दो दिवसीय एकात्म मानवदर्शंन का हीरक जयन्ती समारोह का हुआ समापन 300 से अधिक प्रतिभागियों ने एकात्म मानवदर्शन पर किया मंथन लोकमत परिष्कार और स...
दो दिवसीय एकात्म मानवदर्शंन का हीरक जयन्ती समारोह का हुआ समापन300 से अधिक प्रतिभागियों ने एकात्म मानवदर्शन पर किया मंथन
लोकमत परिष्कार और सेवा कार्यों से समाज निर्माण संभव - गुणवंत कोठारी
संवेदना है मानव विकास की पहली सीढ़ी-गुणवंत कोठारी
उदयपुर, 5 जून, 2024। भारतीय जनसंघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा प्रदत्त एकात्म मानवदर्शंन के साठ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति समारोह समिति जयपुर, भूपाल नोबल्स संस्थान व राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय दीनदयाल उपाध्याय एकात्म मानवदर्शंन - हीरक जयंती समारोह का समापन गुरूवार को भूपाल नोबल्स विवि के प्रताप सभागार में हुआ। समारोह का शुभारंभ वरिष्ठ प्रचारक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ्र मुकुल कानिटकर, महेश शर्मा, कुलपति प्रो.एस एस सारंगदेवोत, प्रो. एम.एल. छीपा, बीएन संस्थान के प्रबंध निदेशक मोहब्बत सिंह राठौड़, मंत्री डॉ. महेन्द्र सिंह आगरिया, रजिस्ट्रार डॉ. एन.एन. सिंह , डॉ. महेश शर्मा, आयोजन सचिव डॉ. युवराज सिंह राठौड, कुलपति प्रो.कन्हैयालाल बेरवाल ने सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्जवलित कर एवं दीन दयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्पांजली अर्पित कर किया।
शिक्षा एवं भाषा के क्षेत्र में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार पर उद्बोधन देते हुए प्रसिद्ध शिक्षाविद् और विचारक मुकुल कानितकर ने कहा है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के समग्र विकास की चेतना समाहित होनी चाहिए। कानितकर ने स्पष्ट किया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के व्यष्टि और समष्टि के सिद्धांत को शिक्षा में समाहित किए बिना संपूर्ण राष्ट्र निर्माण संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में वह विचारधारा होनी चाहिए जो मन, बुद्धि, आत्मा के साथ-साथ सामाजिक, राष्ट्रीय और पर्यावरणीय चेतना को जाग्रत करे।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा नीतियों से अधिक आवश्यकता है विचारों को आचरण में उतारने की। शिक्षा को तब ही धर्म का आधार कहा जा सकता है जब वह कर्तव्यबोध कराए, न कि केवल अधिकारों की बात करे। कानितकर ने भाषा के महत्व पर भी बल देते हुए कहा, “भाषा पूरे राष्ट्र की भावना की अभिव्यक्ति है। भारत में भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति और आत्मीयता का संवाहक है।”
प्रचारक गुणवंत कोठारी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विविध विचारोें की प्रासंगिकता एवं करणीय कार्यों पर विचार रखते हुए कहा कि संवेदना मनुष्य के विकास की पहली सीढ़ी बताया, सेवा कार्यों से जुड़ने और लोकमत परिष्कार के लिए कार्य, अनुसंधान कार्यों को गति प्रदान करने का आह्वान किया। नवीन अनुसंधान और वैज्ञानिक तत्थों के माध्यम से पारंपरिक भारतीय ज्ञान और तत्थों को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयास करने होंगे जिससे युवाओं को राष्ट्रीयता की भावना से जोड़ा जा सके। मानव जीवन से जुड़े ऋणों से मुक्ति के लिए सेवा कार्यों से जुड़ने का आव्हान भी कोठारी ने प्रतिभागियों से किया ।
विद्यापीठ के कुलपति प्रो. एस. एस. सारंगदेवोत ने अपने संबोधन में पं उपाध्याय के दर्शन की शिक्षा में आवश्यकता और प्रांसगिकता को स्पष्ट किया। उन्होने नई शिक्षा नीति के समाहित एकात्मक मानव दर्शन और राष्ट्रीयता के संयोजन से विकसित और विश्व गुरू भारत की संकल्पना के साकार स्वरूप प्रदान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पं उपाध्याय के दर्शन युक्त शिक्षा से न केवल प्रज्ञावान विद्यार्थी तैयार होंगे वरन राष्ट्रीयता और राष्ट्र गौरव के भावों से परिपूर्ण पीढ़ी का प्रार्दूभाव होगा।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विविध विचारों की प्रासंगिकता एवं करणीय कार्य विषयक सत्र में अनिल ओक ने एकात्मक मानव दर्शन द्वारा जीवन की समस्याओं और उनके निराकरण, सुखी जीवन और विकसित राष्ट्र के निर्माण में इसकी प्रासंगिता को रेखांकित किया। अर्थ चिंतक पंडित दीनदयाल उपाध्याय - प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा, डॉ. बजरंग लाल गुप्ता ने विचार रखे। जिसमें स्वदेशी मॉडल के साथ साथ स्थानीय आवश्यकताओं, संसाधनों और संस्कृति के अनुसार निर्मित किया जाने , आयात-आधारित उपभोक्तावाद का विरोध किया और स्थानीय उत्पादन व लघु उद्योगों को बढ़ावा देने पर बल संबंधी विचार साझा किए गए।
डॉ बालूराम छिपा ने कृषि के क्षेत्र में पं उपाध्याय के दर्शन और भारतीय कृषि में नवाचार की संभावनाओं पर विचार रखे जबकि डॉ.लोकेश शेखावत मानव और व्यक्ति के मध्य के अंतर को स्पष्ट करते हुए समाज-मानव जीवन के अंतरसंबंधो और उसकी पूर्णता को बताया। डॉ.छिपा , डॉ.शेखावत, राजेन्द्र चड्ढा की उपस्थिति में प्रतिभागियों तथा शोधार्थियों ने अपने शोध पत्रों की प्रस्तुति दी गई।
तकनीकी सत्रों में विषय आधारित प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन कर प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं को डॉ. महेश शर्मा ने शांत किया गया।
कार्यक्रम में पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता 2025 आयोजित की गई जिसमें विजयी प्रतिभागियों का अतिथियों द्वारा उपरणा एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में 378 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
इस अवसर पर डॉ. रेणु राठौड़, अनुराग सक्सेना, पूर्व कुलपति प्रो. लोकेश शेखावत, पूर्व कुलपति डॉ. बालूराम छिपा, अक्षांश भारद्वाज, राजेन्द्र सिंह, शक्ति सिंह कारोही, प्रो. प्रेम सिंह रावलोत, डॉ. अनिल कोठारी, नीरज कुमावत, डॉ. विजय प्रकाश विपलवी सहित शहर गणमान्य नागरिक व अनेक शिक्षाविद, विद्वान उपस्थित रहे।
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