उदयपुर । राधा अष्टमी के पावन अवसर पर अर्बुदा कला मंदिर संगीत प्रशिक्षण संस्थान, उदयपुर की ओर से शनिवार को आयोजित विशेष भजन संध्या में नेत्र ...
उदयपुर । राधा अष्टमी के पावन अवसर पर अर्बुदा कला मंदिर संगीत प्रशिक्षण संस्थान, उदयपुर की ओर से शनिवार को आयोजित विशेष भजन संध्या में नेत्र दिव्यांग प्रतिभाशाली बालक ग्रंथ त्रिवेदी की सुमधुर भजन प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भक्ति, संगीत और भावनाओं से सजी इस भव्य रंगारंग संध्या में ग्रंथ त्रिवेदी ने अपनी मधुर आवाज में एक के बाद एक शानदार भजनों की प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान ग्रंथ त्रिवेदी ने “राधिका गोरी से, राधे राधे”, “बरसाने वाली राधे”, “सांवली सूरत पे सांवरे की”, “बंसी पुकारे राधा नाम”, “श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी”, “भगत के वश में है भगवान”, “मीठे रस से भरी राधे रानी राजी” तथा “मीठे-मीठे सांवरे की बोली” जैसे लोकप्रिय भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुतियां दीं। उनकी प्रस्तुतियों में भक्ति और संगीत का ऐसा सुंदर समन्वय देखने को मिला कि पूरा सभागार राधा-कृष्ण भक्ति के रंग में रंग गया।
प्रतिभा और साधना का अनूठा संगम
नेत्र दिव्यांग होने के बावजूद ग्रंथ त्रिवेदी ने अपनी गायन प्रतिभा, लगन और साधना के दम पर संगीत के क्षेत्र में विशेष पहचान बनाई है। भजन गायन के प्रति उनकी गहरी रुचि और समर्पण उनकी प्रस्तुतियों में स्पष्ट दिखाई दिया। ग्रंथ त्रिवेदी अपनी प्रतिभा के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं।
उनकी गायकी ने यह संदेश भी दिया कि प्रतिभा किसी शारीरिक चुनौती की मोहताज नहीं होती। आत्मविश्वास, लगन और निरंतर साधना के बल पर प्रतिभा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
भक्ति और संगीत से सराबोर हुई शाम
राधा अष्टमी के अवसर पर आयोजित इस विशेष भजन संध्या में राधा-कृष्ण के भजनों के साथ पूरा वातावरण श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत रहा। ग्रंथ त्रिवेदी की प्रस्तुतियों पर उपस्थित श्रोताओं ने तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया और भक्तिरस में डूबकर कार्यक्रम का आनंद लिया।
अर्बुदा कला मंदिर संगीत प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक विवेक अग्रवाल ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य प्रतिभावान कलाकारों को मंच प्रदान करना तथा उनकी कला को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है। ग्रंथ त्रिवेदी जैसे प्रतिभाशाली बालक को मंच प्रदान करना संस्थान के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि राधा अष्टमी पर आयोजित यह भजन संध्या श्रद्धा, साधना, संगीत और प्रतिभा का भव्य संगम बनकर सामने आई।
कार्यक्रम का समापन भक्तिमय वातावरण में हुआ। उपस्थित संगीत प्रेमियों और श्रोताओं ने ग्रंथ त्रिवेदी की प्रतिभा की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की।

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