Page Nav

HIDE

Classic Header

{fbt_classic_header}

breaking news

latest

चंदन षष्ठी पर ध्यानोदय तीर्थ में गूंजा जिनभक्ति का स्वर, महिलाओं ने किया विशेष चंदन अभिषेक

तप, त्याग और संयम के साथ मनाया व्रत; गुरु मां सुप्रकाश मति माताजी ने बताया आत्मशुद्धि का मार्ग उदयपुर, 2 सितंबर। बलीचा स्थित ध्यानोदय तीर्थ ...


तप, त्याग और संयम के साथ मनाया व्रत; गुरु मां सुप्रकाश मति माताजी ने बताया आत्मशुद्धि का मार्ग

उदयपुर, 2 सितंबर। बलीचा स्थित ध्यानोदय तीर्थ (श्री सुप्रकाश मति ध्यान केंद्र) में बुधवार को दिगंबर जैन परंपरा के पावन चंदन षष्ठी (चंदन छठ) व्रत के अवसर पर श्रद्धा, भक्ति, तप और संयम का विशेष वातावरण रहा। इस अवसर पर महिलाओं ने भगवान का विशेष चंदन अभिषेक एवं शांतिधारा कर जिनभक्ति की।
अहमदाबाद के मेगानी नगर से लाइव प्रवचन में गणिनी आर्यिका 105 श्री सुप्रकाश मति माताजी ने चंदन षष्ठी के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह व्रत आत्मशुद्धि, संयम, तप और सद्गुणों के विकास का माध्यम है। उन्होंने कहा कि चंदन स्वयं शीतल रहकर वातावरण को सुगंधित करता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी क्षमा, शांति, संयम और त्याग जैसे गुणों को अपने जीवन में उतारना चाहिए।
उन्होंने बताया कि भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी को किया जाने वाला यह व्रत जैन धर्म में विशेष तपस्या का स्वरूप है। व्रती अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपवास, एकासन या रस-परित्याग का नियम लेकर आत्मसंयम का अभ्यास करते हैं। तीनों काल णमोकार मंत्र का जाप, जिनेंद्र भगवान की आराधना और स्वाध्याय से धार्मिक भावना मजबूत होती है।
गुरु मां ने ईश्वरदत्त सेठ एवं चंदना सेठानी की प्रेरणादायी कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि व्रत केवल शरीर को कष्ट देने का माध्यम नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धि का साधन है। इस अवसर पर ममता रजावत, डिम्पल डागरिया, आशा बाकलीवाल, मंजू पाटनी सहित अनेक महिलाओं ने व्रत रखकर पुण्यार्जन किया।
ध्यानोदय तीर्थ पर हुई प्रथम चंदन धारा श्रीमती इंदु गोदावत परिवार द्वारा की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान श्री 1008 चंद्रप्रभु की विशेष पूजा-अर्चना के साथ इच्छापूर्ण मां ज्वाला मालिनी की आराधना कर सुख, शांति एवं मंगल की कामना की। अनेक श्रद्धालुओं ने अन्न-जल का त्याग कर उपवास किया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार चंदन षष्ठी व्रत के नियमित पालन से आत्मसंयम और तप की भावना दृढ़ होती है। व्रत की पूर्णता पर उद्यापन, जिनालय निर्माण, जिनबिंब स्थापना, शास्त्रदान तथा त्यागी-व्रतियों को आहारदान जैसे कार्यों का विशेष महत्व माना गया है।
कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर आत्मशुद्धि, संयम, तप और जिनभक्ति का संकल्प लिया। ध्यानोदय तीर्थ के चेयरमैन ओम गोदावत ने सभी व्रती महिलाओं के पुण्य की अनुमोदना करते हुए उनके तप एवं भक्ति की सराहना की।

No comments