Page Nav

HIDE

Classic Header

{fbt_classic_header}

breaking news

latest

क्षेत्रीय संस्कृति महोत्सव में शामिल हुए राजस्थान के 250 विद्यार्थी, संस्कृति, परंपरा और जीवन मूल्य सीख रहे

विद्या निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय सेक्टर 4 में आयोजित हो रहा है शिविर उदयपुर। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान कुरुक्षेत्र की ओर से स...



विद्या निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय सेक्टर 4 में आयोजित हो रहा है शिविर

उदयपुर। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान कुरुक्षेत्र की ओर से संस्कृति बोध परियोजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष राष्ट्रीय स्तर पर संस्कृति ज्ञान परीक्षा का आयोजन किया जाता है, जिसमे देशभर में लगभग साढ़े 22 लाख छात्र सम्मिलित होते है।  संस्थान द्वारा क्षेत्रीय संस्कृति महोत्सव 2024 उदयपुर में 13 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक स्थानीय विद्या निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय सेक्टर 4 में आयोजित हो रहा है।

विश्व के प्रत्येक देश में अपनी संस्कृति, परंपराओं, जीवन मूल्य, ज्ञान विज्ञान एवं महापुरुषों के अनुभवों को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में भावी पीढ़ी को शिक्षा के माध्यम से सौंपने का प्रयास होता है। इसी का अनुसरण करते हुए विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान द्वारा प्रतिवर्ष संस्कृति महोत्सव का आयोजन किया जाता है इसके अंतर्गत शिशु वर्ग, बाल वर्ग, किशोर वर्ग और तरुण वर्ग के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन जिला, प्रांत, क्षेत्र व राष्ट्रीय स्तर पर होता है।



उदयपुर में 13 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक क्षेत्रीय संस्कृति महोत्सव 2024 का आयोजन हो रहा है जिसमें चित्तौड़, जयपुर, जोधपुर प्रांत के यानी संपूर्ण राजस्थान के 250 से अधिक विजेता प्रतिभागी छात्र अपने-अपने प्रांत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यहाँ से विजेता प्रतिभागी राजस्थान क्षेत्र का प्रतिनिधित्व 16 नवम्बर से उज्जैन में शुरू होने वाली राष्ट्रीय स्तर (अखिल भारतीय स्तर) की प्रतियोगिता में करेंगे। 

इस क्षेत्रीय संस्कृति महोत्सव में अलग-अलग वर्गों में प्रश्न मंच, मूर्तिकला, आशु-भाषण एवं कथा कथन तथा आचार्य पत्र वाचन प्रतियोगिता आयोजित होगी तथा विशेष प्रस्तुति के रूप में दिनांक 14 अक्टूबर को दोपहर 2 से 7 बजे तक कक्षा 6 से 10 तक के प्रतिभागियो द्वारा मिट्टी की मूर्ति बनाना और सायं साढे 8 बजे राज्य स्तर पर चयनित प्रतियोगियों द्वारा चुनिंदा लोक नृत्य की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। लोकनृत्यों के संवर्धन के लिए लोक नृत्य और विद्यार्थियो में शिल्प कला के प्रति रूचि जाग्रत करने व उनमे निपुणता, सृजनात्मकता लाने हेतु मूर्तिकला की विधा जोड़ी गई है।



14 अक्टूबर को प्रातः 9 बजे उद्घाटन समारोह मुख्य अतिथि उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत ,मुख्य वक्ता गोविंद जी, अध्यक्षता रमेश चंद्र शुक्ला, कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि नवीन झा तथा प्रकाश फुलानी के सानिध्य में संपन्न हुआ।

अतिथियों का परिचय विद्या भारती उदयपुर जिला सचिव कालू जी चौबिसा द्वारा कराया गया तथा कार्यक्रम की रूपरेखा (रचनात्मक जानकारी) रमेश शुक्ला द्वारा बताई गई।

जोधपुर प्रांत की बहन भूमि ने भावगीत लक्ष्य तक पहुंचे बिना पथिक विश्राम कैसा सुना कर सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया।

मुख्य वक्ता गोविंद जी ने अपने उद्बोधन ने कहा कि हमारी संस्कृति, जीवन मूल्य को हमारे जीवन में हमें आत्मसात करना है। हमारी संस्कृति को जानना है, मानना है, समझना है तथा जीना है, हमारे पूर्वजों से हमें संस्कार मिले हैं हमें आने वाली पीढ़ी में इन संस्कारों को आगे बढ़ाना है।

संस्कृति ज्ञान परीक्षा, संस्कृति महोत्सव इन बातों को हमारे अंदर समाहित करने का काम कर रहा है।

मुख्य अतिथि सांसद मन्ना लाल रावत ने कहा कि वर्तमान ऐसा कालखंड है जब भारतीय संस्कृति को बड़ा महत्व मिल रहा है ।

2047 में हमारा भारत विकसित हो चुका होगा, परम वैभव को प्राप्त कर चुका होगा ,इसमें भारतीय नृत्य, संगीत, रीति रिवाज को भारतीय संस्कृति का विचार प्रमुख भूमिका निभाएगा। हमारे जीवन में भारत का विचार आता जा रहा है जो की राष्ट्रवाद को भरने का काम कर रहा है। आभार प्रदर्शन विद्या भारती उदयपुर के अध्यक्ष प्रकाश जी फुलानी ने किया। कार्यक्रम का संचालन पूनम चंद राठौर के द्वारा किया गया।

इसके अलावा अलग-अलग वर्गों में आज प्रश्न मंच प्रतियोगिता आयोजित हुई तथा बच्चों में मूर्ति कला को विकसित करने, सृजनात्मक लाने के लिए मूर्ति कला की प्रतियोगिता हुई जिसमें तीनों प्रांतों के भैया बहनों ने उत्साह पूर्ण रूप से भाग लिया।

No comments