-राजस्थान पंचायतीराज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के बैनर तले शिक्षकों ने किया प्रदर्शन उदयपुर। राजस्थान पंचायतीराज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ ने बु...
-राजस्थान पंचायतीराज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के बैनर तले शिक्षकों ने किया प्रदर्शन
उदयपुर। राजस्थान पंचायतीराज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ ने बुधवार को सात सूत्रीय मांगों को लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर हजारों शिक्षकों की मांगों पर ध्यान देने का आग्रह किया।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष शेरसिंह चौहान, जिलाध्यक्ष कमलेश शर्मा व अरविंद मीणा के नेतृत्व में शिक्षकों ने प्रदर्शन कर अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से रखा। कलेक्टर को दिए ज्ञापन में बताया गया कि प्रदेश में हजारों शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाया हुआ है, साथ ही विद्यालय में हजारों शिक्षकों, व्याख्याताओं व प्रधानाचार्यों के पद रिक्त चल रहे हैं। विद्यालय के भवन जर्जर स्थिति में है। अतः शिक्षा की गुणवत्ता समय बढ़ाने से नहीं बल्कि विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार, पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति और आवश्यक संसाधनों के विकास से ही सुनिश्चित की जा सकती है। ग्रीष्मावकाश में कटौती का विभाग का निर्णय प्रदेश की भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियों के प्रतिकूल है और विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। 21 जून से 30 जून के बीच राजस्थान के अधिकांश जिलों में तापमान 45 से 50 डिग्री रहता है व तेज लू चलती है, जो विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की दृष्टि से प्रतिकूल है। ग्रीष्मावकाश में कटौती व प्रधानाचार्य अधिकृत अवकाश को कम करने सहित वर्षों से लंबित समस्याओं को लेकर संपूर्ण शिक्षक वर्ग में भारी आक्रोश व्याप्त है।
संगठन ने राज्य सरकार से 21 जून से विद्यालय खोलने के आदेश को प्रत्याहरित करते हुए शिविरा पंचांग को पुनः संशोधित कर पूर्व की भांति एक जुलाई से विद्यालय संचालन प्रारंभ करने सहित सात सूत्रीय मांग पर शीघ्र समाधान की मांग की। संगठन ने चेताया कि यदि उक्त मांगों पर सरकार द्वारा संवेदनशील रवैया अपनाते हुए विचार नहीं किया गया तो संगठन को मजबूरन आंदोलन के लिए विवश होकर 17 मई को प्रदेश की राजधानी जयपुर में धरना प्रदर्शन करने पर विवश होना पड़ेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शिक्षा विभाग राजस्थान सरकार की होगी।
शिक्षकों ने यह रखी मांगे
1 ग्रीष्मावकाश कटौती का, विभाग का निर्णय प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के प्रतिकूल है, और विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। स्थानीय सांस्कृतिक, सामाजिक और ग्रामीण मेलों में विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रदान किए गए प्रधानाध्यापक अधिकृत अवकाश में भी कटौती की गई है, जो कि अव्यवहारिक निर्णय है। अतः शिवरा कैलेंडर में बदलाव करते हुए पूर्व की भांति ही ग्रीष्मावकाश और प्रधानाध्यापक अधिकृत अवकाश रखे जावे।
2. विगत 8 वर्षों से तृतीय श्रेणी शिक्षक संवर्ग को छोड़कर अन्य समस्त शिक्षक संवर्ग के स्थानांतरण राज्य सरकार द्वारा किए गए है। परंतु प्रबोधकों, तृतीय श्रेणी शारीरिक शिक्षकों, तृतीय श्रेणी सामान्य और विशेष शिक्षकों के स्थानांतरण नहीं किए गए हैं। जोकि तृतीय श्रेणी शिक्षकों के प्रति सरकार का भेदभावपूर्ण रवैया प्रतीत होता है। अतः उक्त संवर्ग के स्थानांतरण शीघ्र शुरू किये जावे।
3. विगत 6 शैक्षिक सत्रो से रुकी हुई डीपीसी के लिए न्यायालय में प्रभावी पैरवी कर जल्द से जल्द डीपीसी करवाकर रिक्त पदों को भरा जाये।
4. विद्यालय में शिक्षकों, व्याख्याताओं और प्रधानाचार्यों के रिक्त पदों को अति शीघ्र भरा जावे। ताकि प्रदेश के समस्त बालकों को शिक्षा के अधिकार से वंचित ना रहना पड़े।
5. जर्जर विद्यालय भवनों व कक्षा कक्षों के पुनःर्निर्माण और मरम्मत हेतु शीघ्र बजट जारी किया जावे।
6. पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जावे तथा इसे वर्तमान स्वरूप रूप में जारी रखा जावे।
7. सत्र 2011 से पूर्व चयनित शिक्षकों को टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता से मुक्त रखा जावे।

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