उदयपुर। राजस्थान सिंधी अकादमी के पूर्व अध्यक्ष हरीश राजानी ने बताया कि सिंधी समाज का पारंपरिक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्व थदड़ी गुरुवार को...
उदयपुर। राजस्थान सिंधी अकादमी के पूर्व अध्यक्ष हरीश राजानी ने बताया कि सिंधी समाज का पारंपरिक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्व थदड़ी गुरुवार को श्रद्धा, भक्तिभाव और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाएगा। समाज की महिलाएं सज-धजकर मंगल गीत गाती हुई शहर के विभिन्न भगवान श्री झूलेलाल मंदिरों में पहुंचेंगी और शीतला माता की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य एवं खुशहाली की कामना करेंगी। थदड़ी की परंपरा के अनुसार एक दिन पूर्व ही घरों में विभिन्न सिंधी व्यंजन तैयार किए जाते हैं। शीतला माता को इन व्यंजनों का भोग लगाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाएगा। पर्व के दिन घरों में चूल्हा नहीं जलेगा। मिठी मानी, चोपा, खोराक, टिक्की, खीरणी, सन्ना पकौड़ा सहित पारंपरिक पकवानों से घर-आंगन महक उठेंगे। समाज के अध्यक्ष हरीश राजनी ने बताया कि थदड़ी केवल ठंडा भोजन ग्रहण करने की परंपरा नहीं, बल्कि जीवन में शीतलता, संयम, स्वच्छता और सकारात्मकता का संदेश देने वाला पर्व है। श्रद्धालु शीतला माता से प्रार्थना करेंगे कि तन के साथ मन शांत, मस्तिष्क स्थिर और विचार निर्मल रहें। क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष और नकारात्मकता दूर हो तथा प्रेम, करुणा, क्षमा, संतोष और सद्भाव के भाव विकसित हों। वाणी में मधुरता की भी होगी कामना थदड़ी पर वाणी की शीतलता की भी विशेष कामना की जाएगी। श्रद्धालु प्रार्थना करेंगे कि उनकी वाणी सत्य के साथ मधुर, संयमित और विनम्र हो। कटु शब्दों से किसी के मन को ठेस न पहुंचे और हमारी वाणी परिवार एवं समाज में शांति, प्रेम और प्रसन्नता का माध्यम बने। महिलाएं पारंपरिक लोकगीत ‘सावण माई सतहिं आई, भरियूं झोलीयूं डे...’ गाकर श्रद्धा व्यक्त करेंगी।

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