Page Nav

HIDE

Classic Header

{fbt_classic_header}

breaking news

latest

हिंदुस्तान जिंक ने वूमेन इन साइंस इंटरनेशनल डे के अवसर पर विशेष अभियान ‘शी नोज द ग्राउंड शी स्टैंड्स ऑन’ शुरू किया

- यह पहल बड़े साइंस इंस्टीट्यूशन की युवा महिलाओं को माइनिंग ,  स्मेल्टिंग और एसटीईएम करियर के लिए ऑन-ग्राउंड एक्सपोजर प्रदान करती है -  कंपनी...


-यह पहल बड़े साइंस इंस्टीट्यूशन की युवा महिलाओं को माइनिंगस्मेल्टिंग और एसटीईएम करियर के लिए ऑन-ग्राउंड एक्सपोजर प्रदान करती है

कंपनी में 700 से अधिक महिलाएं कार्यरतजिनमें 200 से अधिक इंजीनियर कोर ऑपरेशनल रोल में

- 2030 तक 30 प्रतिशत डायवर्सिटी हासिल करने का लक्ष्य

 

उदयपुर, 10 फरवरी 2026। वूमेन इन साइंस इंटरनेशनल डे के अवसर परविश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक प्रोड्यूसर एवं विश्व में टॉप पांच सिल्वर प्रोड्यूसर में से एकहिंदुस्तान जिंक ने “शी नोज द ग्राउंड शी स्टैंड्स ऑन” विशेष ऑन-ग्राउंड इनिशिएटिव शुरू किया हैजिसे युवा महिलाओं को माइनिंग और मेटल ऑपरेशन का सीधा अनुभव देने के लिए डिजाइन किया गया है। अगले 25-30 दिनों मेंभारत के जाने-माने साइंस कॉलेजों की चुनी हुई प्रतिभावान युवा महिलाएं हिंदुस्तान जिंक के माइनिंग और मेटल्स ऑपरेशन्स में कदम रखेंगी। यह एक सोशल एक्सपेरिमेंट का हिस्सा है जिसका मकसद यह बताना है कि मेटल्स सेक्टर में महिलाएं कैसे सोचती हैं और उन्हें कैसे समझा जाता है।

हाल ही में स्टूडेंट्स के पहले ग्रुप ने ऑपरेशन्स का दौरा कियाजिसमें आईआईटी आईएसएम धनबाद,एमएनआईटी  जयपुरबनस्थली विद्यापीठसीटीएई उदयपुरएमएलएसयू उदयपुर और एमबीएम जोधपुर जैसे बड़े इंस्टीट्यूशन्स के पार्टिसिपेंट्स शामिल थे। इस ग्रुप में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंगमाइनिंगजियोलॉजी और मेटलर्जी में अलग-अलग एकेडमिक बैकग्राउंड के लोग थेऔर उन्हें बड़े पैमाने पर इंडस्ट्रियल ऑपरेशन्सएडवांस्ड टेक्नोलॉजी और कोर एसटीईएम रोल्स में उभरते करियर के अवसरों का सीधा अनुभव मिला।

यह पहल मेटल और माइनिंग सेक्टर के स्केलकॉम्प्लेक्सिटी और टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट के बारे में स्ट्रक्चर्डफर्स्ट-हैंड एक्सपोजर देने के लिए डिजाइन की गई है। अंडरग्राउंड माइंसस्मेल्टर्स और लैब्स में क्यूरेटेड साइट इमर्शन के जरिएस्टूडेंट्स मॉडर्न माइनिंग प्रैक्टिसडिजिटल और ऑटोमेटेड ऑपरेशन्ससेफ्टी सिस्टम्स और कोर एसटीईएम रोल्स में उपलब्ध करियर पाथवेज की बड़ी रेंज की गहरी समझ हासिल करते हैं। यह अनुभव इंजीनियरों और टेक्निकल लीडर्स के साथ डायरेक्ट इंटरेक्शन भी कराता हैजिससे एकेडमिक लर्निंग और रियल-वर्ल्ड इंडस्ट्री एप्लीकेशन के बीच के गैप को कम करने में मदद मिलती हैसाथ ही युवा महिलाओं में इस सेक्टर में लॉन्ग-टर्म करियर के बारे में सोचने का कॉन्फिडेंस भी बनता है।

अपना अनुभव साझा करते हुएएमबीएम यूनिवर्सिटीजोधपुर की मैकेनिकल इंजीनियरिंग स्टूडेंट अंकिता गौड़ ने कहा कि,“मैं अपनी मैकेनिकल इंजीनियरिंग की किताबों में पढ़े कॉन्सेप्ट्स को माइनिंग ऑपरेशन्स की अपनी विजिट के दौरान हकीकत में अपने समक्ष संचालित होते हुए देखने के लिए बहुत उत्साहित हूँ।”

