श्री महालक्ष्मी कोटि कुंकुमार्चन यज्ञ पूजा साधना महोत्सव अंतिम चरण की ओर गुरुदेव ने बताए योग शास्त्र के गूढ़ रहस्य उदयपुर। मीरा नगर के विशाल...
श्री महालक्ष्मी कोटि कुंकुमार्चन यज्ञ पूजा साधना महोत्सव अंतिम चरण की ओर
गुरुदेव ने बताए योग शास्त्र के गूढ़ रहस्य
उदयपुर। मीरा नगर के विशाल प्रांगण में कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु पूज्यपाद श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज के पावन स्नेहाशीष में चल रहे श्री महालक्ष्मी कोटि कुंकुमार्चन यज्ञ पूजा साधना महामहोत्सव अंतिम चरण की ओर अग्रसर है। एक साथ हजारों श्रद्धालु अनुशासित बैठ महायज्ञ विधान, पूजा और साधना में कर रहे हैं।
समिति के अध्यक्ष नानालाल बया, महामंत्री देवेन्द्र मेहता ने बताया कि श्री एकलिंगनाथ शिव पुराण कथा के छठे दिन जगद्गुरु श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज ने योग शास्त्र की गहरी बातें बताई। आपने बताया कि जब आप अत्यधिक हताशा, निराशा महसूस करें तो किसी बगीचे में जाकर बैठिये। वहां शांत बैठकर थोड़ा ध्यान करें और तीन बार गहरी सांस लेकर छोड़ें। स्वतः अत्यधिक ऊर्जा से भर उठेंगे। नाभि से गहरी श्वांस खींचे, हवा न खींचें। श्वांस जितनी धीमी लेंगे उम्र उतनी लंबी होगी। कछुआ इसका जीवंत प्रमाण है। यह योग शास्त्र का रहस्य है किंतु उतना ही आसान है।
गुरुदेव ने कहा आप अपना आभामंडल सुधारने का सतत प्रयत्न करें। तब आपको मनोवांछित सफलताएं मिलना स्वतः प्रारंभ हो जाएगी। मकड़ी को आभामण्डल के लिए कहीं नहीं जाना पड़ता। उसके द्वारा बनाया जाल उसका आभामण्डल है जिसमें उसके मन के अनुसार वस्तुएं स्वतः आकर्षित होकर आती है।
गुरुदेव ने बताया जिन्हें अपने घर मे नकारात्मक शक्ति, टोने टोटके का डर सताता है। वे नर्सरी से सफेद गुड़हल का पौधा लाएं और अपने घर में ऐसे स्थान पर रखें जहां उसे प्रकाश हवा पर्याप्त मिल सके। शाम को रखा हुआ यह पौधा सुबह कुम्हला जाए तो समझिए घर में नकारात्मक शक्तियों का असर हो सकता है। रविवार के दिन एक कटोरे में खड़ा नमक का घोल बनाकर शरीर पर अच्छे से मलें फिर स्नान करें। सभी नकारात्मकता नष्ट होगी। प्रज्ञा जितनी अच्छी होगी, शक्ति भी उतनी ही ऊर्जावान होगी।
गुरुदेव ने विभिन्न मुद्राओं के माध्यम से सुख समृद्धि, शांति प्राप्त करने के उपाय बताये। साथ ही विभिन्न मुद्राओं के माध्यम से देवी देवताओं की कृपा आकर्षित करने के तरीके भी चमकाए।
जगद्गुरू श्री वसन्त विजयानन्द गिरी जी महाराज ने कथा में कहा वशिष्ट ऋषि, कवचिक राजा, इंद्र, कामधेनु, नंदिनी के प्रसंग का विस्तार पूर्वक वर्णन किया। राजा द्वारा नंदिनी को बलपूर्वक ले जाने का कृत्य किया जा रहा था तब वेदना से भरी नंदिनी ने मां को करुणा से पुकारा। मां कामधेनु प्रकट हुई और कामधेनु के बताए मार्ग अनुसार भगवान एकलिंगजी को प्रणाम करने पहुंची। सींगों से भूमि को कुरेदकर नंदिनी ने एकलिंगजी के समक्ष रक्षमाम, त्राहिमाम की पुकार की। भगवान भोले प्रकट हुए और नंदिनी को वरदान दिया। नंदिनी ने हुंकार भरकर नाक से श्वांस की ऐसी फुफकार की कि कवचिक राजा की समूची सेना नष्ट हो गई। भोले के प्रताप और महिमा जानकर कवचिक भी भोले की साधना में लीन होगये। जो ऋषि विश्वामित्र कहलाये और जग कल्याण करने निकल पड़े। गुरुदेव ने कथा का सार बताया कि अहंकार अंततः हारता है। दुख जीवन को निखारता है। सुख में आनन्द जरूर आता है लेकिन जीवन में निखार दुख से ही आता है।
विधायक कृपलानी ने लिया जगद्गुरु श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी से आशीर्वाद–
कथा में राजस्थान के पूर्व यूडीएच मंत्री एवं निम्बाहेड़ा विधायक श्री श्रीचंद कृपलानी ने उपस्थित होकर जगद्गुरु पूज्यपाद श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी का आशीर्वाद लिया। श्री कृपलानी ने गुरुदेव को पुष्प माला अर्पित की। श्री कृपलानी का कृष्णगिरी शक्तिपीठ के अध्यक्ष श्री शंकेश जैन ने उपरना और माला पहनाकर सम्मान किया।
सुबह साधना विधान में जगद्गुरु श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी के श्रीमुख से गहन मंत्रोच्चार के साथ हजारों श्रद्धालु धर्म लाभ ले रहे हैं। समृद्धि को आकर्षित करने वाले जीबू कॉइन, समृद्धि कलश सिद्ध किये जा रहे हैं, वहीं पवित्र श्री महालक्ष्मी यज्ञ में भी रोजाना तीन से चार घंटे अनवरत प्रक्रिया में श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं।
