उदयपुर, 1 सितंबर। राष्ट्रीय संत दिवंगत श्री तरुण सागर जी महाराज की 7वीं पुण्यतिथि पर शहर के ख्यातनाम शिल्पकार डॉ.चन्द्रप्रकाश चित्तौड़ा ने एक...
उदयपुर, 1 सितंबर। राष्ट्रीय संत दिवंगत श्री तरुण सागर जी महाराज की 7वीं पुण्यतिथि पर शहर के ख्यातनाम शिल्पकार डॉ.चन्द्रप्रकाश चित्तौड़ा ने एक लघु पुस्तिका एवं 51 फीट लंबा पत्रक बनाकर उनकी स्मृतियों को संजोया है। चित्तौड़ा के अनुसार दिवंगत श्री तरूण सागर जी महाराज ने 13 साल की उम्र में 8 मार्च 1981 को उन्होंने घर छोड़ा और 20 साल की उम्र में 20 जुलाई 1988 को राजस्थान के बागीदौरा में दिगंबर मुनि दीक्षा ली. कड़वे प्रवचन के लिए प्रसिद्ध, उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं और जैन धर्म से जुड़ी जानकारी को सरल तरीके से लोगों तक पहुँचाने के लिए टीवी पर भी कार्यक्रम किए। उन्होंने अपनी वाणी एवं उपदेशों से हर वर्ग को प्रभावित किया है। चित्तौड़ा ने अपनी इस कृति में संत श्री तरुण सागर जी महाराज के जीवन परिचय, विभिन्न उपलब्धियों, उनके संस्मरण, पुस्तकें एवं जुड़े विभिन्न पहलुओं का सुंदर चित्रण व संग्रहण किया है।

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