उदयपुर, 10 जून। त्रिशला जागृति मंच द्वारा श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, स्वाध्याय भवन, हिरण मगरी सेक्टर-11 में जैन धर्म के विभिन्न विषयों...
उदयपुर, 10 जून। त्रिशला जागृति मंच द्वारा श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, स्वाध्याय भवन, हिरण मगरी सेक्टर-11 में जैन धर्म के विभिन्न विषयों पर जैन विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराना था, जहाँ वे निर्भीक होकर अपने विचार व्यक्त कर सकें, सार्वजनिक मंच पर बोलने का आत्मविश्वास विकसित कर सकें तथा समाज और धर्म से जुड़े विषयों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. निलेश जैन ने अपने उद्बोधन में कहा कि जैन धर्म केवल पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक श्रेष्ठ कला है। भगवान महावीर द्वारा प्रतिपादित अहिंसा, अनेकांत, अपरिग्रह एवं संयम के सिद्धांत आज भी मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को समाज निर्माण की धुरी बताते हुए उनके वैचारिक एवं बौद्धिक विकास के लिए ऐसे मंचों की आवश्यकता है, जहाँ वे अपने विचारों को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त कर सकें। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास से परिपूर्ण महिला ही परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. किरण जैन ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि नारी केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं, बल्कि संस्कारों की संवाहक भी है। जैन धर्म के आदर्शों को व्यवहार में उतारकर महिलाएँ समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं। उन्होंने महिलाओं को अध्ययन, स्वाध्याय, चिंतन और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से स्वयं को सशक्त बनाने का संदेश दिया।संगोष्ठी में डॉली जैन, रुचिता भोरावत, प्रतिभा चंदावत, मीनाक्षी दामावत, प्रमिला भदावत, मंजू टिमरवा, मधु भोरावत, अनीता पंचोली सहित अनेक महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। प्रतिभागियों ने अहिंसा का महत्व, वर्तमान युग में भगवान महावीर के संदेशों की प्रासंगिकता, जीवन में धार्मिक संस्कारों का महत्व, जैन धर्म में शाकाहार, संयमपूर्ण जीवनशैली, माता-पिता का सम्मान तथा णमोकार मंत्र की महिमा जैसे विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने जैन सिद्धांतों को वर्तमान जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए समाज में नैतिकता, संस्कार और मानवीय मूल्यों के संवर्धन का संदेश दिया।
प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट प्रस्तुतीकरण दिया। निर्णायकों के निर्णयानुसार आशा सिंघवी ने प्रथम स्थान, हेमलता संगावत ने द्वितीय स्थान तथा विशाखा जैन ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी महिलाओं एवं नागरिकों ने सामूहिक संकल्प लेते हुए समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कारों एवं सदाचार को बढ़ावा देने, नशामुक्त एवं कुरीतिमुक्त समाज निर्माण हेतु जनजागरण करने, जल एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने, जीवदया एवं सेवा कार्यों को प्रोत्साहित करने, सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने तथा भावी पीढ़ी को संस्कारवान एवं चरित्रवान बनाने हेतु सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। अंत में त्रिशला जागृति मंच की ओर से सभी प्रतिभागियों, अतिथियों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया गया।

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