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जीवन शेयर बाजार की तरहःज्ञानचन्द्र महाराज

उदयपुर। न्यू भूपालपुरा स्थित अरिहंत भवन में  आयोजित धर्मसभा मे आचार्य ज्ञानचन्द्र महाराज ने कहा कि अच्छे बुरे कर्मों का उतार-चढ़ाव निरंतर बना...

उदयपुर। न्यू भूपालपुरा स्थित अरिहंत भवन में  आयोजित धर्मसभा मे आचार्य ज्ञानचन्द्र महाराज ने कहा कि अच्छे बुरे कर्मों का उतार-चढ़ाव निरंतर बना रहता है। जीवन शेयर बाजार की तरह है। खुशनसीब वह नहीं जिसके नसीब अच्छे हैं। खुशनसीब वो है जो अपने नसीब से खुश है।

भगवान महावीर ने कहा कि हर स्थिति को कर्मों का उदय भाव जानकर खुश रहें। कर्मों की 148 प्रकृति या है,एक प्रकृति के असंख्य असंख्य भेद बनते चले जाते हैं। जीव प्रति समय 7 या 8 कर्म बांधता है और सात या आठ कर्म तोड़ता है। शेयर बाजार की तरह बल्कि उससे भी तेजी ओर मंदी की तरह उतार-चढ़ाव आता रहता है। मन, वचन, काया की शुभ अशुभ प्रवृत्ति कर्मों का शुभ अशुभ बंध करवाती है।
प्रसन्न चंद राजर्षि के भव में इतना उतार-चढ़ाव बड़ी तेजी से आया कि एक ओर तो सातवीं नरक बंधन जितने निकृष्ट अध्यवसाय और दूसरी ओर केवल ज्ञान अपने। आप स्वयं अपनी सोच से खुद को खुश रख सकते हैं। सती चंदन बालाजी के घोर संकट नहीं आते तो वो प्रभु का पारणा करवा पाती क्या? उसे केवल ज्ञान या मुक्ति होती क्या। अतः कोई भी संकट आता है तो उससे घबराने की जरूरत नहीं है, वो भी अच्छाई के लिए है। आज खुश हो तो कल भी खुश रहोगे। आज परेशान हो तो कल भी परेशान रहोगे। अपने को सही बनाने के लिए क्या करना चाहिए? यह समझे। ध्यान दीजिए- एक वे हैं जो मौका आने पर साथ छोड़ देते हैं। दूसरे वे हैं जो साथ देने के लिए मौका ढूंढते हैं। अच्छा करने के लिए अवसर ढूंढे और करते रहें।

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