संगठन, संस्कार और समरसता से बनेगा सशक्त भारत - पंकज पालीवाल उदयपुर, 1 फरवरी। विराट हिंदू सम्मेलन के अंतर्गत आज अरिहंत विहार, आकाशवाणी, सूर्य...
संगठन, संस्कार और समरसता से बनेगा सशक्त भारत - पंकज पालीवाल
उदयपुर, 1 फरवरी। विराट हिंदू सम्मेलन के अंतर्गत आज अरिहंत विहार, आकाशवाणी, सूर्य नगर एवं उदय विहार बस्तियों के युवाओं, बुजुर्गों, माताओं-बहनों व बच्चों सहित सर्व हिंदू समाज ने पूर्ण मनोयोग और उत्साह के साथ हिंदू परंपरागत वेशभूषा में भव्य एवं दिव्य कलश यात्रा निकाली। इस कलश यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु सम्मिलित हुए।
कलश यात्रा का शुभारंभ मठ मादड़ी से हुआ, जो अरिहंत विहार, उदय विहार, काली कल्याण धाम एवं सूर्य नगर होते हुए आकाशवाणी स्थित शिव पार्क में सम्पन्न हुई। शिव पार्क में आयोजित कार्यक्रम का प्रारंभ अतिथियों द्वारा भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। तत्पश्चात बालिका द्वारा देशभक्ति गीत छत्रपति शिवाजी महाराज पर आकर्षक प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि बोहरा गणेश जी मंदिर के प्रमुख पुजारी श्रीमान इंद्रकुमार जोशी, विशिष्ठ अतिथि जगदीश भोपाजी, मठ मादड़ी के संरक्षक डॉ. महेंद्र सिंह जी शेखावत, अभय सिंह जी तथा मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग व्यवस्था प्रमुख व व्याख्याता पंकज पालीवाल उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन अनिल जी प्रजापत द्वारा किया गया। संरक्षक श्रीमान शेखावत साहब ने आयोजन समिति एवं सहयोग करने वाले सभी बस्तियों के प्रमुख कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए अतिथियों का स्वागत किया तथा भविष्य में भी इस प्रकार के हिंदुत्व से जुड़े आयोजनों को निरंतर करने का आश्वासन दिया।
मुख्य वक्ता पंकज पालीवाल ने संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देशभर में आयोजित हो रहे हिंदू सम्मेलनों की जानकारी देते हुए उपस्थित माताओं एवं युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने संघ के पंच प्रण—कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्व-बोध एवं नागरिक कर्तव्य की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए समस्त हिंदू समाज से संगठित रहकर राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में योगदान देने का आह्वान किया।
पालीवाल ने अपने उद्बोधन में संघ के पंच प्रणों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुटुंब प्रबोधन के माध्यम से संस्कारित परिवारों का निर्माण, पर्यावरण संरक्षण द्वारा प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व, सामाजिक समरसता से भेदभाव-मुक्त समाज की स्थापना, स्व-बोध के माध्यम से सांस्कृतिक आत्मगौरव तथा नागरिक कर्तव्यों के पालन से अनुशासित राष्ट्र का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि ये पंच प्रण केवल विचार नहीं, बल्कि प्रत्येक हिंदू नागरिक के लिए आचरण का मार्ग हैं, जिन्हें जीवन में अपनाकर ही संगठित, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण को गति दी जा सकती है। पालीवाल जी ने उपस्थित समाज से आह्वान किया कि पंच प्रणों को दैनिक जीवन में उतारकर राष्ट्रहित में सक्रिय भूमिका निभाएँ।
उद्बोधन के अंत में पंकज पालीवाल ने उपस्थित माताओं, युवाओं एवं वरिष्ठजनों से आह्वान किया कि संगठित हिंदू समाज ही सशक्त भारत का आधार है, और पंच प्रणों को जीवन में उतारकर ही राष्ट्र के सर्वांगीण विकास को गति दी जा सकती है।
कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ। तत्पश्चात सभी हिंदू भाई-बहनों ने प्रसाद ग्रहण कर अपने-अपने घरों के लिए प्रस्थान किया। कार्यक्रम के संयोजक अशोक सिंह जी तंवर रहे। सह-संयोजक गजेंद्र सिंह जी राजावत, केशु लाल जी डागी, राजनाथ जी, शिव सिंह जी चौहान; कोषाध्यक्ष गौरव जी गोलछा, छगन सिंह जी राठौड़ सहित समस्त कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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