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यूजीसी विनियम भारतीय संविधान की उद्देशिका व मूल अधिकार के विपरीत : डॉ.विप्लवी

उदयपुर, 29 जनवरी। भाजपा नेता व पूर्व पार्षद डॉ. विजय विप्लवी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर यूजीसी विनियम 2026 को भारतीय संविधा...

उदयपुर, 29 जनवरी। भाजपा नेता व पूर्व पार्षद डॉ. विजय विप्लवी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर यूजीसी विनियम 2026 को भारतीय संविधान की उद्देशिका व मूल अधिकार के विपरीत बताते हुए इस पुनर्विचार व संशोधन की मांग कघ है।

डॉ. विप्लवी ने पत्र में लिखा है कि यूजीसी विनियम 2026 की प्रस्तावना में कहा गया है कि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी छात्र शिक्षा प्रणाली में उन्नति कर सकें। जबकि यूजीसी विनियम 2026 के प्रावधान में सामान्य वर्ग के लिये उन्नति के प्रावधान नहीं होकर केवल उसे अपराधी ठहराकर दण्डित करने के प्रावधान है। यह विनियम प्रस्तावना में वर्णित भाव व राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में ’पूर्ण समता व समावेशन’ के विरूद्ध प्रतीत होता है। वहीं यूजीसी विनियम 2026 की धारा 2 में विनियम की प्रस्तावना की भावना के अनुरूप यहां पर सभी जाति व वर्ग का नाम हटाकर सभी विद्यार्थी लिखा जावे। क्योंकि भेदभाव उत्पीडन या असमता किसी भी विद्यार्थी के साथ हो सकती है। 

पत्र में लिखा है कि यूजीसी विनियम 2026 को पढकर लगता है कि सामान्य वर्ग केवल भेदभावपूर्ण व्यवहार ही करता है व अपराधी प्रवृत्ति का है। यह संदेश समाज व राष्ट्र में सद्भाव को आघात पहुंचाने वाला है।  

डॉ. विप्लवी ने कहा है कि भारतीय संविधान की उद्देशिका 'समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक न्याय' व अनुच्छेद 14 'विधि के समक्ष समता' मूल अधिकार की भावना के विपरीत है। सर्वोच्च व उच्च न्यायालयों ने अपने पूर्व निर्णयों में इनके विपरीत बनी विधि को अनुचित माना है।वहीं यूजीसी विनियम 2026 में मिथ्या शिकायत और साक्ष्य पर दण्डित करने का प्रावधान नहीं है। जिससे यूजीसी विनियम 2026 के दुरूपयोग की आशंका है। पूर्व में विधियों के दुरूपयोग की घटनाओं से हम परिचित है। 

विप्लवी ने पत्र में लिखा है कि वे सन् 1978 से संघ का स्वयंसेवक व सन् 1987 से भाजपा का कार्यकर्ता है। संघ व भाजपा में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया। सन् 1985 में संघ शिक्षा वर्ग से लौटते ही नाम से जातिसूचक संज्ञा हटाकर उपनाम ’’विप्लवी’’ दर्ज किया, क्योंकि हम सामाजिक समरसता का भाव लिये सर्वसमाज को जोडने का भाव मन में रहा। वर्तमान परिस्थिति में यूजीसी विनियम 2026 के कारण उत्पन्न हो रहे सामाजिक विद्वेष के वातावरण से मन आहत है। इस विनियम से देश का जनमानस आंदोलित है। जो हमारे लिये चिंता का विषय है। राष्ट्र के व्यापक हित में, सर्वसमाज के छात्रों, प्राध्यापकों, उच्च शिक्षण संस्थान संचालकों व आमजन के हित में यूजीसी विनियम 2026 में पुनर्विचार कर संशोधन करा सामान्य वर्ग व आम विद्यार्थी को भयमुक्त शैक्षिक वातावरण प्रदान कराने की पहल होनी चाहिये।

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