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करोड़ों लोगों का पेट भरने वाला अन्नदाता किसान है, जिन पर देश को गर्व: भागीरथ चौधरी

तीन दिवसीय क्षेत्रीय कृषि मेले  का दूसरा दिन उदयपुर, 08 फरवरी। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय व भारत सरकार के कृषि एवं क...



तीन दिवसीय क्षेत्रीय कृषि मेले  का दूसरा दिन

उदयपुर, 08 फरवरी। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय व भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय,नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित क्षेत्रीय कृषि मेले के दूसरे दिन कार्यक्रम के मुख्य अथिति केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि ऐसे कृषि मेलों से किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक एवं विपणन रणनीतियों की जानकारी मिलती है, जिससे उत्पादन में वृद्धि होती है और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में किसानों की सबसे बड़ी चिंता बीज अंकुरण से लेकर फसल के कटाई एवं सुरक्षित भंडारण की है । उन्होंने पर्यावरण संतुलन के लिए जैविक खेती पर जोर दिया तथा रासायनिक कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि कृषि वैज्ञानिकों को कृषि मेलों के माध्यम से किसानों तक नई तकनीकों, उन्नत किस्मों एवं आधुनिक खेती पद्धतियों की जानकारी प्रभावी ढंग से पहुँचाने के लिए ओर अधिक प्रयास करें।  उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों का पेट भरने वाला अन्नदाता किसान ही है, जिन पर देश को गर्व है। वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन कृषि के लिए बड़ी चुनौती है, जिससे निपटने के लिए वैज्ञानिक शोध और किसानों को जागरूक करना आवश्यक है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्राकृतिक खेती एवं फसल बीमा योजना सहित केंद्र सरकार की किसान हितैषी योजनाओं के बारे में बताया तथा किसानों से वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेती करने, मिट्टी परीक्षण कराने तथा प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि अपनाने का आह्वान किया ।

आईसीएआरदृकेन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने कहा कि ऐसे आयोजन किसानों को अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने, वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने और आय बढ़ाने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने किसानों से परंपरागत ज्ञान के साथ विज्ञान को जोड़कर कृषि एवं पशुपालन को उन्नत बनाने का आह्वान किया।  डॉ. तोमर ने कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में कृषि की अहम भूमिका है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में कृषि मंत्री ने मेले में लगे विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन कर प्रदर्शित तकनीकों की जानकारी ली तथा अपने सुझाव दिए। क्षेत्रीय कृषि मेले के दौरान आयोजित प्रदर्शनी के अवलोकन में माननीय कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने मुख्य अतिथि को विश्वविद्यालय द्वारा विकसित विभिन्न उन्नत फसल किस्मों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित प्रताप संकर मक्का-6, प्रताप ज्वार -2510,  चेतक अफीम, प्रताप असालिया-1, प्रताप इसबगोल-1, प्रताप अश्वगंधा-1 एवं प्रताप मूंगफली - 4 की उन्नत किस्में किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही हैं। कुलगुरु ने बताया कि मेवाड़ क्षेत्र में मक्का प्रमुख फसल है, जिसे ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किसानो में लोकप्रिय संकर किस्म “प्रताप संकर मक्का-6” का पैतृक बीज उत्पादन कार्यक्रम विश्वविद्यालय स्तर पर संचालित किया जा रहा है। भविष्य में संकर बीज को राजस्थान राज्य बीज निगम के माध्यम से किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा।

इसके अतिरिक्त मेले के दूसरे दिन श्री फूल सिंह मीणा, विधायक,उदयपुर  ग्रामीण, श्री बी. आर. चौधरी, पूर्व  विधायक, डॉ. एस.के. शर्मा, सहायक महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली , श्री कृष्ण मुरारी भारती, अखिल भारतीय किसान संघ के बीज प्रमुख, डॉ. निरंजन सिंह राठौड़,अतिरिक्त निदेशक (कृषि), डॉ. सुधीर वर्मा, संयुक्त निदेशक (कृषि) तथा अन्य गण मान्य  अथितियो  की  उपस्थिति रही।

आरंभ में मुख्य आयोजन सचिव एवं निदेशक, प्रसार शिक्षा डॉ. आर.एल. सोनी ने स्वागत उदबोधन देते हुए मेले के आज और कल होने वाले विभिन्न तकनीकी सत्रों की विस्तृत जानकारी दी। डॉ. योगेश कनोजिया ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विशाखा बंसल एवं श्रीमती जय माला दवे ने किया।

