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उदयपुर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सुरों की मंडली की अनोखी पहल, उदयपुर में पहली बार खेला गया संगीतमय सितोलिया

शहर के विभिन्न संगठनों के सदस्य हुए शामिल उदयपुर।  झीलों की नगरी उदयपुर की फिजाओं में मकर संक्रांति के पावन पर्व पर इस बार केवल पतंगों की ही...


शहर के विभिन्न संगठनों के सदस्य हुए शामिल

उदयपुर।  झीलों की नगरी उदयपुर की फिजाओं में मकर संक्रांति के पावन पर्व पर इस बार केवल पतंगों की ही नहीं, बल्कि सुरों और खेलों की भी अनूठी गूंज सुनाई दी। शहर की प्रतिष्ठित और सक्रिय संगीतमय संस्था 'सुरों की मंडली' की ओर से मंकर संक्रांति के पुनीत अवसर पर 100 फीट रोड, शोभागपुरा स्थित अशोका ग्रीन में पर्यटन को एक नई ऊंचाई देने और पारंपरिक खेलों को आधुनिक कलेवर में ढालने के उद्देश्य से पहली बार 'संगीतमय सितोलिया' का भव्य आयोजन किया गया। इस भव्य आयोजन में उदयपुर शहर के विभिन्न व्यापारिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों के सदस्यों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

शोभागपुरा स्थित अशोका ग्रीन के विशाल गार्डन में आयोजित इस कार्यक्रम ने उदयपुर के खेल इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया, जहाँ पहली बार मैदान पर खिलाड़ियों के बीच गेंद और गिट्टियों के साथ-साथ सुरों का मुकाबला भी देखने को मिला। खेल और संगीत का यह फ्यूजन न केवल प्रतिभागियों के लिए रोमांचक रहा, बल्कि इसने वहां मौजूद दर्शकों को भी झूमने पर मजबूर कर दिया।

पारंपरिक खेलों से पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रयास

सुरों की मंडली के संस्थापक अध्यक्ष मुकेश माधवानी ने बताया कि उदयपुर हमेशा से अपनी कला और संस्कृति के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपने पारंपरिक खेलों को भूलते जा रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर इस बार सितोलिया का खेल अपने पुराने स्वरूप से बिल्कुल अलग और अधिक चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने बताया कि खेल के नए नियमों के अनुसार, सितोलिया की गिट्टियां जमाने वाली टीम के खिलाड़ी के लिए यह अनिवार्य था कि वह पत्थर जमाते समय पूरे जोश के साथ एक सुरीला गीत गाए। इसके साथ ही, गेंद मारने वाले खिलाड़ी को भी आउट करने या फील्डिंग करने की अपनी अगली प्रक्रिया शुरू करने से पहले एक सुंदर गीत की पंक्तियां सुनानी पड़ती थीं। इस दौरान सभी ने एक से बढ़कर एक गीत गाएं।

उन्होंने बताया कि अशोका ग्रीन के गार्डन का नजारा बेहद रोमांच भरा रहा। जहाँ एक ओर युवा और बुजुर्ग सितोलिया के खेल में अपनी फुर्ती दिखा रहे थे, तो वहीं दूसरी ओर आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से सराबोर था। उन्होंने बताया कि इस उत्सव की रौनक को दोगुना करने के लिए सभी प्रतिभागियों को अपने साथ निजी सितोलिया सेट, बैट, पतंग और मांझा लाने के लिए प्रोत्साहित किया गया था, जिससे हर किसी ने अपनी पसंद और शैली के अनुसार त्योहार का आनंद लिया।

अगली बार बड़े स्तर पर किया जाएगा आयोजन

मुकेश माधवानी ने बताया कि इस वर्ष इस कार्यक्रम को सामान्य स्तर पर प्रयोग के तौर पर आयोजित किया गया था, जिसे शहरवासियों का भरपूर प्यार मिला। उन्होंने बताया कि अगले साल इस आयोजन को और भी भव्य और बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा। आगामी वर्षों में 'सुरों की मंडली' के अलावा शहर के अन्य सामाजिक संगठनों, क्लबों और देश-दुनिया के संगीत प्रेमियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाएगा ताकि इसे एक विस्तृत और अंतरराष्ट्रीय पहचान दी जा सके। माधवानी ने कहा कि उनका लक्ष्य है कि 'संगीतमय सितोलिया' उदयपुर के पर्यटन कैलेंडर का एक मुख्य आकर्षण बने।

इस अवसर पर बीसीआई से मुकेश माधवानी, देवेन्द्र सिंह करीर, राम रतन डाड़, संजीव पटवा, आलोक गुप्ता, विवान बंसल, अमृता बोकडिया, वेदांत सोलंकी, धर्मवीर देवल, चिन्मय वैरागी और सुरों की मंडली से अरुण चौबीसा, योगेश उपाध्याय, संजय गुप्ता, गोपाल गोठवाल, निखिल माहेश्वरी, नारायण सालवी, शगुन, चेतना जैन, श्रीचंद खथूरिया, रुपाली मोटवानी, नारायण सालवी, रक्षा शर्मा आदि उपस्थित रहें।


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