उदयपुर। हल्दीघाटी युद्ध स्वतंत्रता का स्वर्णिम अध्याय है। भामाशाह फाउंडेशन समिति अध्यक्ष प्रमोद सामर ने कहा कि 450 वर्ष पूर्व स्वतंत्रता के ...
उदयपुर। हल्दीघाटी युद्ध स्वतंत्रता का स्वर्णिम अध्याय है। भामाशाह फाउंडेशन समिति अध्यक्ष प्रमोद सामर ने कहा कि 450 वर्ष पूर्व स्वतंत्रता के पुरोधा, महानायक महाराणा प्रताप के नेतृत्व में हल्दीघाटी युद्ध का विजयोत्सव स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का स्वर्णिम हस्ताक्षर एवं अध्याय है, जो प्रेरणा पुंज के रूप में विश्व में पताका फहरा रहा है। सामर ने कहा कि महानायक महाराणा प्रताप के नेतृत्व ने हल्दीघाटी युद्ध के समय उनके अनन्य सहयोगी स्वामिभक्त वीरवर दानवीर का युद्ध के मैदान में हरावल दस्ते के नायक भामाशाह का अतुल्य योगदान एवं समर्पण चीर-स्मरणीय है।
हल्दीघाटी विजय सार्द्ध चतुरूशती के अवसर पर मीरा नगर स्थित डॉ. महिमा डेंटल क्लिनिक के प्रथम तल पर आयोजित गोष्ठी के मुख्य अतिथि भंवर सिंह पंवार थे। संगोष्ठी में विभिन्न वक्ताओं शम्भू गमेती, दूधाराम पटेल, कन्हैया लाल देशबंदू, विजय दलाल, कन्हैया लाल डांगी, नरेंद्र जैन, धु्रव बाबेल आदि ने चर्चा में भाग लिया। वक्ताओं ने महाराणा प्रताप एवं भामाशाह का बाल्य काल जंगलों में संघर्ष एवं राशि का समर्पण, प्रलोभन को ठुकराना, स्वामिभक्ति, हरावल दस्ते की युद्ध में भूमिका, संकट काल में अनन्य सहयोगी चेतक घोड़े के घायल अवस्था में महत्ती भूमिका, मेवाड़ के प्रधान एवं उद्धारक, आदि विषयों पर वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए।
मुख्य अतिथि, समाज सेवी पंवार ने कहा कि इस वर्ष महाराणा प्रताप एवं भामाशाह जयंती हल्दीघाटी के स्वर्णिम इतिहास को लेकर विशेष महत्व एवं संदेश प्रदान करती है।
समिति के सचिव राजकमल लोहार ने बताया कि आगामी 28 जून रविवार को प्रातः 09 बजे हाथीपोल स्थित भामाशाह सर्किल में भामाशाह प्रतिमा परिसर में आयोजित समारोह को लेकर विभिन्न समितियों का गठन एवं आगामी रूप रेखा पर चर्च की गई।

No comments