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उदयपुर की पर्वतारोही बेटी मनस्वी अग्रवाल ने फिर रचा इतिहास, 23 हजार फीट ऊंची चोटी ’’अकोन्कागुआ’’ पर भारतीय तिरंगा फहराया

विश्वभर के 22 पर्वतारोहियों में से मात्र 12 ही इस अभियान में सफल रहे मात्र पांच माह से भी कम समय में विश्व के सात में से चार महाद्वीपों की स...



विश्वभर के 22 पर्वतारोहियों में से मात्र 12 ही इस अभियान में सफल रहे

मात्र पांच माह से भी कम समय में विश्व के सात में से चार महाद्वीपों की सर्वाेच्च चोटियों पर विजय 

उदयपुर। उदयपुर की होनहार पर्वतारोही मनस्वी अग्रवाल ने विश्व पर्वतारोहण के क्षेत्र में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ते हुए भारत और राजस्थान का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। गत माह अंटार्कटिका महाद्वीप की सर्वाेच्च चोटी ’’विन्सन मैसिफ’’ को सफलतापूर्वक फतह कर राजस्थान की प्रथम व्यक्ति बनने का गौरव प्राप्त करने के उपरांत, मनस्वी ने कल रात्रि दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप की एंडीज पर्वत श्रृंखला में स्थित विश्व की अत्यंत चुनौतीपूर्ण एवं लगभग 7000 मीटर (करीब 23,000 फीट) ऊंची चोटी ’’अकोन्कागुआ’’ पर भारतीय तिरंगा फहराया।

इस उपलब्धि के साथ मनस्वी अग्रवाल, राजस्थान की अर्ध सैनिक बल में कार्यरत पर्वतारोही गीता सामोता के बाद अकोन्कागुआ शिखर पर पहुंचने वाली राज्य की दूसरी महिला बन गई हैं। 

22 पर्वतारोहियों में से मात्र 12 ही अभियान में सफल 

उल्लेखनीय है कि एशिया के बाद शेष छह महाद्वीपों में अकोन्कागुआ सर्वाधिक ऊंचाई वाली चोटी है, जहां 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली भीषण ठंडी हवाएं और माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तक गिरता तापमान पर्वतारोहियों की असाधारण परीक्षा लेता है। इन प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण मनस्वी के साथ गए विश्वभर के 22 पर्वतारोहियों में से मात्र 12 ही इस अभियान में सफल हो सके।

एक मिशन पूरा करते ही दूसरे मिशन में लगी, घर भी नहीं लौटी

गौरतलब है कि मनस्वी अग्रवाल अंटार्कटिका अभियान को 23 दिसंबर 2025 को पूर्ण करने के बाद भारत भी नहीं लौटी और 15 दिवस से भी कम अंतराल में, 9 जनवरी 2026 को अकोन्कागुआ के लिए पुनः पर्वतारोहण मिशन प्रारंभ कर दिया, जो अपने आप में हैरत की बात है। इतने अल्प समय में दो अत्यंत कठिन अंतरमहाद्वीपीय अभियानों को सफलतापूर्वक पूर्ण करना उनकी अद्वितीय मानसिक दृढ़ता, शारीरिक क्षमता और अनुशासन का प्रमाण है।

पांच महीने में विश्व की सात चोंटियों में चार पर तिरंगा फहराया

इससे पूर्व मनस्वी ने यूरोप की सर्वाेच्च चोटी ’माउंट एलब्रस’ तथा अफ्रीका की सर्वाेच्च चोटी ’किलीमंजारो’ को भी सफलतापूर्वक फतह किया है। इस प्रकार वे मात्र पांच माह से भी कम समय में विश्व के सात में से चार महाद्वीपों की सर्वाेच्च चोटियों पर विजय प्राप्त कर एक उल्लेखनीय कीर्तिमान स्थापित कर चुकी हैं। उनका लक्ष्य एक वर्ष की अवधि में शेष तीन महाद्वीपों की सर्वाेच्च चोटियों को भी फतह कर ‘सेवन समिट्स’ अभियान को पूर्ण करना है।

साढ़े छह हजार मीटर ऊंची बर्फीली चोटियों पर रहकर अभ्यास 

मनस्वी अग्रवाल ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में कठोर और वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उन्होंने ’माउंटेनरिंग इंस्टीट्यूट दिरांग’ तथा ’हिमालयन माउंटेनरिंग इंस्टीट्यूट’ से मूलभूत एवं एडवांस पर्वतारोहण प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण किया है। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में लगभग एक माह तक साढ़े छह हजार मीटर ऊंची बर्फीली चोटियों पर रहकर अभ्यास कराया जाता है। ये दोनों संस्थान भारतीय सेना द्वारा संचालित हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने ’स्वामी विवेकानन्द रॉक क्लाईबिंग संस्थान’ से भी गहन प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रमाणित प्रशिक्षक का दर्जा हासिल किया है।

मिशन के साथ-साथ पढाई में भी अव्वल

मनस्वी अग्रवाल शिक्षा और खेल के क्षेत्र में भी समान रूप से आगे बढती जा रही है। उन्होंने ’गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी’ से पांच वर्षीय विधि अध्ययन पूर्ण कर स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। वर्तमान में वे पर्यावरणीय कानून पर शोध कर रही हैं तथा हाल ही में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा आयोजित सहायक आचार्य पात्रता परीक्षा में 99.2 पर्सेंटाइल के साथ उत्तीर्ण हुई हैं। साथ ही वे स्थानीय प्रतिष्ठित सिंघानिया लॉ कॉलेज में सहायक आचार्य के रूप में अध्यापन भी कर रही हैं।

मनस्वी अग्रवाल की यह ऐतिहासिक उपलब्धि न केवल उदयपुर और राजस्थान, बल्कि सम्पूर्ण देश के लिए गर्व का विषय है। उनकी सफलता युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए यह संदेश है कि दृढ़ संकल्प, कठिन परिश्रम और अनुशासन के बल पर विश्व की किसी भी ऊंचाई को छुआ जा सकता है। मनस्वी के पिता डॉ टीआर अग्रवाल राजस्थान वित्त सेवा से अतिरिक्त निदेशक पद से सेवानिवृत्त है, जबकि माता डॉ सरोज अग्रवाल उदयपुर के मीरा गर्ल्स कॉलेज में इतिहास विभाग में प्रोफेसर हैं।

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