रूट कैनाल ट्रीटमेंट में लेजर व अल्ट्रासोनिक तकनीक के असर पर किया पत्र वाचन उदयपुर,4 सितम्बर। पेसिफिक डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर,भीलों का ब...
रूट कैनाल ट्रीटमेंट में लेजर व अल्ट्रासोनिक तकनीक के असर पर किया पत्र वाचन
उदयपुर,4 सितम्बर। पेसिफिक डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर,भीलों का बेदला के कंजरवेटिव डेंटिस्ट्री एवं एंडोडॉन्टिक्स विभाग के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ.जितेंद्र लोहार ने ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित प्रतिष्ठित इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित विश्वस्तरीय सम्मेलन वर्ल्ड एंडोडॉन्टिक कांग्रेस 2026 में रूट कैनाल ट्रीटमेंट में लेजर व अल्ट्रासोनिक तकनीक के असर पर पत्र वाचन किया।
सिडनी में 27 से 30 अगस्त 2026 तक आयोजित इस चार दिवसीय वर्ल्ड एंडोडॉन्टिक कांग्रेस 2026 में विश्वभर से एंडोडॉन्टिक्स, दंत चिकित्सा अनुसंधान, अकादमिक जगत और आधुनिक क्लिनिकल प्रैक्टिस से जुड़े जाने-माने विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और शोधकर्ता ने भाग लिया।
डॉ.जितेंद्र लोहार ने अपने शोघ के माध्यम सें बताया कि जब रूट कैनाल को साफ करने वाले सोडियम हाइपोक्लोराइट घोल को अल्ट्रासोनिक तरंगों और आधुनिक डायोड लेजर से एक्टिवेट किया जाता है, तो यह बैक्टीरिया को जड़ से खत्म करने में कई गुना अधिक असरदार साबित होता है। इस शोध से भविष्य में रूट कैनाल के मरीजों को अधिक सुरक्षित, सटीक और दोबारा संक्रमण-मुक्त उपचार मिलने का रास्ता साफ होगा।
डॉ.लोहार ने कहा कि वर्ल्ड एंडोडॉन्टिक कांग्रेस जैसे प्रतिष्ठित मंच पर शोध को साझा करना और विश्व के शीर्ष दंत विशेषज्ञों से वैज्ञानिक संवाद करना अत्यंत प्रेरणादायक अनुभव रहा। उन्होंने बताया कि इस तरह के आयोजनों से वैश्विक स्तर पर विकसित हो रही अत्याधुनिक तकनीकों को क्लिनिकल प्रैक्टिस में लाकर मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज देने में मदद मिलती है।
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सिडनी में 27 से 30 अगस्त 2026 तक आयोजित इस चार दिवसीय वर्ल्ड एंडोडॉन्टिक कांग्रेस 2026 में विश्वभर से एंडोडॉन्टिक्स, दंत चिकित्सा अनुसंधान, अकादमिक जगत और आधुनिक क्लिनिकल प्रैक्टिस से जुड़े जाने-माने विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और शोधकर्ता ने भाग लिया।
डॉ.जितेंद्र लोहार ने अपने शोघ के माध्यम सें बताया कि जब रूट कैनाल को साफ करने वाले सोडियम हाइपोक्लोराइट घोल को अल्ट्रासोनिक तरंगों और आधुनिक डायोड लेजर से एक्टिवेट किया जाता है, तो यह बैक्टीरिया को जड़ से खत्म करने में कई गुना अधिक असरदार साबित होता है। इस शोध से भविष्य में रूट कैनाल के मरीजों को अधिक सुरक्षित, सटीक और दोबारा संक्रमण-मुक्त उपचार मिलने का रास्ता साफ होगा।
डॉ.लोहार ने कहा कि वर्ल्ड एंडोडॉन्टिक कांग्रेस जैसे प्रतिष्ठित मंच पर शोध को साझा करना और विश्व के शीर्ष दंत विशेषज्ञों से वैज्ञानिक संवाद करना अत्यंत प्रेरणादायक अनुभव रहा। उन्होंने बताया कि इस तरह के आयोजनों से वैश्विक स्तर पर विकसित हो रही अत्याधुनिक तकनीकों को क्लिनिकल प्रैक्टिस में लाकर मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज देने में मदद मिलती है।

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