-भारत का जीपीएस सिस्टम नाविक जल्द ही काम करेगा, मोबाइल की जगह डिवाइस लेगी -अरावली इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज, उमरडा में दो दिवसीय अंतरीक...
-भारत का जीपीएस सिस्टम नाविक जल्द ही काम करेगा, मोबाइल की जगह डिवाइस लेगी
-अरावली इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज, उमरडा में दो दिवसीय अंतरीक्ष विज्ञान प्रदर्शनी
उदयपुर। 2035 तक भारत का अपना भारतीय अंतरीक्ष स्टेशन होगा जिसके लिए प्रयास शुरु हो चुके हैं। अगले कुछ सालों में भारत का स्वदेसी नेविगेशन सिस्टम नाविक भी होगा जो भारत का खुद का जीपीएस सिस्टम होगा। इसी तरह अगले करीब पांच साल की योजना के अनुसार भारत में भी मोबाइल फोन की जगह एक डिवाइस ले लेगी, जिसमें कभी भी नेटवर्क की समस्या नहीं रहेगी, बल्कि पूरे विश्व में कहीं से भी सेटेलाइट आधारित इस डिवाइस की मदद से बात कर सकेंगे। भारत अंतरीक्ष विज्ञान की दुनिया में तेजी से काम कर रहा है और भारत ने 2062 तक की रणनीति तैयार कर ली है।
स्पेस एप्लीकेशंस सेन्टर, इसरो अहमदाबाद के डायरेक्टर डॉ निलेश एम देसाई ने शुक्रवार को अरावली इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज, उमरडा में पत्रकारों से बात करते हुए यह जानकारी दी। संस्थान में आयोजित दो दिवसीय अंतरिक्ष विज्ञान प्रदर्शनी के शुभारंभ मौके पर श्री देसाई उदयपुर आए। अरावली इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज, उदयपुर के प्रांगण में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की शानदार उपलब्धियों को प्रदर्शित करने हेतु एक भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया गया जिसमें शहर के विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थी भारत के अंतरीक्षा विज्ञान की उपलब्धियों के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। प्रदर्शनी में रॉकेट लॉन्च वाहनों के मॉडल (जैसे पीएसएलवी व जीएसएलवी, प्रसिद्ध उपग्रहों और अंतरिक्ष यानों की प्रतिकृतियां (जैसे चंद्रयान, मंगलयान), अंतरिक्ष में भारत की यात्रा और भविष्य की योजनाओं की जानकारी तथा छात्रों और युवाओं के लिए प्रेरणादायक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
डॉ देसाई ने कहा कि अंतराष्टीय अंतरीक्ष स्टेशन की स्थापना में भारत का सहयोग नहीं था जिसमें पांच छह अन्य देश शामिल थे। लेकिन अब भारत खुद का भारतीय अंतरीक्ष स्टेशन स्थापित करने की ओर से कदम बढा चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा अनुसार तथा इसरो द्वारा तय किए गए प्रोग्राम के मुताबिक 2035 तक इसका लक्ष्य रखा गया है। 2028 से 2035 तक इसके पांच माड्यूल होंगे जिसके प्रथम चरण के माड्यूल की करीब 22 हजार करोड रुपए की स्वीकृति मिल चुकी है। प्रथम चरण में मुख्य मिशन गगनयान की लॉन्चिंग के साथ अंतरीक्ष स्टेशन की स्थापना का लक्ष्य है जिसके लिए यह बजट निर्धारित किया गया है। गगनयान के तीन मिशन मानवरहित होंगे जिसमें विभिन्न प्रकार के परीक्षण होंगे और उसकी सफलता के पश्चात दो मिशन मानव सहित होंगे।
डॉ देसाई ने बताया कि चंद्रयान-4 सन् 2028-29 तक लॉन्च किया जा सकता है जिसके लिए तैयारी चल रही है। भारत 2025 से 2040 तक 103 सेटेलाइट लॉन्च करेगा जिनमें 40 से 45 ऐसे हैं जिन पर वर्तमान में काम चल रहा है तथा बाकि समय की जरुरत के अनुसार नए होंगे। यह सारे सेटेलाइट इसरो ही लॉन्च करेगा ऐसा नहीं है, बल्कि इनमें प्राइवेट सेक्टर की भी मदद ली जाएगी।
डॉ देसाई ने बताया कि वर्तमान में जो मोबाइल चल रहे हैं वे डायरेक्ट टू डिवाइस आधारित है। अगले कुछ सालों में इसकी जगह ऐसी डिवाइस ले लेगी जो छोटी होगी, वजन में कम होगी, बार-बार चार्जिंग की जरुरत नहीं रहेगी और जिससे दुनिया के किसी भी कोने से बात हो सकेगी। इसके लिए एक सेटेलाइट लॉन्च करने जा रहे हैं और अगले पांच सालों में यह संभव पाएगा ऐसा प्रयास किया जा रहा है। अमेरिका इस दिशा में आगे बढ चुका है और संभव है कि कुछ समय में अमेरिका में ऐसी डिवाइस ऑपरेशनल हो जाएगी।
डॉ देसाई ने स्वदेसी नेविगेशन सिस्टम नाविक के बारे में भी चर्चा की तथा बताया कि इस पर कई सालों से काम चल रहा है, लेकिन कुछ तकनीकी दिक्कतों से इसमें अभी भी इसरो के इंजीनियर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगले एक-डेढ साल में नाविक काम करने लगेगा जिसके बाद देश के नागरिकों के साथ देश की सेना को भी इसका सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एक जवान के लापता होने पर तलाशना मुश्किल हो जाता है, लेकिन नाविक के काम करने के बाद यह असंभव नहीं रहेगा। जवान की कलई में घडी की तरह डिवाइस लगेगी जो उसकी हर एक लोकेशन के बारे में जानकारी देगी। भारत का यह अपना सिस्टम होने से किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं रहना पडेगा।

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