उदयपुर। न्यू भूपालपुरा स्थित अरिहंत भवन में चल रहे चातुर्मास में आयोजित धर्मसभा में जैनाचार्य ज्ञानचंद्र महाराज ने कहा कि सबसे बड़ा स्वार्थ ह...
उदयपुर। न्यू भूपालपुरा स्थित अरिहंत भवन में चल रहे चातुर्मास में आयोजित धर्मसभा में जैनाचार्य ज्ञानचंद्र महाराज ने कहा कि सबसे बड़ा स्वार्थ होता है। स्वार्थ खत्म तो रिश्ता खत्म। आज कल ना कोई प्रेम है ना कोई दोस्ती, सब रिश्ते स्वार्थ से जुड़े हैं। पति-पत्नी का रिश्ता हो या माता-पिता का रिश्ता हो या भाई बहन का।
उन्होंने कहा कि एक बुजुर्ग ने किसी से पूछा परिवार बड़ा है या मित्र। बुजुर्ग ने जवाब दिया ना परिवार,ना मित्र। सभी रिश्तों में जब अपना स्वार्थ सामने आता है तो रिश्ते तारतार हो जाते हैं। बच्चे को जब तक मां की जरूरत है, तब तक मां मां करता है। जरूरत पूरी होने पर उसे वृद्ध आश्रम भेज दिया जाता है। आजकल दोस्त भी खरे मिलने मुश्किल हैं। धन के रिश्ते भी टूटते बिखरते नजर आते हैं। आपकी स्थिति अच्छी है तो भी दान करो, ताकि और अच्छी बनी रहे। स्थिति खराब है तो भी दान करो ताकि स्थिति अच्छी हो क्योंकि भगवान ने गृहस्थ जीवन चलाने के लिए सबसे पहले दान को महत्व दिया है।
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