Page Nav

HIDE

Classic Header

{fbt_classic_header}

breaking news

latest

नारायण सेवा संस्थान में खुशियों की बारात, सपनों को पंख, रिश्तों को नया आकाश -44वां सामूहिक विवाह लियों का गुड़ा में आरंभ

उदयपुर, 30 अगस्त। जीवन में जहाँ कठिनाइयां कदम रोक देती हैं, वहीं सेवा और सहयोग से नए सपने जन्म लेते हैं। नारायण सेवा संस्थान ने एक बार फिर य...



उदयपुर, 30 अगस्त। जीवन में जहाँ कठिनाइयां कदम रोक देती हैं, वहीं सेवा और सहयोग से नए सपने जन्म लेते हैं। नारायण सेवा संस्थान ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि ष्प्रेम और समर्पण से कोई सपना अधूरा नहीं रहता।

शनिवार को लियों का गुड़ा स्थित सेवा महातीर्थ में संस्थान का 44वां निशुल्क दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह गणपति पूजन और मंगल वंदना के साथ शुरू हुआ। दो दिन चलने वाले इस आयोजन में 51 जोड़े (25 दिव्यांग और 26 सकलांग) परिणय सूत्र में बंधेंगे।

आस्था और आनंद का संगम

सुबह 10.15 बजे पद्मश्री कैलाश ‘मानव’, कमला देवी, अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल, निदेशक वंदना अग्रवाल, पलक अग्रवाल, जगदीश आर्य और देवेंद्र चौबीसा ने गणेश पूजन कर विवाह महोत्सव का शुभारंभ किया। मंच पर गणेश वंदना, शिव-पार्वती विवाह और राधा-कृष्ण नृत्य-नाटिकाओं ने ऐसा माहौल रचा कि हर चेहरा भक्ति और उल्लास से खिल उठा।


दुल्हनों की मुस्कान में बसी भावनाएं

इसके बाद दुल्हनों की हल्दी और मेहंदी की रस्में हुईं। ढोलक की थाप पर गूंजते गीत हल्दी लगाओ रे तेल चढ़ाओ रे बन्नी का बदन चमकाओ रे और आओ री सखियों मेहंदी लगा दो मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो पर उत्साह से झूमते अतिथि इस समारोह को घर जैसा स्नेह दे रहे थे।

जब दुल्हनों के हाथों में मेहंदी रची, तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा-“यह दिन हमारे लिए सपने जैसा है, जिसे हम कभी सोच भी नहीं सकते थे।”

समारोह के विशिष्ट अतिथि महेश अग्रवाल व सतीश अग्रवाल -मुम्बई, वेंकटेश्वर -कोयंबटूर, प्रवीण गौतम- दिल्ली तथा एस पी कालरा-दिल्ली थे। कार्यक्रम में कन्यादानी, भामाशाहों का सम्मान किया गया।

सेवा से संवरते सपने

संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने कहा -“जिन्होंने निःशक्तता और निर्धनता को अपनी नियति मान लिया था, कल वे जीवन साथी संग सात फेरे लेने जा रहे हैं। यह भामाशाहों और समाज के सहयोग का परिणाम है, और हमारे लिए गर्व का क्षण।”

अब तक संस्थान के माध्यम से हुए 43 सामूहिक विवाहों में 2459 जोड़ें अपना परिवार बसा चुके हैं। इनमें से कई जोड़े इस बार अपने बच्चों के साथ आकर नवविवाहितों को आशीर्वाद दे रहे हैं।

खुशियों से सजा महातीर्थ

महिला संगीत की रंगारंग प्रस्तुतियों ने शाम को और भी यादगार बना दिया। दूल्हा-दुल्हनों ने भी गीतों और ठुमकों के साथ अपने नए जीवन की शुरुआत का उत्साह जताया। परिजनों ने अपने-अपने अंचल के पारंपरिक विवाह गीत गाए और समवेत स्वर में आनंद बांटा।

इस समारोह में राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार से आए जोड़े भी शामिल हैं, जिससे यह आयोजन एक राष्ट्रीय उत्सव का रूप लेता है।

जहां सेवा है, वहीं सच्चा उत्सव है-

संस्थान संस्थापक कैलाश ‘मानव’ और कमला देवी ने सभी जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि “जीवन में सबसे बड़ा धन, प्रेम और साथ है। यही साथ हर मुश्किल को आसान बना देता है।”

वास्तव में, यह समारोह केवल विवाह का नहीं, बल्कि आशाओं, सपनों और नए जीवन की शुरुआत का उत्सव है दृ जहाँ हर मुस्कान गवाही देती है कि “सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं।”

No comments