उदयपुर। मीरा नगर के विशाल प्रांगण में कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु पूज्यपाद श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज के पावन स्नेहाशीष में चल रहे श्री महालक्ष्मी कोटि कुंकुमार्चन यज्ञ पूजा साधना महामहोत्सव अंतिम चरण की ओर अग्रसर है। एक साथ हजारों श्रद्धालु अनुशासित बैठ महायज्ञ विधान, पूजा और साधना में कर रहे हैं।
समिति के अध्यक्ष नानालाल बया, महामंत्री देवेन्द्र मेहता ने बताया कि श्री एकलिंगनाथ शिव पुराण कथा के छठे दिन जगद्गुरु श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज ने योग शास्त्र की गहरी बातें बताई। आपने बताया कि जब आप अत्यधिक हताशा, निराशा महसूस करें तो किसी बगीचे में जाकर बैठिये। वहां शांत बैठकर थोड़ा ध्यान करें और तीन बार गहरी सांस लेकर छोड़ें। स्वतः अत्यधिक ऊर्जा से भर उठेंगे। नाभि से गहरी श्वांस खींचे, हवा न खींचें। श्वांस जितनी धीमी लेंगे उम्र उतनी लंबी होगी। कछुआ इसका जीवंत प्रमाण है। यह योग शास्त्र का रहस्य है किंतु उतना ही आसान है।
गुरुदेव ने कहा आप अपना आभामंडल सुधारने का सतत प्रयत्न करें। तब आपको मनोवांछित सफलताएं मिलना स्वतः प्रारंभ हो जाएगी। मकड़ी को आभामण्डल के लिए कहीं नहीं जाना पड़ता। उसके द्वारा बनाया जाल उसका आभामण्डल है जिसमें उसके मन के अनुसार वस्तुएं स्वतः आकर्षित होकर आती है।
गुरुदेव ने बताया जिन्हें अपने घर मे नकारात्मक शक्ति, टोने टोटके का डर सताता है। वे नर्सरी से सफेद गुड़हल का पौधा लाएं और अपने घर में ऐसे स्थान पर रखें जहां उसे प्रकाश हवा पर्याप्त मिल सके। शाम को रखा हुआ यह पौधा सुबह कुम्हला जाए तो समझिए घर में नकारात्मक शक्तियों का असर हो सकता है। रविवार के दिन एक कटोरे में खड़ा नमक का घोल बनाकर शरीर पर अच्छे से मलें फिर स्नान करें। सभी नकारात्मकता नष्ट होगी। प्रज्ञा जितनी अच्छी होगी, शक्ति भी उतनी ही ऊर्जावान होगी।
गुरुदेव ने विभिन्न मुद्राओं के माध्यम से सुख समृद्धि, शांति प्राप्त करने के उपाय बताये। साथ ही विभिन्न मुद्राओं के माध्यम से देवी देवताओं की कृपा आकर्षित करने के तरीके भी चमकाए।
जगद्गुरू श्री वसन्त विजयानन्द गिरी जी महाराज ने कथा में कहा वशिष्ट ऋषि, कवचिक राजा, इंद्र, कामधेनु, नंदिनी के प्रसंग का विस्तार पूर्वक वर्णन किया। राजा द्वारा नंदिनी को बलपूर्वक ले जाने का कृत्य किया जा रहा था तब वेदना से भरी नंदिनी ने मां को करुणा से पुकारा। मां कामधेनु प्रकट हुई और कामधेनु के बताए मार्ग अनुसार भगवान एकलिंगजी को प्रणाम करने पहुंची। सींगों से भूमि को कुरेदकर नंदिनी ने एकलिंगजी के समक्ष रक्षमाम, त्राहिमाम की पुकार की। भगवान भोले प्रकट हुए और नंदिनी को वरदान दिया। नंदिनी ने हुंकार भरकर नाक से श्वांस की ऐसी फुफकार की कि कवचिक राजा की समूची सेना नष्ट हो गई। भोले के प्रताप और महिमा जानकर कवचिक भी भोले की साधना में लीन होगये। जो ऋषि विश्वामित्र कहलाये और जग कल्याण करने निकल पड़े। गुरुदेव ने कथा का सार बताया कि अहंकार अंततः हारता है। दुख जीवन को निखारता है। सुख में आनन्द जरूर आता है लेकिन जीवन में निखार दुख से ही आता है।
विधायक कृपलानी ने लिया जगद्गुरु श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी से आशीर्वाद–
कथा में राजस्थान के पूर्व यूडीएच मंत्री एवं निम्बाहेड़ा विधायक श्री श्रीचंद कृपलानी ने उपस्थित होकर जगद्गुरु पूज्यपाद श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी का आशीर्वाद लिया। श्री कृपलानी ने गुरुदेव को पुष्प माला अर्पित की। श्री कृपलानी का कृष्णगिरी शक्तिपीठ के अध्यक्ष श्री शंकेश जैन ने उपरना और माला पहनाकर सम्मान किया।
सुबह साधना विधान में जगद्गुरु श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी के श्रीमुख से गहन मंत्रोच्चार के साथ हजारों श्रद्धालु धर्म लाभ ले रहे हैं। समृद्धि को आकर्षित करने वाले जीबू कॉइन, समृद्धि कलश सिद्ध किये जा रहे हैं, वहीं पवित्र श्री महालक्ष्मी यज्ञ में भी रोजाना तीन से चार घंटे अनवरत प्रक्रिया में श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं।


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