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अहंकार के विसर्जन की प्रेरणा देता है उत्तम मार्दव धर्म - राष्ट्रसंत पुलक सागर

राष्ट्रसंत पुलक सागर के सानिध्य में विशेष 10 दिवसीय शिविर में मनाया दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म दिवस आचार्यश्री के हुए विशेष प्रवचन, 700 शिव...



राष्ट्रसंत पुलक सागर के सानिध्य में विशेष 10 दिवसीय शिविर में मनाया दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म दिवस

आचार्यश्री के हुए विशेष प्रवचन, 700 शिविरार्थियों ने की संगीतमय पूजा एवं धर्म आराधना

उदयपुर, 28 अगस्त। राष्ट्रसंत आचार्य पुलक सागर ससंघ का चातुर्मास सर्वऋतु विलास मंदिर में बड़ी धूमधाम से आयोजित हो रहा है । इसी श्रृंखला में शुक्रवार को दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म दिवस मनाया गया । राष्ट्रसंत आचार्य पुलक सागर के सानिध्य में टाउन हॉल में पाप नाशनम शिविर के अंतर्गत 700 शिविरार्थियों ने एक जैसे वस्त्र पहन कर शिविर में भाग लिया, और संगीतमय पूजा एवं धर्म आराधना की । चातुर्मास समिति के अध्यक्ष विनोद फांदोत ने बताया कि पहली बार आचार्य पुलक सागर महाराज के सानिध्य में दिगम्बर समाज के सभी पंथों का पर्युषण पर्व मनाया जा रहा है, कार्यक्रम की श्रृंखला में प्रात: 5.30 बजे प्राणायाम, प्रात: 7.30 बजे अभिषेक हुआ, उसके बाद शांतिधारा एवं पूजन सम्पन्न हुई । प्रात: 9.30 बजे आचार्यश्री का विशेष प्रवचन उत्तम मार्दव धर्म दिवस पर हुआ, जिसमें आचार्यश्री ने मार्दव धर्म को समझते हुए कहा कि अहंकार सबसे बड़ी समस्या है। समर्पण ही इसका समाधान है। समर्पण जीवन को स्वर्ग बना देता है। उत्तम मार्दव धर्म अहंकार के विसर्जन की प्रेरणा देता है। आत्मा और परमात्मा, भक्त और भगवान के बीच अहंकार का ही तो झीना पर्दा है। यह पर्दा हटते ही भगवान से भक्त का साक्षात् हो जाता है। अहंकार किसी का टिका नहीं है। रावण, कंस, दुर्योधन सबके उदाहरण हमारे सामने हैं। अहंकार के कारण ही ये सब पतन को प्राप्त हुए। जोड़ने के साथ छोडऩे का भी अहंकार होता है। दौलत पाना बड़ी बात नहीं है। दौलत पाकर विनम्रता बनाए रखना बड़ी बात है। बुलन्दी पर पहुँचना महत्त्वपूर्ण नहीं है, महत्त्वपूर्ण तो बुलन्दी पर टिके रहना है। साधना में संवेदनाओं को मत भूलो। दौलत को नहीं, दिलों को जीतना सीखो। शाख से टूटे हुए फूल ने कहा-  अच्छा होना भी बुरी बात है जमाने में परीक्षा हमेशा हीर और सोने की होती है। काँच और कोयले की परीक्षा नहीं ली जाती। इसलिए यदि आप पर कठिनाई आती है तो घबराएँ नहीं धैर्यपूर्वक उससे उबरने का प्रयास करें। ध्यान रखें, परीक्षा अच्छे और सच्चे की ही ली जाती है।
चातुर्मास समिति के महामंत्री प्रकाश सिंघवी एवं प्रचार संयोजक विप्लव कुमार जैन ने बताया कि प्रवचन के बाद 10.30 बजे सिंधी धर्मशाला में सभी साधकों का भोजन, दोपहर 12.30 बजे सामायिक मंत्र जाप, दोपहर 2 बजे धार्मिक प्रशिक्षण, शंका समाधान, तत्व चर्चा हुई । सायं 7.30 बजे गुरु भक्ति एवं श्रीजी की महाआरती हुई । उसके बाद प्रतिदिन रात्रि 8 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न हुए, जिसमें आचार्य पुलक सागर का स्वप्न तीर्थधाम जिनशरणम पार्श्वनाथ नाटक की प्रस्तुति हुई । इस अवसर पर विनोद फान्दोत, शांतिलाल भोजन, आदिश खोडनिया, पारस सिंघवी, अशोक शाह, शांतिलाल मानोत, नीलकमल अजमेरा, सेठ शांतिलाल नागदा सहित सम्पूर्ण उदयपुर संभाग से हजारों श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे।

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