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कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर ने पूर्व कुलपति पर खुलकर लगाए आरोप, कहा-उन्हीं के कारण संस्थान आर्थिक संकट में

विद्यापीठ: विद्यापीठ को बदनाम करने का प्रयास उदयपुर 19 सितम्बर। जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ के कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर ने शनिवार को...




विद्यापीठ: विद्यापीठ को बदनाम करने का प्रयास

उदयपुर 19 सितम्बर। जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ के कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर ने शनिवार को प्रेसवार्ता में कहा कि कुछ निजी स्वार्थाे के एवं विद्यापीठ की छवि को धूमिल करने के प्रयास में बाहरी एवं पूर्व अधिकारियों द्वारा विद्यापीठ को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि यहां का कार्यकर्ता अपने वेतन के लिए तरस रहा है। पूर्व कुलपति को संस्था हित में हटाया गया था जिस पर मुझे न हटाने के लिए धमकिया तक दिलवायी गयी थी। मैंने कार्यकर्ता की अवाज को सूना और कठोर निर्णय लेना पडा। गुर्जर ने कहा कि मैं 2012 से मातृ संस्था में मैनेजमेंट कमेटी में हूं। पहले विश्वाविद्यालय मातृ संस्था को सहायता करता था मेरे आने के बाद संस्था द्वारा 4.5 करोड की नयी प्रोपर्टी खरीदी है और 9.5 करोड विश्वविद्यालय को दिये है, फिर भी मुझे बदनाम किया जा रहा है।

गुर्जर ने आरोप लगाया कि कई राजनेताओं जिसमें कांग्रेस और भाजपा से जुडे नेता हैं, उन्होंने उन पर सारंगदेवोत को नियमित करने के लिए दबाव डाला। कुछ अधिकारियों और अन्य लोगों से भी दबाव डलवाया गया। 

गुर्जर ने कहा कि मैं पिछले कुछ माह से विवि का कुलाधिपति हूं और मेरी जानकारी में लाया गया कि पूर्व कुलपति ने अपने व्यक्तिगत स्वार्थाे के लिए अनेक अवैध नियुक्तियां कर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई अपने चहेतो को बिना किसी नियम के बहुत अधिक राशि अलाउंस के तौर पर एवं एडवांस के तौर पर दी गयी व कई ऐसे व्यक्ति भी है जिन्हे घर बैठे सेलेरी मिल रही है। पूर्व कुलपति ने अपनी छवि को उभारने के लिए संस्था के पैसों का दुरूपयोग किया। पूर्व कुलपति ने अपने वित्तिय स्वार्थाे के लिये पिछले कई वर्षाे में कई कोर्सेस में अनुमति से अधिक सीटों पर प्रवेश की अनुमति दी थी। इन सभी अनियमितताओं के लिये जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है और पूर्व कुलपति के कार्यकाल की सम्पूर्ण जांच की जा रही है और जो भी अनियमितता सामने आयेगी उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जायेगी। इस कारण पूर्व कुलपति बौखलाये हुए है जिससे मीडिया में अपने संबंधों का दुरूपयोग कर भ्रामक तथ्य देकर प्रकाशित करवा रहे है।

गुर्जर ने कहा कि संगठन सचिव के पद प्रवीण गुर्जर का चयन डीपीसी के द्वारा किया गया है और जहां तक इनकी डिग्री का मामला है तो वह देखने का कार्य तत्कालीन वाइस चांसलर का था।  उन्होंने कहा कि पिछले दिनों विश्वविद्यालय द्वारा की गई अनियमितताओं को लेकर आए कॉलेज शिक्षा के निरीक्षण दल ने विश्वविद्यालय की तो जांच की साथ ही मातृ संस्था की भी जांच की जो नियमों के विरूद्ध है। जांच के दौरान संस्था द्वारा प्रस्तुत किए गए कई महत्वपूर्ण तथ्योें की अनदेखी कर जांच रिपोर्ट में उसे स्थान नहीं दिया गया।

कुलपति प्रो. मंजु मांडोत ने बताया कि विद्यापीठ की वित्तीय स्थित बहुत चिंताजनक है और कार्यकर्ताओं को अगस्त माह की सेलेरी भी मुश्किल से दी गई है। पिछले दिनों पूर्व कुलपति ने एक मिटिंग के दौरान बताया कि विश्वविद्यालय में 36 करोड है जब इसकी जांच की तो पाया कि 19 करोड रूपये पर तो ऋण ले रखा है और 17 करोड है वो तो कोरपस फंड है, जबकि यूजीसी नियमानुसार विश्वविद्यालय का 25 करोड का फंड होना चाहिए वह भी अभी पूरा नहीं है।


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