उदयपुर। पैसिफिक मेडिकल यूनिवर्सिटी के संगठक तिरुपति कॉलेज ऑफ नर्सिंग में बुधवार को स्कोप एंड फ्यूचरस्टिक इन नर्सिंग विषय पर एक दिवसीय सेमिना...
उदयपुर। पैसिफिक मेडिकल यूनिवर्सिटी के संगठक तिरुपति कॉलेज ऑफ नर्सिंग में बुधवार को स्कोप एंड फ्यूचरस्टिक इन नर्सिंग विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम संयोजक प्रो (डॉ) संजय नागदा ने बताया कि सेमिनार की शुरुआत पारंपरिक सरस्वती माता के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई जिसमें मुख्य अतिथि कुलपति डॉ एम एम मंगल, विशेष अतिथि डॉ यू एस परिहार,फैकल्टी ऑफ नर्सिंग के डीन डॉ के सी यादव, गुजरात नर्सिंग कॉउंसिल की रजिस्ट्रार डॉ प्रगना डाबी, गीतांजलि स्कूल एंड कॉलज ऑफ नर्सिंग की डीन प्रो (डॉ) विजया अजमेरा एवम श्रीमती चेतना पालीवाल विभागाध्यक्ष ओबीजी तिरूपति नर्सिंग कॉलेज ने अपने उद्बोधन दिए।
स्वागत उद्बोधन में प्रो (डॉ) के सी यादव ने कहा कि नर्सिंग शिक्षा केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है बल्कि समाज की हर परत में बदलाव लाने की क्षमता रखती है उन्होंने बताया कि राजस्थान में वर्तमान में डेढ़ लाख से अधिक पंजीकृत नर्सें कार्यरत हैं और आने वाले वर्षों में यह संख्या दुगुनी हो सकती है अतः नर्सिंग शिक्षा एवम प्रैक्टिस को अव्वल बनाने की जरूरत है जिससे आने वाले समय मे गुणवत्तापूर्ण मरीजो की देखभाल की जा सके।
मुख्य अतिथि डॉ एम एम मंगल ने कहा कि नर्सिंग केवल एक पेशा नहीं बल्कि मानवता की सेवा का सबसे बड़ा साधन है और अगले दस वर्षों में भारत को लगभग 45 लाख नर्सिंग प्रोफेशनल्स की आवश्यकता होगी।
विशेष अतिथि डॉ यू एस परिहार ने कहा कि नर्सिंग अब अस्पतालों तक सीमित नहीं रही बल्कि कम्युनिटी हेल्थ रिसर्च और ग्लोबल हेल्थ पॉलिसी तक इसका विस्तार हो चुका है। प्रखर वक्ता डॉ प्रगना डाबी रजिस्ट्रार गुजरात नर्सिंग काउंसिल ने कहा कि गुजरात में पिछले पांच वर्षों में नर्सिंग कॉलेजों की संख्या सत्तर से बढ़कर एक सौ बीस हो चुकी है जो कि राज्य में होने वाली नर्सेज की कमी को आने वाले समय मे कम करेगी एवम उनकी कॉउंसिल गुजरात मे गुणवत्तापूर्ण नर्सिंग शिक्षा पर जोर दे रही है।
प्रो डॉ विजया अजमेरा,डीन गीताांजलि मेडिकल यूनिवर्सिटी ने बताया कि राजस्थान में हर साल लगभग आठ हजार विद्यार्थी नर्सिंग स्नातक बनते हैं जो भारत को भविष्य में नर्सिंग का वैश्विक केंद्र बना सकते हैं एवं कि नर्सिंग का भविष्य केवल डिग्री तक सीमित नहीं है बल्कि हेल्थ पॉलिसी निर्माण कम्युनिटी प्रोग्राम्स और रिसर्च से भी जुड़ा है उन्होंने विद्यार्थियों से सेवा भाव और तकनीकी दक्षता के संतुलन पर ध्यान देने का आह्वान किया कार्यक्रम का संचालन श्रीमती चेतना पालीवाल ने किया और इसमें लगभग तीन सौ विद्यार्थी तथा 20 से अधिक संकाय सदस्य शामिल हुए जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय अवसरों रिसर्च स्कॉलरशिप और सरकारी योजनाओं से जुड़े सवाल पूछे सत्र के अंत में सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए और कार्यक्रम का समापन प्रो डॉ संजय नागदा के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ जिन्होंने सभी अतिथियों शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नर्सिंग का असली भविष्य विद्यार्थियों के हाथों में है और यह तभी सफल होगा जब वे यहां से प्राप्त प्रेरणा को अपने जीवन और पेशे में उतारे।

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