पोक्सो क़ानून से त्वरित और सख्त कार्यवाही हो: दवे बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों, मानव तस्करी विरोधी इकाइयों के अधिकारियों के लिए रेंज स्तरीय ब...
पोक्सो क़ानून से त्वरित और सख्त कार्यवाही हो: दवे
बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों, मानव तस्करी विरोधी इकाइयों के अधिकारियों के लिए रेंज स्तरीय बाल संरक्षण पर क्षमतावर्धन कार्यक्रम का आयोजन
उदयपुर। लैंगिक अपराधों से बच्चों की सुरक्षा में बाल कल्याण पुलिस अधिकारी की महत्वपूर्ण भूमिका है स पोस्को अधिनियम, 2012 आने के बाद जहां 18 वर्ष तक के बालक-बालिका को न्याय मिलने में फ़ास्ट कार्यवाही होने लगी है वही सख़्त प्रावधानो से अपराधियों को कड़ी सजा भी मिलने लगी है।
उक्त विचार सरदार पटेल पुलिस, सुरक्षा एवं दांडिक न्याय विश्वविद्यालय, जोधपुर, राजस्थान के सेंटर फार चाइल्ड प्रोटेक्शन द्वारा शहर के सुखाड़िया सर्कल स्थित निजी हॉटल में आयोजित पुलिस विभाग के उदयपुर रेंज के अधिकारियों के 2 दिवसीय प्रशिक्षण के प्रथम दिवस प्रमुख वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए महेन्द्र कुमार दवे, न्यायाधीश, वाणिज्यिक न्यायालय, उदयपुर ने व्यक्त किए।
इस अवसर पर बाल अधिकार विशेषज्ञ एवं पूर्व सदस्य राजस्थान बाल आयोग, राजस्थान सरकार डॉ. शैलेंद्र पण्ड्या ने बच्चों के लिए संवैधानिक प्रावधान, यूएनसीआरसी और बाल संरक्षण की विभिन्न संरचनाएं और तंत्र की जानकारी देते हुए बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों के कार्यों पर प्रकाश डाला।
प्रशिक्षण में सेंटर फॉर चाइल्ड प्रोटेक्शन के नॉडल अधिकारी हिमांशु शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रशिक्षण 22-23 अक्टूबर, 2024 को सुबह 10 बजे से शाम साढे पांच बजे तक दिया जाएगा। कार्यक्रम के पहले दिन, कुल 44 बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों, मानव तस्करी विरोधी इकाइयों के अधिकारियों ने सक्रिय रुप से भाग लिया जिसमे 37 बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (सीडब्ल्यूपीओ) और 7 मानव तस्करी रोधी इकाई (एएचटीयू) अधिकारी उपस्तिथ थे। जिसमें से भीलवाड़ा से 10, चित्तौड़गढ़ से 9, राजसमंद से 10, सलूम्बर से 9 और उदयपुर से 6 प्रतिभागी थे । बाल संरक्षण केंद्र, सरदार पटेल पुलिस, सुरक्षा और आपराधिक न्याय विश्वविद्यालय, पिछले 9 सालों से लगातार इस तरह के प्रशिक्षण कार्यकर्मों का आयोजन करता आ रहा है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले दिन के वक्ता के रूप में महेंद्र कुमार दवे एवं डॉ. पण्ड्या सहित उपाधीक्षक पुलिस विभाग चेतना भाटी द्वारा किशोर न्याय अधिनियम पर, बाल विकास और बाल मनोविज्ञान विषय पर डॉ. सुनील चौधरी, प्रोफेसर, उदयपुर स्कूल ऑफ सोशल वर्क, जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड यूनिवर्सिटी), उदयपुर, राजस्थान ने अपने विचार व्यक्त किये।
कार्यक्रम के दौरान प्रवीण सिंह, बिमल सिंह, फैकल्टी, सेंटर फॉर चाइल्ड प्रोटेक्शन, सरदार पटेल पुलिस विश्वविद्यालय, राधेशयाम कुमावत, नरेंद्र सिंह ने अलग-अलग सत्रों को संचालित कर अपना व्यवहारिक अनुभव साझा किया। प्रतिभागियों ने व्यवहारिक चुनौतियों को विशेषज्ञों के समक्ष रखा और विषय विशेषज्ञों ने उनके समाधान हेतु अपने अनुभवों को साझा किया।
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