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बालश्रम रेस्क्यू के साथ बालश्रमिको के बेहतर पुनर्वास पर कार्य आवश्यक: चौधरी

अंतर्राष्ट्रीय बालश्रम निषेध दिवस विशेष, पिछले एक वर्ष में 152 बाल श्रमिकों को कराया जा चुका मुक्त, कार्यशाला संपन्न उदयपुर, 12 जून। बालश्रम...


अंतर्राष्ट्रीय बालश्रम निषेध दिवस विशेष, पिछले एक वर्ष में 152 बाल श्रमिकों को कराया जा चुका मुक्त, कार्यशाला संपन्न

उदयपुर, 12 जून। बालश्रम सामाजिक बुराई होने के साथ हमारे समाज पर एक कलंक है, हमें मिलकर सतत प्रयास करते रहने होंगे तभी इसे जड़ से खत्म किया जा सकता है। बाल श्रमिकों के रेस्क्यू के साथ उनके बेहतर पुनर्वास पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। वर्तमान में उदयपुर जिला मुख्यालय पर आश्रय ग्रह नहीं होने से इनके शेल्टर की चुनौती बनी रहती है। इस दिशा में भी सोचना होगा। 

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उदयपुर के नवनियुक्त सचिव राहुल चौधरी ने अंतर्राष्ट्रीय बालश्रम निषेध दिवस के उपलक्ष में शहर के हिरण मगरी सेक्टर 6 स्थित गायत्री सेवा संस्थान, उदयपुर के सभागार में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए यह बात कही। 

इस अवसर पर बाल अधिकार विशेषज्ञ एवं गायत्री सेवा संस्थान के निदेशक डॉ. शैलेंद्र पंड्या ने बालश्रम निषेध दिवस की जानकारी देते हुए बताया कि हमारा प्रयास रहेगा कि हम आगामी 12 जून 2027 तक उदयपुर शहर को “बालश्रम मुक्त उदयपुर” आमजन के सहयोग से बना पाए। उदयपुर संभाग बालश्रम का सोर्स स्थान है जहा से बच्चे बालश्रम के लिए ले जाये जाते हैं एवं हमें बालश्रम के डिमांड साइड यानी कहां से उनकी मांग आ रही है उस तरफ मुख्य रूप से कार्य करना की आवश्यकता है, ताकि हम डिमांड को खत्म कर पाए जिससे बच्चा बालश्रम में जाए नहीं। खासकर जो भी ट्रिफ़िकर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं उन पर सख्ती से कार्यवाही करने की आवश्यकता है जिससे उन पर लगाम लगाई जा सके।  संस्थान द्वारा जिला प्रशासन, मानव तस्करी विरोधी यूनिट के सहयोग में पिछले 1 वर्ष में कुल 152 बाल श्रमिकों को मुक्त करवाने के साथ 50 से ज्यादा पुलिस एफ.आई.आर दर्ज करवाई गई साथ ही इस वर्ष नवाचार करते हुए जिन प्रतिष्ठानों में बाल श्रमिक नहीं मिलता उन्हें सम्मानित भी करवाया जाएगा। 

कार्यक्रम को विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राजस्थान चाइल्ड एडवाइजरी ग्रुप (आर-केग) के अध्यक्ष एवं समाजसेवी चंद्रगुप्त सिंह चौहान ने बताया कि हमें एक कार्य योजना बनाकर वर्तमान सरकार के सामने रखनी होगी ताकि जिले में बंद हुए समस्त बाल गृहों को पुनः संचालित किया जा सके। 

पुलिस विभाग की मानव तस्करी विरोधी यूनिट के प्रभारी दयालाल चौहान ने पुलिस विभाग द्वारा राज्य में बालश्रम की रोकथाम हेतु चलाये जा रहे विशेष अभियान “उमंग टप्प्” की जानकारी देते हुए बताया की उक्त अभियान 1 जून से 30 जून तक चलाया जायेगा। 

कार्यक्रम के अंत में शिक्षाविद् एवं गायत्री सेवा संस्थान के पूर्व अध्यक्ष डॉ. शरदचंद पुरोहित ने सभी धन्यवाद् करते हुए कहा कि इन सभी बच्चो के पुनर्वास का बेहतर तरीका इनको शिक्षा से जोड़कर निरंतर फॉलोअप हो क्योंकि शिक्षा ही ऐसा माध्यम है जिससे इन्हें बालश्रम के दलदल से निकाला जा सकता है। सभी अतिथियों द्वारा विशेष अभियान “उमंग टप्प्” के पोस्टर का विमोचन किया गया।  

कार्यक्रम में आर.केग.के सदस्य डॉ.राजश्री गांधी, डॉ.राजकुमारी भार्गव, अर्चना सिंह चारण, प्रदीप रवानी ने अपने विचार रखे एवं कार्यक्रम में विभिन्न स्वयं सेवी संस्थानों के प्रतिनिधि, आर-कैग के सदस्य, मानव तस्करी विरोधी यूनिट के प्रतिनिधि सहित बच्चो से जुड़े विभागीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन गायत्री सेवा संस्थान के कार्यक्रम समन्वयक नितिन पालीवाल ने किया।  

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