200 प्रतिभावान छात्राओं व समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं के सम्मान से चेहरे खिले उदयपुर। भारत की प्रथम शिक्षिका सावित्रीबाई फुले...
200 प्रतिभावान छात्राओं व समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं के सम्मान से चेहरे खिले
उदयपुर। भारत की प्रथम शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जन्म जयंती सर्व ओबीसी समाज महापंचायत ट्रस्ट उदयपुर एवं ज्योतिबा फुले टीटी कॉलेज उदयपुर के संयुक्त तत्वाधान में दी फॉर्चून पार्क होटल का गार्डन, माली कॉलोनी में धूमधाम से मनाई । प्रवक्ता नरेश पूर्बिया ने बताया की कार्यक्रम में उदयपुर जिले के ओंगणा, झाड़ोल, सलूंबर सहित कई गांवों प्रतिभावान 200 छात्राओं एवं समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को अतिथियों ने उपरणा, प्रसंशा पत्र व स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकेश चौधरी ने की। मुख्य अतिथि वल्लभनगर विधायक उदय लाल डांगी की एवं प्रतिभा गुप्ता जिला शिक्षा अधिकारी उदयपुर थी। विशिष्ट अतिथि शंकर लाल मालवीय सेवानिवृत्त एसडीएम , मोटिवेशनल स्पीकर नवनीत नागर निदेशक चिंतामणि कोचिंग इंस्टीट्यूट, दिनेश चौधरी थे।
मुख्य वक्ता भंवरलाल गुर्जर कुलाधिपति जनार्दन राय नगर राजस्थान विद्यापीठ थे। सभी अतिथियों का स्वागत पगड़ी, उपरणा व स्मृति चिन्ह भेंटकर शब्दों से स्वागत अध्यक्ष लोकेश चौधरी ने किया।
संस्थापक दिनेश माली अपने उद्बोधन में बताया कि महात्मा ज्योतिबा फुले की प्रेरणा से सावित्रीबाई फुले 17 साल की आयु में 1 जनवरी 1848 पुणे के भिड़े वाडा में भारत का पहला बालिका विद्यालय खोला, जिसमें मात्र 9 लड़कियां पढ़ने को तैयार हुई। 1851 में तीन और बालिका विद्यालय खोलें। ज्योतिमा फूले का मकसद महिलाओं के दशा सुधारना एवं समाज में उन्हें पहचान दिलाना था। उस समय लड़कियों की शिक्षा अभिशाप माना जाता था। शिक्षिका सावित्रीबाई फुले स्कूल में पढ़ाने जाते वक्त लोग गोबर व पत्थर फेंकते थे। जिससे वे स्कूल में जाकर साड़ी बदलकर बालिकाओं को पढ़ती थी। गर्भवती विधवा उस समय आत्महत्या कर लेती या बच्चों को जन्म के बाद फेंक देती थी ।फूले दम्पत्ति ने 1863 में बाल हत्या प्रतिबंधक गृह की शुरुआत की। जिसमें गर्भवती विधवा रह सकती थी और अपने संतान को जन्म दे सकती थी। जिसका नाम गुप्त रखा जाता था। सामाजिक परिवर्तन के लिए ज्योतिमा फुले ने 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना की। उनकी मृत्यु के बाद सत्यशोधक समाज की बागडोर सावित्रीबाई फुले ने संभाली। 1897 में प्लेग की महामारी फैल गई। वे लोगों की चिकित्सा एवं सेवा में जुट गई और स्वयं भी इस बीमारी से शिकार हो गई और 10 मार्च 18 97 में उनकी मृत्यु हो गई।
विधायक उदय लाल डांगी ने कहा कि नारी शिक्षा से समाज का विकास संभव है।
मोटिवेशनल स्पीकर नवनीत नागर ने कहा कि स्कूल शिक्षा में अच्छे अंक से नौकरी में सफलता नहीं मिलती। प्रतियोगिता परीक्षा निरंतर और धैर्य के साथ तैयारी करने से सफलता मिलती हैं।
कार्यक्रम में संस्थापक दिनेश माली , प्रदेश महिला प्रदेश अध्यक्ष मणी बहन पटेल , कोषाध्यक्ष गंगा देवी माली ,अध्यक्ष लोकेश चौधरी, महामंत्री सूर्य प्रकाश सुहालका, प्रवक्ता नरेश पूर्बिया, संयोजक भेरुलाल कलाल, युवा प्रदेश अध्यक्ष दिवाकर माली, महिला प्रदेश महामंत्री शर्मिला माली, पी एस पटेल,बाल कृष्ण सुहालका,डी पी लक्ष्कार, दिनेश कुमार माली,पुजा टेलर, , जयमाला टेलर , मंजू माली आई टी सेल,22 समाजों के अध्यक्ष व पदाधिकारी, कलावती पूर्बिया, कोमल पूर्बिया, ललीता पूर्बिया सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।

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