आयंबिल तप ओलिजी के अंतिम दिवस सैकड़ों श्रद्धालुओं ने की 'तप पद' की आराधना उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर स्थित सूरजपोल दादावाड़ी में ...
आयंबिल तप ओलिजी के अंतिम दिवस सैकड़ों श्रद्धालुओं ने की 'तप पद' की आराधना
उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर स्थित सूरजपोल दादावाड़ी में नवपद आयंबिल तप ओलिजी के अंतिम दिवस पर 'तप पद' की विशेष आराधना के साथ ऐतिहासिक 54 जोड़ों का दादा गुरुदेव महापूजन श्रद्धा एवं उल्लासपूर्वक संपन्न हुआ। यह पावन महापूजन रतनसुता, पूज्या परम विदुषी बहिन म. साध्वी डॉ. श्री विद्युतप्रभाश्रीजी म. सा. आदि ठाणा 6 की पावन निश्रा में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी श्रीजी ने कहा कि सम्यक तप पद की आराधना कर तीर्थंकरों ने कर्मों की निर्जरा की थी। इसी प्रकार सम्यक भाव से की गई तप की आराधना से आत्मा के कर्मों का क्षय संभव है।
महापूजन के दौरान मुख्य रूप से 54 सहजोड़ों के बैठने का नियोजन था, लेकिन श्रावक-श्राविकाओं के अपार भक्ति भाव और विशेष अनुरोध को देखते हुए लाभार्थी परिवार के अतिरिक्त भी सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर पूजन का लाभ लिया। कार्यक्रम में जावरा के विधिकारक श्री जितेन्द्रजी जैन ने विधि-विधान पूर्वक पूजन संपन्न करवाया।
संपूर्ण कार्यक्रम के लाभार्थी सुराना परिवार (भगवतसिंह - सरोज, विकास - ममता, स्व. वैभव - प्रियंका, अवि, खुशबू, भव्य एवं गार्गी सुराना) रहे। आयोजन को भव्य और व्यवस्थित बनाने में श्री जैन श्वेताम्बर वासुपूज्य महाराज मंदिर ट्रस्ट, श्री जिनदत्तसूरीश्वरजी दादावाड़ी ट्रस्ट मंडल, अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद् एवं महिला परिषद् का विशेष सहयोग रहा। पूजन के पश्चात सभी श्रद्धालुओं के लिए भोजन की व्यवस्था रखी गई।

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