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सीटीएई, एमपीयूएटी उदयपुर में किसानों के लिए नीड-बेस्ड नवाचारी कृषि यंत्रों का विकास

उदयपुर, 29 जनवरी। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) के माननीय कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एं...


उदयपुर, 29 जनवरी। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) के माननीय कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग (CTAE) स्थित फार्म मशीनरी एवं पावर विभाग के फार्म मशीनरी परीक्षण केंद्र का दौरा किया तथा विभाग में बने विभिन्न नए कृषि यंत्रों का जायजा लिया। इस अवसर पर सीटीएई के वैज्ञानिकों द्वारा आधुनिक कृषि यंत्र परीक्षण उपकरणों का प्रदर्शन किया गया। निरीक्षण के दौरान कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नीड-बेस्ड एवं नवाचारी कृषि यंत्रों के विकास पर विशेष जोर दिया। इन यंत्रों का उद्देश्य किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाना है । उन्होंने कहा कि कृषि कार्यों को सरल, कम लागत वाला और अधिक लाभकारी बनाने के लिए किसानों की वास्तविक समस्याओं के अनुरूप उपकरण विकसित किए जाने चाहिए। कुलगुरु ने निर्देश दिए कि विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों की विशेष टीमों का गठन किया जाए, जो आसपास के गांवों में जाकर किसानों के साथ प्रत्यक्ष संवाद करें और उनकी प्रमुख (थ्रस्ट) आवश्यकताओं की पहचान हेतु सर्वेक्षण करें। सर्वेक्षण के निष्कर्षों के आधार पर किसानों के लिए कम लागत, उपयोग में सरल एवं प्रभावी कृषि मशीनों की डिजाइन और विकास किया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया से विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव मिलेगा, वहीं किसानों को उनकी जरूरतों के अनुसार तकनीकी समाधान प्राप्त होंगे। कुलगुरु ने आगे बताया कि आगामी समय में कृषि यंत्र निर्माताओं के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) किए जाएंगे, ताकि उद्योग/विश्वविद्यालय सहयोग के माध्यम से किसानों के लिए आवश्यकता-आधारित कृषि मशीनों का संयुक्त रूप से विकास किया जा सके। सीटीएई के वैज्ञानिकों द्वारा वर्तमान में बैटरी चलित बीज मसाला फसलों तथा स्वीट कॉर्न के लिए बुवाई यंत्र, मेहन्दी फसल के लिए कटाई यंत्र, बीज मसाला फसलों के लिए थ्रेशर सहित विभिन्न नवीन कृषि यंत्र विकसित किए जा रहे हैं, जिन्हें स्थानीय परिस्थितियों और किसानों की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। इस पहल से किसानों को आधुनिक, किफायती एवं उपयोगी कृषि यंत्र उपलब्ध होंगे, जिससे खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सकेगा।


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