- सत्य को बोलने से ज्यादा जानना जरूरी है - राष्ट्रसंत पुलक सागर - 700 से अधिक शिविरार्थी कर रहे है नित्य नियम धर्म आराधना उदयपुर 01 सितंबर ...
- सत्य को बोलने से ज्यादा जानना जरूरी है - राष्ट्रसंत पुलक सागर- 700 से अधिक शिविरार्थी कर रहे है नित्य नियम धर्म आराधना
उदयपुर 01 सितंबर । राष्ट्रसंत आचार्य पुलक सागर ससंघ का चातुर्मास सर्वऋतु विलास मंदिर में बड़ी धूमधाम से आयोजित हो रहा है । इसी श्रृंखला में रविवार को पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म दिवस मनाया गया । राष्ट्रसंत आचार्य पुलक सागर के सानिध्य में टाउन हॉल में पाप नाशनम शिविर के अंतर्गत 700 शिविरार्थियों ने एक जैसे वस्त्र पहन कर शिविर में भाग लिया, और संगीतमय पूजा एवं धर्म आराधना की । चातुर्मास समिति के अध्यक्ष विनोद फांदोत ने बताया कि पहली बार आचार्य पुलक सागर महाराज के सानिध्य में दिगम्बर समाज के सभी पंथों का पर्युषण पर्व मनाया जा रहा है, कार्यक्रम की श्रृंखला में प्रात: 5.30 बजे प्राणायाम, प्रातः: 7.30 बजे अभिषेक हुआ, उसके बाद शांतिधारा एवं पूजन सम्पन्न हुई । प्रात: 9.30 बजे आचार्यश्री का विशेष प्रवचन उत्तम शौच धर्म दिवस पर हुआ, जिसमें आचार्यश्री ने कहा कि सत्य का संबंध ज्ञान से है, विवेक से है। सत्य को बोलने से ज्यादा जानना जरूरी है। मुख से सत्य बोल भी दिया जाए तब भी मन तो षड्यंत्र में रमा ही रहता है इसलिए वचनों तक सीमित सत्य सही मायने में सत्य की परिभाषा में नहीं माना जा सकता। इतिहास बताता है कि सत्य को सदैव अपमानित किया गया है। संघर्ष झेले हैं सत्य ने। यह दुनिया सत्य की पक्षधर नहीं रही है। सत्य अकेला खड़ा होता है। झूठ के साथ पूरा गिरोह होता है। फिर भी अंतिम विजय सत्य की ही होती है । सच्चाई का सम्मान करना सीखिए। सच कड़वा होने की धारणा अनुचित है। यह एक प्रकार से सत्य पर मिथ्या लांछन भी है। सच तो स्वाभाविक रूप से मधुर होता है। उसका माधुर्य प्रकृति प्रदत्त है। कड़वाहट सत्य में नहीं अपितु सत्य बोलने के दम्भ के कारण बोलने वाले के मुँह में होती है। मन और सोच कड़वे होंगे तो सत्य कड़वा ही लगेगा। चातुर्मास समिति के महामंत्री प्रकाश सिंघवी एवं प्रचार संयोजक विप्लव कुमार जैन ने बताया कि प्रवचन के बाद 10.30 बजे सिंधी धर्मशाला में सभी साधकों का भोजन, दोपहर 12.30 बजे सामायिक मंत्र जाप, दोपहर 2 बजे धार्मिक प्रशिक्षण, शंका समाधान, तत्व चर्चा हुई । सायं 7.30 बजे गुरु भक्ति एवं श्रीजी की महाआरती हुई । उसके बाद प्रतिदिन रात्रि 8 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुतियां हुई । इस अवसर पर विनोद फान्दोत, शांतिलाल भोजन, आदिश खोडनिया, पारस सिंघवी, अशोक शाह, शांतिलाल मानोत, नीलकमल अजमेरा, सेठ शांतिलाल नागदा सहित सम्पूर्ण उदयपुर संभाग से हजारों श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे।


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