इस पहल के पीछे के बड़े इरादे और एसटीएम में महिलाओं के लिए भविष्य के रास्ते बनाने पर इसके फोकस पर बात करते हुएहिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा, “मेटल्स और माइनिंग सेक्टर का भविष्य इस बात से तय होगा कि हम अलग-अलग तरह के टैलेंट को कैसे बढ़ावा देते हैंइनोवेशन को कैसे तेज करते हैंऔर भविष्य के लिए तैयार वर्कफोर्स कैसे बनाते हैं। हिंदुस्तान जिंक मेंहम इनक्लूजन को एक स्ट्रेटेजिक ताकत के तौर पर देखते हैं जो परफॉर्मेंस और लॉन्ग-टर्म वैल्यू क्रिएशन को बढ़ाती है। ‘शी नोज द ग्राउंड शी स्टैंड्स ऑन’ शुरुआती एक्सपोजर बनाने और ज्यादा युवा महिलाओं को साइंसटेक्नोलॉजी और माइनिंग में करियर बनाने और लीड करने के लिए बढ़ावा देने की दिशा में एक अच्छा कदम है। युवा प्रतिभाओं के लिए अपने ऑपरेशन खोलकरहमारा मकसद कॉन्फिडेंस जगानासोच बदलना और सेक्टर के लिए एक मजबूतअधिक रिप्रेजेंटेटिव टैलेंट भविष्य बनाना है।”

अलग-अलग इंस्टीट्यूशन के स्टूडेंट्स ने पहली बार इंडस्ट्रियल ऑपरेशन्स को करीब से अनुभव करने पर धनबाद की माइनिंग इंजीनियरिंग की छात्रा श्रुति कुमारी ने कहा,

मैं बड़ी मशीनों और हाई-एनर्जी माहौल को लेकर उत्साहित हूँ जिसका हम अनुभव करेंगे। एक जैसी सोच वाली महिलाओं को देखना प्रेरणा देने वाला है जो किसी भी रोल में उतनी ही कुशल और काबिल हैं। मैं उन महिला कर्मचारियों से मिलने का इंतजार कर रही हूँ जो जमीन से लेकर व्यापार तक में अग्रणी हैं।”

हिंदुस्तान जिंक ने लंबे समय से मेटल और माइनिंग सेक्टर में इनक्लूजन को आगे बढ़ाया हैजिसमें कोर ऑपरेशन्स में महिला प्रोफेशनल्स का अनुपात अपने साथियों की तुलना में सबसे अधिक है। आजइसके एक चैथाई से अधिक वर्कफोर्स में महिलाएं हैंजिनमें इंजीनियरिंग से लेकर जियोलॉजी और लैब साइंस तक के जरूरी फील्ड्स की लीडर्स शामिल हैं। हिंदुस्तान जिंक का युवा और डायनैमिक वर्कफोर्सजिसमें लगभग 62 प्रतिशत कर्मचारी 35 साल से कम उम्र के हैंकंपनी के फ्यूचर-रेडी कल्चर और उभरते टैलेंट के लिए एक वर्कप्लेस के तौर पर इसकी मजबूत अपील को दर्शाता है। कंपनी 2030 तक कम से कम 30 प्रतिशत महिलाओं का रिप्रेजेंटेशन हासिल करने की राह पर हैजिससे जेंडर डायवर्सिटी के लिए उसका कमिटमेंट और मजबूत होगा और मेटल्स और माइनिंग को महिला साइंटिस्ट्स और टेक्नोलॉजिस्ट्स के लिए एक आकर्षक और इनक्लूसिव करियर ऑप्शन के तौर पर जगह मिलेगी।

इस कैंपेन के अलावाहिंदुस्तान जिंक ऑर्गनाइजेशन और कम्युनिटी में महिलाओं की सफलता के लिए अपने इकोसिस्टम को निरंतर मजबूत कर रहा है। कंपनी की प्रोग्रेसिव पीपल पॉलिसीज में फ्लेक्सिबल वर्किंग अरेंजमेंट्सस्पाउस-हायरिंगमेंटल और फिजिकल वेलनेस लीवएक्सटेंडेड पेरेंटल सैबेटिकल्सऔर सभी ऑपरेशनल शिफ्ट्स में एक्सपैंडेड पार्टिसिपेशन शामिल हैंजिसमें अब महिलाओं के लिए नाइट शिफ्ट रोल्स भी शामिल हैंजिससे इक्विवेलेंट करियर पाथवे सुनिश्चित होते हैं। टेली-रिमोट माइनिंगरोबोटिक्सऑटोमेशन और रियल-टाइम एनालिटिक्स सहित हिंदुस्तान जिंक का डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन मैनुअल लेबर की जरूरत को कम करता है और टेक्निकल रोल्स को अधिक एक्सेसिबल बनाता हैजिससे साइंस में महिलाओं के लिए माइनिंग को आकर्षकफ्यूचर-रेडी करियर ऑप्शन बनाने के उसके मिशन को और मजबूती मिली है।

 

No comments