कोटा पुलिस की बड़ी कार्रवाई, आईजी कोटा रेंज ने घोषित किया था 50 हजार रुपये का इनाम जयपुर 10 मार्च। कोटा शहर पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते ह...
कोटा पुलिस की बड़ी कार्रवाई, आईजी कोटा रेंज ने घोषित किया था 50 हजार रुपये का इनाम
जयपुर 10 मार्च। कोटा शहर पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए घर बैठे रोजगार का झांसा देकर हजारों लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अन्तर्राज्यीय ठग कुमार सानू उर्फ दीपक सिंह पुत्र विजय कुमार, उम्र 25 वर्ष, निवासी ग्राम बौरना, थाना गोगरी, जिला खगड़िया बिहार) को बिहार से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आईजी कोटा रेंज द्वारा 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
पुलिस अधीक्षक कोटा शहर तेजस्वनी गौत्तम ने बताया कि 15 नवम्बर 2025 को पीड़ित कुलदीप शर्मा व अन्य लोगों ने थाना अनंतपुरा में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि दीपक सिंह नामक व्यक्ति ने Oasis Enterprises नाम से एक कंपनी खोलकर घर बैठे रोजगार देने का झांसा दिया। आरोपी ने करीब 8500 लोगों से 2500-2500 रुपये सुरक्षा राशि के नाम पर जमा करवाकर लगभग 2 करोड़ रुपये की ठगी कर ली और रातों-रात कार्यालय बंद कर फरार हो गया।
मामले की गंभीरता और बड़ी संख्या में पीड़ितों को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिलीप सैनी के सुपरविजन में विशेष जांच दल का गठन किया। जांच का जिम्मा वृताधिकारी वृत चतुर्थ मनीष शर्मा को सौंपा गया। उनके निर्देशन में थानाधिकारी अनंतपुरा रमेश कविया के नेतृत्व में तकनीकी रूप से दक्ष पुलिसकर्मियों की टीम बनाई गई। आरोपी ने अपनी पहचान छुपाने के लिए फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल किया था, जिससे उसकी गिरफ्तारी पुलिस के लिए चुनौती बन गई थी। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए आईजी कोटा रेंज द्वारा 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था।
घर बैठे रोजगार के नाम पर रचा ठगी का जाल
जांच में सामने आया कि आरोपी कुमार सानू एक शातिर और पेशेवर ठग है। उसने कोटा के सुभाष नगर में Oasis Enterprises नाम से फर्जी कंपनी खोलकर अखबारों में घर बैठे रोजगार के आकर्षक विज्ञापन प्रकाशित करवाए। बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को पुस्तकें तैयार करने का काम देने के नाम पर 2500 रुपये सुरक्षा राशि के रूप में जमा करवाए जाते थे। ठगी के नेटवर्क को तेजी से फैलाने के लिए उसने चेन मार्केटिंग का सहारा लिया और नए सदस्य जोड़ने पर 500 रुपये कमीशन का लालच दिया। इस तरीके से उसने कुछ ही महीनों में करीब 8500 लोगों से लगभग 2 करोड़ रुपये की ठगी कर ली।
तकनीकी विश्लेषण से खुली असली पहचान
वारदात के बाद आरोपी लगातार ठिकाने बदलता रहा और नाम बदलकर पुलिस से बचने की कोशिश करता रहा। इस दौरान कॉन्स्टेबल फरसाराम ने डिजिटल फुटप्रिंट और तकनीकी डेटा का गहन विश्लेषण किया। उनकी मेहनत से आरोपी की असली पहचान कुमार सानू पुत्र विजय कुमार निवासी खगड़िया बिहार के रूप में सामने आई। तकनीकी विश्लेषण में यह भी सामने आया कि आरोपी उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी इसी तरह की ठगी की वारदातें कर चुका है।
बिहार के होटल में दबिश देकर गिरफ्तारी
फरसाराम द्वारा दिए गए तकनीकी इनपुट के आधार पर थानाधिकारी रमेश कविया के नेतृत्व में पुलिस टीम बिहार रवाना हुई। टीम ने पटना से भागलपुर तक कई दिनों तक गुप्त रूप से निगरानी की। डिजिटल सर्विलांस से पुष्टि होने पर पुलिस ने भागलपुर के नवगछिया स्थित होटल वैभव में दबिश दी, जहां वह अपनी पत्नी के साथ रुका हुआ था। पुलिस ने आरोपी को मौके से गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी के पास से 1 लाख 88 हजार 500 रुपये नकद, ठगी में प्रयुक्त लाल रंग की हुंडई औरा कार, तथा कई फर्जी आधार कार्ड और ई-श्रम कार्ड बरामद किए गए। आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर कोटा लाया जा रहा है, जहां उससे ठगी की शेष रकम और अन्य साथियों के बारे में पूछताछ की जाएगी।
कई राज्यों में कर चुका है ठगी
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी पहले भी दरभंगा (बिहार), रांची (झारखंड), दुर्ग (छत्तीसगढ़), सहारनपुर (उत्तरप्रदेश), बीकानेर (राजस्थान) और इंदौर (मध्यप्रदेश) सहित कई शहरों में मोतियों की माला बुनने, स्वेटर बुनने जैसे घर बैठे काम दिलाने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है।
विशेष भूमिका: आरोपी की पहचान उजागर कर उसे गिरफ्तार कराने में कांस्टेबल फरसाराम (2046) की मुख्य भूमिका रही।
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