेाह से पूर्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संस्थान परिसर में लगी महाराणा भूपाल सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजली अर्पित कर उन्हें नमन किया। सिंह का कार्यकारिणी के सदस्यों द्वारा गुलाब कली देकर स्वागत किया गया उसके बाद एनसीसी कैडेट्स द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।  

प्रारंभ में कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने अतिथियों का स्वागत करते हुए  कहा कि आज विश्व युद्ध कलाओं और कौशलों के एक संक्रमणकाल से गुजर रहा है। पारंपरिक युद्धों के स्थान पर अब युद्ध का स्वरूप हार्डवेयर से सॉफ्टवेयर की ओर तेजी से बदल रहा है, जहां साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे समय में रक्षा मंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व के कारण भारत ने रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन किया है और आज युद्ध उपकरणों में आयातक से निर्यातक राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है।

प्रो. सारंगदेवोत कहा कि यह परिवर्तन केवल सैन्य शक्ति का विस्तार नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है। 

प्रधान संरक्षक एवं अध्यक्ष महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़ ने संस्थान की स्थापना में महाराणा भूपाल सिंह के अमूल्य योगदान को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भूपाल सिंह जी ने अपने काल में पुस्तकों और ज्ञान के माध्यम से आधुनिक शिक्षा, नवाचार तथा व्यापक शैक्षिक सुधारों को बढ़ावा दिया। उनके प्रयासों में कौशल आधारित शिक्षा, महिला शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा, कृषि आधारित शिक्षा, प्रायोगिक प्रशिक्षण (प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) तथा विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति जैसी दूरदर्शी योजनाएँ शामिल थीं।

विश्वराज सिंह मेवाड़ ने महापुरुषों के नामों को सम्मान और गरिमा के साथ स्मरण करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि उनका जीवन और विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। शिक्षा के माध्यम से समाज को जागरूक और आत्मनिर्भर बनाना ही उनके प्रयासों का मूल उद्देश्य था।

विशिष्ट अतिथि सांसद डॉ मन्ना लाल रावत ने अपने संबोधन में मेवाड़ राज्य की गौरवगाथा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र ने सदैव शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रहित को सर्वाेपरि माना है। उन्होंने मेवाड़ के शासकों और समाज द्वारा शिक्षा को दिए गए महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यही विचार आज भी शिक्षण संस्थानों के माध्यम से आगे बढ़ाए जा रहे हैं।

विशिष्ट अतिथि चित्तौड़गढ़ सांसद सी.पी. जोशी ने कहा कि यह संस्थान शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रयास करते हुए राष्ट्र के प्रति समर्पित पीढ़ी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संस्थान द्वारा किए जा रहे कार्यों के परिणामस्वरूप यहां के विद्यार्थी देश और विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ राष्ट्रभक्ति और संस्कारों का समन्वय ही सशक्त भारत की नींव रखता है।

रक्षा और राष्ट्र सेवा में योगदान का उल्लेख

विशिष्ट अतिथि शिक्षाविद एवं समाजसेवी अनिल सिंह ने देश की रक्षा के लिए किए जा रहे कार्यों में रक्षा मंत्री की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने रक्षा मंत्री की राजनीतिक उपलब्धियों, दूरदर्शी नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति उनके निस्वार्थ योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि सशक्त नेतृत्व और स्पष्ट दृष्टि से ही देश की सुरक्षा और विकास दोनों को मजबूती मिलती है।

समारोह में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, राष्ट्र और भविष्य की पीढ़ियों के निर्माण का सशक्त आधार है। ऐसे आयोजन शिक्षा के मूल उद्देश्यों को पुनः स्मरण कराने के साथ नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करते हैं।


इनको नवाजा अवार्ड से

प्रबंध निदेशक मोहब्बत सिंह राठौड ने बताया कि संस्थान के विकास में योगदान देने के लिए 102 वर्षीय उदय सिंह पुरावत, तेज सिंह शक्तावत, रावत मनोहर सिंह कृष्णावत, गुणवंत सिंह झाला, प्रदीप सिंह सांगावत, कृष्ण सिंह सारंगदेवोत, चंद्रगुप्त सिंह चौहान, लाल सिंह झाला, को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड व  खेलों में विशिष्ट उपलब्धियों के लिए कार्तिकी सिंह शक्तावत, अपूर्वी चंदेला को बीएन प्राइड अवॉर्ड से नवाजा गया।

फतह आर्ट गैलेरी का हुआ लोकार्पण

प्रबंध निदेशक मोहब्बत सिंह राठौड ने बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एवं सम्मानित अतिथियों द्वारा प्रशासनिक भवन में बनी फतह आर्ट गैलेरी का लोकार्पण किया। जिसमें फतह सिंह से सम्बंधित फोटो एवं इतिहास को दर्शाया गया है।

भूपाल नोबल्स में सैनिक स्कूल खुुलने का मार्ग हुआ प्रशस्तरू-

समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से कहा कि संस्थान द्वारा सैनिक स्कूल खोलने का जो आवेदन किया है जिसकी मुझे सूचना मिली है कि उसके द्वारा दिये गये सभी प्रारूप सही  पाये गये है और मैं निजी तौर पर इस दिशा में अपनी ओर से पूरा प्रयास करूंगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिखाई सहजता- अवार्ड से सम्मानित 102 वर्षीय विभूती व अन्य  को सम्मानित करने के लिए मंच से स्वयं नीचे आ कर उनका सम्मान किया।

देश में अमन शांति के लिए हुआ हवन पूजन-

समारेाह से पूर्व प्रातः 07 बजे प्रशासनिक भवन के सभागार में पंडितों के मंत्रोच्चाण के साथ प्रो. दरियाव सिंह चुण्डावत, गजेन्द्र सिंह शक्तावत के सानिध्य में हवन पूजन किया गया।

इस अवसर पर सलूम्बर विधायक शांता मीणा, भाजपा शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह, देहात अध्यक्ष पुष्कर तेली, फतह सिंह राठौड, भंवर सिंह पंवार, प्रमोद सामर, प्रो. दरियाव सिंह चुण्डावत, राजेन्द्र सिंह ताणा, शक्ति सिंह कारोही, हनुमंत सिंह बोहेडा, नवल सिंह जुड, डॉ. युवराज सिंह राठौड, कमलेश्वर सिंह सारंगदेवोत, करण सिंह उमरी, कुलदीप सिंह ताल, भंवर सिंह कोठारिया, सुरेन्द्र प्रताप सिंह रूद, महेन्द्र सिंह पाखंड, महेन्द्र सिंह पाटिया, कुलपति डॉ. चेतन सिंह चौहान, रजिस्ट्रार डॉ. एन. एन. सिंह राठौड, प्रो. एकलिंग सिंह झाला, डॉ. रेणु  राठौड़, भानु प्रताप सिंह, एडवोकेट सुशील कुमार, राज्यपाल सलाहकार प्रो. कैलाश सोडाणी सहित शहर के गणमान्य नागरिक,सार्वजनिक और राजनैतिक और शिक्षा के  क्षेत्र से जुड़े ख्यातनाम लोगों के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। संचालन डॉ. अनिता राठौड़ ने किया जबकि आभार मोहब्बत सिंह रूपाखेडी ने जताया। 


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