तकनीकी पुस्तिका का विमोचन एवं सम्मान रू इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र चित्तौड़गढ़ के कृषि वैज्ञानिक डॉ. आर. एल. सोलंकी द्वारा लिखित पुस्तिका “सफल कृषि उद्यमी” का विमोचन किया गया। कार्यक्रम के दौरान हलधर टाइम्स के संपादक श्री पीयूष शर्मा को उनके उल्लेखनीय योगदान एवं कृषि नवाचारों को किसानों तक प्रभावी रूप से पहुँचाने के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही महाराष्ट्र की सफल कृषि उद्यमी, श्रीमती शोभा को जैविक हल्दी पाउडर के लिए सम्मानित किया गया।

प्रमुख व्याख्यान

मेले में विभिन्न विषय विशेषज्ञों द्वारा किसानों को उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिए गए। इन व्याख्यानों में आधुनिक कृषि तकनीकों, पशुपालन तथा आयवर्धन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई। डॉ. मंजीत सिंह ने कृषि में मृदा एवं जल संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. विक्रमादित्य दवे ने स्मार्ट कृषि प्रणालियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की जानकारी दी। डॉ. सी. एम. यादव ने उन्नत बकरी पालन पर जानकारी दी । डॉ. सिद्धार्थ मिश्रा ने घर के पिछवाड़े मुर्गीपालन की उपयोगिता समझाई। डॉ. एच. एल. बुगालिया ने पशुओं में टीकाकरण के महत्व पर जानकारी दी। डॉ. एन. एल. पंवार ने कृषि में आय बढ़ाने हेतु नवीनकरणीय ऊर्जा स्रोतों के प्रभावी उपयोग पर व्याख्यान दिया। डॉ. एच. पी. मेघवाल ने अतिरिक्त आय के लिए मधुमक्खी पालन को लाभकारी व्यवसाय बताया।

मेले के प्रमुख आकर्षण

नई कृषि तकनीकों का प्रदर्शनरू मेले में उन्नत कृषि तकनीकों एवं नवाचारों का प्रदर्शन किया गया। इसमें मृदा एवं जल संरक्षण, हाईटेक बागवानी, ड्रोन तकनीक, सौर ऊर्जा प्रणाली, उन्नत मुर्गी पालन सहित मक्का, अफीम, इसबगोल, अश्वगंधा, असालिया, ग्वार एवं मूंगफली की उन्नत किस्मो का प्रदर्शन शामिल है। साथ ही कृषक महिलाओं के लिए आधुनिक कृषि यंत्र, मोटे अनाज से बने उत्पाद, हर्बल गुलाल आदि उत्पादों का भी प्रदर्शन किया गया, जिसे किसानों ने सराहा।

सांस्कृतिक कार्यक्रमरू क्षेत्रीय कृषि मेले के दौरान विभिन्न राज्यों से आए किसानों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रमों में लोकगीत, लोकनृत्य एवं कृषि जीवन से जुड़े संदेशों के माध्यम से ग्रामीण संस्कृति और परंपराओं की सुंदर झलक देखने को मिली। किसानों ने अपनी-अपनी क्षेत्रीय लोककलाओं के जरिए कृषि कार्य, प्रकृति से जुड़ाव और परिश्रम का महत्व दर्शाया। इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मेले को जीवंत बना दिया और दर्शकों को आकर्षित किया। उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं आगंतुकों ने कार्यक्रमों की सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायी बताया।

कृषक वैज्ञानिक संवादरू किसानो की कृषि से संबंधित विभिन्न समस्याओं एवं जिज्ञासाओं के समाधान हेतु कृषकदृवैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों ने फसल उत्पादन, कीट एवं रोग प्रबंधन, उन्नत तकनीक, जैविक खेती एवं विपणन से जुड़े प्रश्न रखे, जिनका वैज्ञानिकों द्वारा सरल एवं व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किया गया। संवाद कार्यक्रम में डॉ. एम. रमेश बाबू, डॉ. वीरेन्द्र सिंह, डॉ. एन. एल. मीणा, डॉ. एच. के. शर्मा, डॉ. सी. एम. यादव, डॉ. योगेश कनोजिया एवं डॉ. हेमन्त स्वामी ने भाग लेकर किसानों का मार्गदर्शन किया। किसानों ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी बताया।

फसल, फल-फूल-सब्जी प्रदर्शन प्रतियोगितारू प्रतियोगिता के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 84 किसानों को प्रथम एवं द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया। इनमें 54 सब्जियों, 14 फसलों ,12 फलों एवं 4 फूलों के विजेता कृषक शामिल है ।


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