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मकर संक्रांति – गौ सेवा, दान और पुण्य का महापर्व हैं -डॉ शास्त्री

शिवशंकर गौशाला में जीव दया का आयोजन सम्पन्न  उदयपुर 15 जनवरी -मकर संक्रांति के पावन अवसर पर शुद्धम् ग्रुप के तत्वावधान में स्वर्गीय लक्ष्मीच...


शिवशंकर गौशाला में जीव दया का आयोजन सम्पन्न 

उदयपुर 15 जनवरी -मकर संक्रांति के पावन अवसर पर शुद्धम् ग्रुप के तत्वावधान में स्वर्गीय लक्ष्मीचंद भोरावत की पुण्य स्मृति में कलडवाल स्थित शिव शंकर गौशाला में विशेष आयोजन किया गया। 

गौ सेवा कार्य में श्रीमती पुष्पा देवी जैन,मनोहर भोरावत,”राजस्थान गौरव” डॉ.जिनेंद्र शास्त्री एवं डॉ.सीमा जैन ने गौमाताओं को गुड़-तिल के लड्डू खिलाकर पर्व श्रद्धा एवं सेवा भाव के साथ मनाया। सभी अतिथियों का स्वागत गौशाला सचिव श्रीमती शालिनी सुरेंद्र चौहान ने किया 

डॉ शास्त्री ने कहा की मकर संक्रांति – गौ सेवा, दान और पुण्य का महापर्व हैं. मकर संक्रांति सनातन संस्कृति का एक अत्यंत पावन और वैज्ञानिक महत्व वाला पर्व है। इस दिन सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिससे उत्तरायण का आरंभ होता है। उत्तरायण को देवताओं का दिन माना गया है, अतः यह समय दान, तप, सेवा और पुण्य कर्मों के लिए अत्यंत श्रेष्ठ होता है।

मकर संक्रांति का विशेष महत्व गौ सेवा से जुड़ा हुआ है। सनातन धर्म में गौ को माता का दर्जा प्राप्त है। शास्त्रों के अनुसार गौ में समस्त देवताओं का वास होता है, इसलिए गौ सेवा से अनेक यज्ञों के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन गाय को हरा चारा, गुड़, तिल, चोकर, रोटी या फल खिलाना विशेष फलदायी माना गया है।

इस पर्व पर दान का भी विशेष महत्व है। तिल, गुड़, खिचड़ी, वस्त्र, अन्न, घी, कम्बल तथा पात्र दान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। कहा गया है—“तिल दानं महापुण्यं मकरें सूर्ये रवौ” अर्थात मकर संक्रांति के दिन तिल का दान महान पुण्य प्रदान करता है। इस अवसर पर वृक्षम अमृतम सेवा संस्थान अध्यक्ष श्री गोपेश शर्मा, सचिव श्री यशवन्त त्रिवेदी और एक्जीक्यूटिव सदस्य श्री महेश उपाध्याय,गौशाला के प्रवक्ता श्री नरेश पूर्बिया मौजूद थे. 

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