उदयपुर 25 फ़रवरी-फ्लेम यूनिवर्सिटी पूणे के छात्र प्रतिनिधियों ने “डिस्कवरी इंडिया प्रोजेक्ट” (डीआईपी) के अंतर्गत उदयपुर,मेवाड़ क्षेत्र पर केंद...
उदयपुर 25 फ़रवरी-फ्लेम यूनिवर्सिटी पूणे के छात्र प्रतिनिधियों ने “डिस्कवरी इंडिया प्रोजेक्ट” (डीआईपी) के अंतर्गत उदयपुर,मेवाड़ क्षेत्र पर केंद्रित “मेरा पुराना उदयपुर शहर” विषय पर विशेष साक्षात्कार “राजस्थान गौरव” डॉ. जिनेंद्र शास्त्री के साथ उनके निज निवास शुद्धम् के प्रांजल परी शीश महल में आयोजित किया।
साक्षात्कार ध्वनि कोठारी एवं अदिति बम्ब ने लिया। श्याम फोटोग्राफर, सूर्या मिरयाला, सिया कब्र, प्रियांशी अग्रवाल, मयंक शाह, श्रेया अग्रवाल आरुषि वैद, दर्श गुप्ता, वंश ठक्कर, विराट शाह एवं आदित्य ठक्कर भी मौजूद थे। सम्पूर्ण साक्षात्कार प्रो डॉ. दामिनी गोयल गुप्ता के निदर्शन में सम्पन्न हुआ
इस संवाद में उदयपुर के इतिहास, संस्कृति, सामाजिक संरचना और समकालीन चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। डॉ. शास्त्री ने कहा कि मेवाड़, जो आज के राजस्थान के प्रमुख ऐतिहासिक क्षेत्र है, अपनी वीरता, राजपूत परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध रहा है। विशेष रूप से उदयपुर को मेवाड़ की सांस्कृतिक राजधानी माना जाता है।
उन्होंने छात्रों को क्षेत्र की ऐतिहासिक निरंतरता और लोक परंपराओं के संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। साक्षात्कार के दौरान विद्यार्थियों ने मेवाड़ के ग्रामीण विकास, जल संसाधन प्रबंधन और शिक्षा की स्थिति पर प्रश्न उठाए।
डॉ. शास्त्री ने कहा कि अरावली क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियां स्थानीय जीवनशैली और आजीविका को गहराई से प्रभावित करती हैं। साथ ही, पर्यटन और हस्तशिल्प उद्योग यहां की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
“डिस्कवरी इंडिया प्रोजेक्ट” के अंतर्गत अध्ययन
इस परियोजना के तहत छात्र उदयपुर मेवाड़ की सांस्कृतिक पहचान का दस्तावेजीकरण कर रहे हैं। स्थानीय समुदायों के साथ संवाद स्थापित कर रहे हैं। सामाजिक परिवर्तन और विकास की संभावनाओं का विश्लेषण कर रहे हैं
डॉ. शास्त्री ने जोर देकर कहा कि इस प्रकार का अध्ययन विद्यार्थियों को जमीनी वास्तविकताओं से जोड़ता है और उनमें शोध कौशल व सामाजिक संवेदनशीलता विकसित करता है।


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