उदयपुर: 23 अक्टूबर. अपनों से बिछड़े व्यक्ति को फिर से अपने परिवार से मिलाने का क्षण जितना सुखद होता है, उतना ही भावुक भी। अपना घर आश्रम उदयप...
उदयपुर: 23 अक्टूबर. अपनों से बिछड़े व्यक्ति को फिर से अपने परिवार से मिलाने का क्षण जितना सुखद होता है, उतना ही भावुक भी। अपना घर आश्रम उदयपुर ने पुनर्वास सेवा के क्रम में एक और महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए 122वें प्रभुजी का उनके परिजनों से मिलन करवाया। करीब 16 वर्षों से परिवार से बिछड़े शेखर शुक्ला को अपने पिता और भाइयों से मिलते देख हर किसी की आंखें नम हो गईं।
आश्रम अध्यक्ष गोपाल कनेरिया ने बताया कि 17 अप्रैल 2026 को खेरवाड़ा क्षेत्र से लावारिस अवस्था में मिले शेखर प्रभुजी को सेवा, उपचार और पुनर्वास के उद्देश्य से अपना घर आश्रम उदयपुर में भर्ती कराया गया था। आश्रम में नियमित सेवा, देखभाल, उपचार और काउंसलिंग के माध्यम से उनके स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। काउंसलिंग के दौरान शेखर प्रभुजी ने अपने गांव और परिवार के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने अपना गांव टिहरी/टेहरा, जिला सागर, मध्यप्रदेश बताया।
इसके बाद आश्रम की टीम ने सागर जिले से संबंधित सोशल मीडिया स्रोतों के माध्यम से उनके परिजनों की तलाश शुरू की। शेखर प्रभुजी का विवरण और फोटो संबंधित लोगों तक पहुंचाए गए। प्रयासों के परिणामस्वरूप आशु धीमोले के माध्यम से उनके परिवारजनों से संपर्क स्थापित हो गया। इसके बाद उनके बड़े भाई शैलेश शुक्ला से वीडियो कॉल पर बात कराई गई और परिवार को शेखर प्रभुजी के उदयपुर स्थित आश्रम में होने की जानकारी दी गई। लंबे समय से बिछड़े भाई को सामने देखकर शैलेश शुक्ला भावुक हो गए और बातचीत के दौरान उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
अपने खोए हुए बेटे को वापस पाने की आस लगाए बैठे पिता संतोष शुक्ला अपने परिवारजनों के साथ उदयपुर पहुंचे। उनके साथ शेखर के भाई शरद शुक्ला और अमित शुक्ला भी अपने भाई को लेने आए। वर्षों बाद पिता-पुत्र और भाइयों का आमने-सामने मिलन हुआ तो माहौल भावुक हो गया।
पिता संतोष शुक्ला ने बताया कि फरवरी 2010 से मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उनका बेटा घर से चला गया था। परिवार ने उसे आसपास के क्षेत्रों में बहुत तलाश किया, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल पाया। बेटे के मिलने की उम्मीद धीरे-धीरे धुंधली पड़ने लगी थी। उन्होंने कहा, “ईश्वर की कृपा से आज मेरा पुत्र मुझे वापस मिल गया। अपना घर आश्रम उदयपुर का मैं हृदय से धन्यवाद करता हूं। यहां की व्यवस्था परिवार से भी बढ़कर है। आश्रम में ऐसा लगता है कि यह कोई आश्रम नहीं, बल्कि एक परिवार है, जहां प्रभुजियों की अपनेपन और आत्मीयता से सेवा की जाती है।”
आश्रम की आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करने के बाद शेखर प्रभुजी को आश्रम अध्यक्ष गोपाल कनेरिया, वित्त सचिव प्रकाश जोशी एवं अरावली लायंस ट्रस्ट के को-चेयरमैन, एवं समाजसेवी बंसीलाल कुम्हार ने तिलक लगाकर, पगड़ी पहनाकर और ऊपरना ओढ़ाकर सम्मानपूर्वक विदाई दी गई और उनके सकुशल एवं सुखद पारिवारिक जीवन की कामना की। इसके बाद उन्हें उनके पिता और भाइयों के साथ उनके गांव मरदापुर, जिला सागर, मध्यप्रदेश के लिए विदा किया गया।
अपना घर आश्रम उदयपुर का यह प्रयास एक बार फिर साबित करता है कि सेवा, संवेदना और निरंतर प्रयासों से बिछड़े परिवारों को फिर से मिलाया जा सकता है। शेखर प्रभुजी का अपने परिवार से मिलन न केवल आश्रम के लिए पुनर्वास की एक और उपलब्धि है, बल्कि उन परिवारों के लिए भी आशा की किरण है, जो वर्षों से अपने बिछड़े अपनों की तलाश कर रहे हैं।

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