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राज्यपाल कटारिया ने 15 शाश्वत बालिकाओं को ‘दर्शनशास्त्री’ एवं 8 शाश्वत कन्याओं को ‘धर्म प्रवेशिका’ की उपाधियाँ वितरित की

शाश्वत धाम में जैनदर्शन कन्या महाविद्यालय का सप्तम दीक्षान्त समारोह सम्पन्न उदयपुर, 5 मार्च- कुन्दकुंद कहान शाश्वत पार्मार्थिक ट्रस्ट उदयपुर...



शाश्वत धाम में जैनदर्शन कन्या महाविद्यालय का सप्तम दीक्षान्त समारोह सम्पन्न

उदयपुर, 5 मार्च- कुन्दकुंद कहान शाश्वत पार्मार्थिक ट्रस्ट उदयपुर के तत्वावधान में तुलसीदास जी की सराय डबोक  स्थित शाश्वत धाम में जैनदर्शन कन्या महाविद्यालय का सप्तम दीक्षान्त समारोह गरिमामय सम्पन्न हुआ। 

प्राचार्य अमित जैन ने बताया की सभी अतिथियों का शब्दो द्वारा स्वागत ट्रस्ट के मंत्री “राजस्थान गौरव” डॉ जिनेंद्र शास्त्री ने किया वही संस्था का परिचय संस्था के संयोजक डॉ अंकित शास्त्री ने दिया 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया व कार्यक्रम के अधिष्ठाता ढाईद्वीप जिनायतन, इंदौर  के ट्रस्टी व वरिष्ठ विद्वान पं. विपिन जी शास्त्री (मुंबई)  के कर कमलों से 23 बालिकाओं को डिग्री वितरित की गईं 

 विशिष्ट अतिथि उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन,अन्तरराष्ट्रीय कवि राव अजातशत्रु,पं. रमेश जी शास्त्री (सोनगढ़),संस्था के अध्यक्ष ललित कुमार किकावत,चांदमल किकावत,भावेश कालिका,नरेंद्र दलावत,ध्रुवधाम बांसवाड़ा अध्यक्ष महिपाल जैन ज्ञायक,समाजसेवी आई.एस.जैन थे ।

कार्यक्रम का शुभारंभ शाश्वत कृति जैन के 

मंगलाचरण ने किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य पं. अमित शास्त्री के अनुरोध तथा मुख्य अतिथि एवं अधिष्ठाता महोदय की अनुशंसा पर दर्शनशास्त्री’ तथा धर्म प्रवेशिका’ की उपाधि प्रदान की गई। 

इस प्रकार कुल 23 बालिकाओं को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। उपाधि प्राप्त समस्त बालिकाओं को शाश्वत धाम के अध्यक्ष श्री ललित जी किकावत द्वारा विशिष्ट शपथ दिलवाई गई।

मुख्य अतिथि श्री गुलाबचंद कटारिया ने अपने सम्बोधन में शाश्वत धाम की भूरी भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और संस्कारों की स्थापना है। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन की अहिंसा, आत्मसंयम और नैतिकता की शिक्षाएँ आज के समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने जैनदर्शन कन्या महाविद्यालय द्वारा बालिकाओं को संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान करने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संस्थान समाज के नैतिक और आध्यात्मिक भविष्य को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. महावीर प्रसाद जैन और डॉ. तपिश शास्त्री ने किया एवं आभार प्रदर्शन भावेश कालिका ने किया।

इनको मिली उपाधि 

बीए फ़ाइनल की छात्राओं को दर्शनशास्त्री की उपाधि 

खुशी जैन, लिपि जैन, आयुषी जैन, अस्ति जैन, गरिमा जैन, दृष्टि जैन, अदिति जैन, प्रज्ञा जैन, ऋषिका जैन, छवि जैन, डोली जैन, वंशिका जैन, सेजल जैन, रिया जैन, आर्या जैन को मिली वही 

दशवी पास बालिकाओं को धर्मप्रवेशिका की उपाधि 

आरोही जैन, दृशी जैन, माही जैन, प्रेरणा जैन, श्रेया कंधारकर, प्रसिद्धि जैन, लब्धि जैन, अदिति जैन को वितरित की गईं. समारोह में उदयपुर के स्थानीय समाज के गणमान्य जनों के साथ देश के विभिन्न स्थानों से पधारे हुए अतिथि, विद्वान एवं अभिभावकगण उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम का वातावरण उत्साह, गौरव एवं आध्यात्मिक प्रेरणा से परिपूर्ण रहा।

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