उदयपुर, 28 फ़रवरी । महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकीविश्वविद्यालय से संघटकमहाविद्यालय राजस्थान कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर (आरसीए), उदयपुर मे...
उदयपुर, 28 फ़रवरी । महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकीविश्वविद्यालय से संघटकमहाविद्यालय राजस्थान कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर (आरसीए), उदयपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस)के अंतर्गत 23 फरवरी से 1 मार्च 2026तक सात दिवसीय विशेष शिविर का सफल आयोजन किया गया। शिविर के दौरानस्वयंसेवकों द्वारा समाज सेवा से जुड़ी विभिन्न गतिविधियाँ जैसे श्रमदान, स्वच्छता अभियान, सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम एवंग्रामीण क्षेत्र में जनजागरण अभियान संचालित किए गए। शिविर का मुख्य उद्देश्यविद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना तथा उन्हें समाजसेवा से जोड़ना था। शिविर के दौरान विभिन्न विषय विशेषज्ञों द्वारा विद्यार्थियोंको जागरूक करने हेतु व्याख्यान आयोजित किए गए। राजस्थान कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर केअधिष्ठाता डॉ. एम. के. मेहला ने विद्यार्थियों को एनएसएस के नियमों, उद्देश्यों एवं समाज सेवा में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में विस्तारसे जानकारी दी तथा युवाओं से समाज के प्रति संवेदनशील एवं उत्तरदायी बनने काआह्वान किया।सामाजिककार्यकर्ता एवं उपभोक्ता अधिकार संगठन की अध्यक्ष डॉ. राजश्री गांधी नेविद्यार्थियों को प्रेरणादायक संबोधन देते हुए उपभोक्ता अधिकारों एवं कर्तव्यों केबारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जागरूक उपभोक्ता ही समाज को सही दिशा देसकता है तथा युवाओं को अपने अधिकारों के साथ-साथ जिम्मेदारियों के प्रति भी सजगरहना चाहिए।नशा मुक्तिअभियान से जुड़े विशेषज्ञ डॉ. पी. सी. जैन ने विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार केनशों के दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने बताया किवर्तमान समय में नेल पॉलिश, पेट्रोल, थिनर एवं रिमूवर जैसे रसायनों का दुरुपयोगभी नशे के रूप में सामने आ रहा है, जो युवाओं के स्वास्थ्यऔर भविष्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। उन्होंने बताया कि इनमें पाए जाने वालेटोल्यून, एसीटोन एवं अन्य वाष्पशील रसायन सीधे मस्तिष्क कोप्रभावित करते हैं। प्रारंभ में ये चक्कर एवं कृत्रिम आनंद का अनुभव कराते हैं,किंतु धीरे-धीरे गंभीर लत में परिवर्तित होकर स्मरण शक्ति में कमी,सिरदर्द, चक्कर, मानसिकतनाव एवं अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न करते हैं।करियर कोच एवंजे.एस. ग्लोबल, उदयपुर के संस्थापक श्री जितेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों को करियरमार्गदर्शन प्रदान करते हुए बताया कि तकनीक के इस युग में युवाओं के लिए करियर कीअसीम संभावनाएँ उपलब्ध हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को केवल डिग्री पर निर्भर नरहकर व्यावहारिक कौशल विकसित करने, डिजिटल लत से बचने तथाप्रारंभिक वर्षों से ही इंटर्नशिप एवं पार्ट-टाइम कार्यों के माध्यम से अनुभवअर्जित करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया एवं ऑनलाइन गेम्स कीबढ़ती लत युवाओं को समाज से दूर कर रही है, इसलिए इनकासंतुलित उपयोग आवश्यक है।शिविर केअंतर्गत एक दिन एनएसएस स्वयंसेवकों को विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए हिंताग्राम में भी ले जाया गया। वहाँ विद्यार्थियों ने ग्रामीणों के मध्य जागरूकता रैलीनिकालकर सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संदेश दिया। रैली के माध्यम से ग्रामीणों कोबालिका शिक्षा को बढ़ावा देने, दहेज प्रथा का विरोध करने, बच्चों को मोबाइल केदुरुपयोग से बचाने, साइबर फ्रॉड से सतर्क रहने, स्वच्छता बनाए रखने, जल संरक्षण करने एवं अधिक सेअधिक वृक्षारोपण करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही बेटा-बेटी में भेदभाव नकरने का संदेश भी दिया गया।शिविर के दौरानआरसीए परिसर में स्वच्छता अभियान भी चलाया गया। इस अवसर पर डॉ. एस. सी. मीणा नेविद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए गुणवत्तापूर्ण जीवनशैली एवं सकारात्मक सोच केमहत्व पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम मेंसभी विषय विशेषज्ञों का स्वागत एनएसएस प्रभारी डॉ. हरि सिंह मीणा द्वारा किया गयातथा आभार ज्ञापन डॉ. अर्जुन सिंह राजपूत ने व्यक्त किया। पूरे शिविर के दौरान डॉ.हरि सिंह मीणा एवं डॉ. अर्जुन सिंह राजपूत की सक्रिय भूमिका रही, वहीं अधिष्ठाता डॉ. मनोज कुमार महला द्वारासमय-समय पर शिविर की गतिविधियों का निरीक्षण किया गया। अंत में सांस्कृतिककार्यक्रम के साथ सात दिवसीय एनएसएस विशेष शिविर का उत्साहपूर्ण समापन किया गया।

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