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दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा प्रियांशी जैन ने अपना जन्मदिन गौशाला में मनाया, 400 गौमाता को छप्पन भोग कराया

गौ माता को छप्पन भोग करना बच्चों में संस्कार की वृद्धि: बाबा लक्ष्मण पुरी  उदयपुर, 23 अप्रेल। श्री गुरु चंद्रोशन गौ सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान...


गौ माता को छप्पन भोग करना बच्चों में संस्कार की वृद्धि: बाबा लक्ष्मण पुरी 

उदयपुर, 23 अप्रेल। श्री गुरु चंद्रोशन गौ सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में 108 गौशाला में देश के अनोखा आयोजन छप्पन भोग अभियान के तहत कलडवास स्थित शिवशंकर गौशाला में 400 गौमाता को चतुर्थ छप्पन भोग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम संयोजक स्वीटी जैन पोरवाल ने बताया कि सभी अतिथियों का स्वागत संस्थापक संजय जैन ने करते हुए अतिथियों का माला, उपरणा, पगड़ी से सम्मान किया व गौमाता की आरती की। कार्यक्रम के लाभार्थी दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा प्रियांशी (प्रांजल) जैन थी 

मुख्य वक्ता बाबा लक्ष्मण पुरी महाराज थे। मुख्य अतिथि भाजपा शहर ज़िलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ थे। अध्यक्षता 108 गौशाला के छप्पन भोग के ब्रांड एंबेसडर एवं राजस्थान गौरव डॉ जिनेंद्र शास्त्री ने की। विशिष्ट अतिथि समाजसेवी डॉ महावीर प्रसाद जैन, पं ऋषभ जैन शास्त्री, बाल ब्रह्मचारी मधुकांता जैन, बाल ब्रह्मचारी स्वाती जैन ,राष्ट्रीय कवि अजात शत्रु ,शुद्धम् ग्रुप की डायरेक्टर डॉ सीमा जैन, श्रीमती पुष्पा देवी जैन, लवदेव बागड़ी, मयंक कोठारी, बजरंग सेना के कमलेश शर्मा, समाजसेवी लव वर्मा, समाजसेवी राजमल जैन, मनोहर भोरावत व राज बागड़ी थे। 

मुख्य वक्ता बाबा लक्ष्मण पुरी महाराज ने कहा कि प्रियांशी जैन के जन्मदिन पर आयोजित छप्पन भोग प्रेरणादायक है। जन्मदिन जैसे विशेष अवसर को गौमाता की सेवा में समर्पित करना वास्तव में एक महान और पुण्य कार्य है। 56 भोग अर्पित कर आपने भक्ति, सेवा और संस्कारों का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया है। अध्यक्षता करते हुए डॉ. जिनेंद्र शास्त्री ने कहा कि उदयपुर को गौसेवा का प्रमुख जिला बनाना मेरा स्वप्न हैं। 

पं.ऋषभ जैन शास्त्री ने आयोजकों का इस पुण्य अवसर का साक्षी बनने का अवसर देने पर आभार व्यक्त किया। 

संस्थापक संजय जैन ने कहा की गौमाता हमारी संस्कृति, परंपरा और सनातन मूल्यों की प्रतीक हैं। उनका आशीर्वाद हमें सुख, समृद्धि और शांति प्रदान करता है। आज मैंने जो भी 56 भोग अर्पित किए हैं, वह मेरे मन की भावनाओं का एक छोटा सा रूप है। इस अवसर पर हेमंत दया, भगवती लौहार, भानुदेवी जैन, श्रीमती भारती जैन, शुद्धि जैन, लता औदिच्य, भारती कूकरेचा, विशाल प्रजापत, हर्षिता कुकरेती, तरुण शर्मा, हेमन्त गर्ग, राजू चारण, तनिष्क जैन, दक्ष जैन जशोदा लौहार, हार्वी लौहार आदि मौजूद थे। 

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