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आयुर्वेद औषधालय, सिंधी बाजार में निःशुल्क पंचकर्म चिकित्सा शिविर में उमड़ी रोगियों की भीड़

अन्य जिलो से भी आये रोगियों ने भी लिया लाभ  आज की आधुनिक जीवन शैली के परिणाम स्वरुप बढ़ रहे है गुटने के रोगी : वैद्य औदिच्य  आयुर्वेद दिनचर्य...



अन्य जिलो से भी आये रोगियों ने भी लिया लाभ 

आज की आधुनिक जीवन शैली के परिणाम स्वरुप बढ़ रहे है गुटने के रोगी : वैद्य औदिच्य 

आयुर्वेद दिनचर्या एवं खान पान से मिलेगा तुरंत लाभ

उदयपुर, 20 जुलाई। आयुर्वेद विभाग, राजस्थान के तत्वावधान में आरोग्य समिति, राजकीय आदर्श आयुर्वेद औषधालय, सिंधी बाजार, उदयपुर द्वारा आयोजित 48वें निःशुल्क विशाल पंचकर्म चिकित्सा शिविर का सोमवार को शुभारंभ हुआ। शिविर के पहले ही दिन बड़ी संख्या में रोगियों ने पंचकर्म चिकित्सा एवं आयुर्वेदिक परामर्श का लाभ लिया। रोगियों में शिविर को लेकर विशेष उत्साह एवं विश्वास देखने को मिला।

शिविर का शुभारंभ अतिरिक्त निदेशक, आयुर्वेद विभाग, उदयपुर संभाग डॉ. रमेश चंद बैरवा सहायक निदेशक डॉ. राकेश सोलंकी एवं सहायक निदेशक डॉ. भानु कुमार जैन भी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर अतिरिक्त निदेशक डॉ. रमेश चंद बैरवा ने कहा कि पंचकर्म आयुर्वेद की अत्यंत प्रभावी एवं वैज्ञानिक उपचार पद्धति है, जो केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर की शुद्धि, रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने आमजन से अधिक से अधिक संख्या में इस निःशुल्क शिविर का लाभ उठाने की अपील की।

वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. शोभालाल औदीच्य के निर्देशन में आयोजित पांच दिवसीय शिविर का उद्देश्य आमजन को आयुर्वेद की प्राचीन एवं वैज्ञानिक पंचकर्म चिकित्सा का लाभ उपलब्ध कराना तथा विभिन्न पुराने एवं जटिल रोगों से राहत प्रदान करना है। शिविर में विशेषज्ञ आयुर्वेद चिकित्सकों द्वारा प्रत्येक रोगी का परीक्षण कर उसकी प्रकृति एवं रोग की अवस्था के अनुसार उपचार किया जा रहा है।

शिविर में कमर दर्द, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, घुटनों का दर्द, गठिया, सायटिका, एवीएन, जोड़ों का दर्द, मांसपेशियों की जकड़न, माइग्रेन, अनिद्रा, मोटापा, कब्ज तथा अन्य वातजन्य एवं जीवनशैली संबंधी रोगों से पीड़ित मरीजों का उपचार किया जा रहा है। आवश्यकता के अनुसार अभ्यंग, स्वेदन, कटिबस्ति, ग्रीवाबस्ति, जानुबस्ति, शिरोधारा, बस्ति कर्म सहित विभिन्न पंचकर्म प्रक्रियाएं की जा रही हैं। साथ ही रोगियों को आहार-विहार, योग, दिनचर्या एवं ऋतुचर्या संबंधी आवश्यक परामर्श भी दिए जा रहे हैं, जिससे उपचार का लाभ लंबे समय तक बना रहे।

डॉ. शोभालाल औदीच्य ने बताया कि आज की आधुनिक जीवन शैली के परिणाम स्वरुप बढ़ रहे है गुटने के रोगी, आयुर्वेद दिनचर्या एवं खान पान अपनाना होगा ।  पंचकर्म आयुर्वेद की सर्वश्रेष्ठ शोधन चिकित्सा पद्धति है, जो शरीर में संचित दोषों का शोधन कर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा शरीर को स्वस्थ एवं ऊर्जावान बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने आमजन से अपील की कि जो व्यक्ति पुराने दर्द, वातजन्य रोगों अथवा जीवनशैली संबंधी बीमारियों से परेशान हैं, वे 24 जुलाई तक आयोजित इस निःशुल्क शिविर का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

उन्होंने बताया कि शिविर के अंतिम दिन 24 जुलाई को अग्निकर्म विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र सिंह हाड़ा अपनी विशेष सेवाएं प्रदान करेंगे। इस दौरान घुटनों का दर्द, सर्वाइकल, कमर दर्द, सायटिका, टेनिस एल्बो, एड़ी का दर्द सहित चयनित वातजन्य एवं दर्द संबंधी रोगों का अग्निकर्म चिकित्सा के माध्यम से परीक्षण एवं आवश्यकता अनुसार उपचार किया जाएगा।

शिविर के सफल संचालन में वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. शोभालाल औदीच्य के निर्देशन में डॉ. शैलेंद्र शर्मा, डॉ. अंकिता सियाल, डॉ. संजय सोनी, डॉ. नितिन सेजू एवं डॉ. ऋतम्बरा सहित चिकित्सकों ने रोगियों का परीक्षण कर आवश्यक उपचार एवं परामर्श प्रदान किया।

शिविर की व्यवस्थाओं एवं संचालन में वरिष्ठ कम्पाउंडर शंकरलाल खराड़ी के साथ इंदिरा डामोर, कंचन कुमार डामोर, कन्हैयालाल नागदा, वंदना शक्तावत, चंद्रेश परमार, अंजना बारोट, हेमंत पालीवाल, संगीता रेगर, त्रिलोचना अहारी, गजेन्द्र कुमार आमेटा, निर्भय सिंह भाटी एवं देवीलाल मेघवाल ने पंजीयन, रोगी मार्गदर्शन, पंचकर्म व्यवस्थाओं तथा चिकित्सा सेवाओं में सक्रिय सहयोग प्रदान करते हुए शिविर को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


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