उदयपुर। मकर संक्रांति के पावन दिवस पर गुलाब बाग आरएमवी रोड स्थित अर्बुदा कला मंदिर संगीत प्रशिक्षण संस्थान हरियाली रेस्टोरेंट में बुधवार शाम...
उदयपुर। मकर संक्रांति के पावन दिवस पर गुलाब बाग आरएमवी रोड स्थित अर्बुदा कला मंदिर संगीत प्रशिक्षण संस्थान हरियाली रेस्टोरेंट में बुधवार शाम को भारतीय शास्त्रीय भजन संध्या का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उदयपुर शहर के एकमात्र प्रतिष्ठित युवा शास्त्रीय गायक समर्थ जानवे ने राग मुल्तानी विलंबित एक ताल और द्रुत तीन ताल में विरह की रचना आए सजनवा गाकर अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की। तत्पश्चात जानवे ने विप्र लंभ श्रृंगार का कबीर दास जी भजन तड़पे बिन बालम मोरा जिया नैन तकत गए पंथ ना सुझे सुनाकर अचंभित कर दिया और खूब दाद पाई। इनके साथ उदयपुर के ही युवा कलाकारों हारमोनियम पर दुष्यंत चारण और अनूज प्रजापत तबले पर नवीन राव तानपुरे पर सलोनी रावत ने संगत की। संस्थान के प्रधानाचार्य महेंद्र कुमार वर्मा ने अपने उद्बोधन में भारतीय शास्त्रीय संगीत को जीवंतता प्रदान करने के लिए संगीत गोष्ठियों को अधिक से अधिक नियमित आयोजित करने की आवश्यकता जताई । मुख्य अतिथि सिंफनी मिनिटोरियम के संस्थापक एवं निदेशक रमेश प्रजापत थे। अध्यक्षता संस्थान के संरक्षक सुरेश चंद्र अग्रवाल और विशिष्ट अतिथि सुव्रत अग्रवाल थे। संस्थान की कोरियोग्राफर और सह निदेशक निकिता अग्रवाल ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं सहित अभिभावक गण और वरिष्ठ नागरिक संगीत अध्यापक ओम प्रकाश टांक रंग कमीॅ विलास जानवे, श्रीमती रेखा अग्रवाल महेंद्र अग्रवाल एवं अन्य विशिष्ट नागरिक उपस्थित थे। समारोह के अंत में सभी कलाकारों को प्रतीक चिन्ह प्रदान किए गए।

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