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चारधाम यात्रा से लौटे औदिच्य समाज के श्रद्धालुओं का भव्य स्वागत, सामूहिक डिंगरी का आयोजन

- 40 दिवसीय चारधाम यात्रा से 51 सदस्यीय जत्था सकुशल लौटने पर समाजजनों ने किया स्वागत उदयपुर, 23 जून। धार्मिक आस्था, सामाजिक एकजुटता और सांस्...


- 40 दिवसीय चारधाम यात्रा से 51 सदस्यीय जत्था सकुशल लौटने पर समाजजनों ने किया स्वागत

उदयपुर, 23 जून। धार्मिक आस्था, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक परंपराओं का अनुपम संगम उस समय देखने को मिला जब उदयपुर जिले के पाणुन्द गांव से 40 दिवसीय चारधाम यात्रा एवं भारत भ्रमण पर गया औदिच्य ब्राह्मण समाज का 51 सदस्यीय जत्था सकुशल लौटकर अपने गांव पहुंचा। यात्रियों के आगमन पर पूरे गांव में उत्साह का माहौल रहा तथा समाजजनों ने उनका भव्य स्वागत कर धार्मिक कार्यक्रमों और सामूहिक डिंगरी के माध्यम से इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बना दिया।
लक्ष्मीनारायण औदिच्य ब्राह्मण समाज ठाकुरजी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष लक्ष्मीलाल डूंगावत ने बताया कि समाज का यह जत्था लगभग 40 दिनों तक देश के प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा पर रहा। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने उत्तराखंड स्थित चारधाम—बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री सहित अनेक प्रसिद्ध तीर्थस्थलों के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इसके अलावा देश के विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों का भ्रमण कर राष्ट्र की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत को निकट से अनुभव किया।
श्री लक्ष्मीनारायण युवा परिषद के संस्थापक हीरालाल गोकलावत ने बताया कि सभी यात्रियों को आयुर्वेद दवाईयों एवं तेल का पूरा किट वितरित किया गया। जिसमें महीनेभर की थकान से राहत दिलाने वाली सामग्री थी। उन्होंने बताया कि यात्रियों के गांव पहुंचते ही समाजजनों ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। गांव के मुख्य मार्गों पर स्वागत द्वार सजाए गए तथा पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया गया। ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और धार्मिक जयघोषों के बीच निकली स्वागत शोभायात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के चेहरों पर आध्यात्मिक संतोष और उत्साह स्पष्ट दिखाई दे रहा था।
ट्रस्ट के महामंत्री तुलसीराम डूंगावत ने बताया कि स्वागत शोभायात्रा की विशेष आकर्षण महिलाओं की कलश यात्रा रही। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर पूरे गांव में शोभायात्रा निकाली। इस दौरान ठाकुरजी, गंगा माता और चारधाम के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। शोभायात्रा गांव के प्रमुख मार्गों से होकर ठाकुरजी मंदिर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने दर्शन कर समाज और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके पश्चात सभी श्रद्धालु पतवारी स्थल पहुंचे, जहां वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ सामूहिक पतवारी पूजन संपन्न हुआ। समाज के वरिष्ठजनों और धर्मप्रेमियों ने पूजा-अर्चना में भाग लेते हुए यात्रा की सफलता और सभी श्रद्धालुओं के सुरक्षित लौटने पर भगवान का आभार व्यक्त किया। धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान श्रद्धालुओं ने देश में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना भी की।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित मिलन समारोह में यात्रियों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि चारधाम यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक शांति, अनुशासन, सहनशीलता और सामाजिक समरसता का अद्भुत अनुभव रही। कठिन पर्वतीय मार्गों और प्रतिकूल मौसम के बावजूद सभी यात्रियों ने उत्साह और श्रद्धा के साथ यात्रा पूर्ण की। यात्रियों ने कहा कि इस यात्रा ने उनके जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच का संचार किया है।
धार्मिक कार्यक्रमों के उपरांत औदिच्य ब्राह्मण समाज के नोहरे में सामूहिक डिंगरी का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में समाजजन, ग्रामीण और विभिन्न आयु वर्ग के लोगों ने भाग लिया। सामूहिक भोज के माध्यम से सामाजिक एकता, भाईचारे और परस्पर प्रेम का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठजनों ने युवाओं को धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े रहने का आह्वान किया।
समारोह के अंत में समाजजनों ने चारधाम यात्रा से लौटे सभी श्रद्धालुओं का सम्मान करते हुए उनके उज्ज्वल स्वास्थ्य और सुखमय जीवन की कामना की। पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि धार्मिक यात्राएं केवल आस्था का विषय नहीं होती, बल्कि समाज को एक सूत्र में पिरोने और सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त बनाने का भी माध्यम होती हैं। पाणुन्द गांव में आयोजित यह स्वागत समारोह श्रद्धा, उत्साह और सामाजिक एकजुटता का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया।

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