तालाबों के कायाकल्प, भू-जल स्तर सुधार और शहरी वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने की पहल उदयपुर। राजस्थान में लगातार गिरते भू-जल स्तर को सुधारने...
तालाबों के कायाकल्प, भू-जल स्तर सुधार और शहरी वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने की पहल
उदयपुर। राजस्थान में लगातार गिरते भू-जल स्तर को सुधारने, पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण और भविष्य की जल सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है।
स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के ब्राण्ड एम्बेसडर एवं स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के समन्वयक के.के. गुप्ता द्वारा प्रदेश में जल संरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री को भेजे गए सुझावात्मक पत्र पर राजस्थान सरकार के राजस्थान नदी बेसिन एवं जल संसाधन योजना प्राधिकरण ने गंभीरता से संज्ञान लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
जल संरक्षण को लेकर गुप्ता द्वारा उठाए गए मुद्दों में ग्रामीण क्षेत्रों के पारंपरिक तालाबों का पुनर्जीवन, जल आवक मार्गों को अतिक्रमण मुक्त करना, जल स्रोतों की स्वच्छता और शहरी क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन को अनिवार्य रूप से प्रभावी बनाने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव शामिल रहे है।
तालाबों के संरक्षण और पुनर्जीवन पर जोर
राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित तालाबों के संरक्षण के लिए उनकी नियमित साफ-सफाई, कटीली झाड़ियों एवं अनावश्यक वनस्पतियों को हटाने, जल आवक मार्गों को व्यवस्थित करने और अतिक्रमण मुक्त करने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई। इसके साथ ही तालाबों का वैज्ञानिक तरीके से सीमांकन करने, उनकी पालों को मजबूत बनाने तथा सीपेज रोकने के उपाय करने पर भी जोर दिया गया, जिससे वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण हो सके और पानी का अनावश्यक बहाव रोका जा सके।
जल प्रदूषण रोकने की दिशा में पहल
के.के. गुप्ता ने अपने पत्र में ग्रामीण जल स्रोतों को प्रदूषण मुक्त रखने का भी महत्वपूर्ण सुझाव दिया। उन्होंने तालाबों में गांवों का गंदा पानी मिलने से रोकने की आवश्यकता बताई, ताकि इन जल स्रोतों का उपयोग पशुओं, कृषि और अन्य आवश्यकताओं के लिए सुरक्षित रूप से किया जा सके।
शहरी क्षेत्रों में वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा
बढ़ते शहरीकरण और घटते भू-जल स्तर को देखते हुए शहरों में वर्षा जल संचयन प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। छतों से आने वाले वर्षा जल को फिल्टर के माध्यम से सीधे जमीन में पहुंचाने से भू-जल स्तर में वृद्धि होगी और पानी में बढ़ रही टीडीएस की मात्रा को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
‘जल है तो कल है’ के संकल्प को मिलेगी मजबूती
जल संरक्षण के इस अभियान का उद्देश्य केवल वर्तमान जल संकट का समाधान करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है। राजस्थान जैसे जल संकट प्रभावित प्रदेश में यह पहल मुख्यमंत्री जल संचय योजना और स्वजल योजना को भी मजबूती प्रदान करने वाली मानी जा रही है।
गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2015 से 2020 तक नगर परिषद डूंगरपुर बोर्ड में उनके सभापति कार्यकाल के दौरान नगर में बनी हुई रियासत काल की बावड़ियों और कुओं की साफ, सफाई एवं गहराई कराई गई। जिससे प्रतिदिन 8 लाख लीटर पानी नियमित मिलने लगा जिसे नियमित जल विभाग को दिया गया। शहरवासियों की जल की समस्या का काफी हद तक निवारण हुआ। क्षेत्र में शहर की झील, तालाबों को गहरा एवं साफ करवाया जिससे वर्षा का पानी लम्बे समय एवं प्रचुर मात्रा में एकत्रित करने में सहायक सिद्ध हुआ। इसके साथ ही डूंगरपुर शहर में पेयजल के लिए प्रमुख स्रोत डिमिया तालाब और एडवर्ड संबंध तालाब को गहरा करने का कार्य भी किया गया।
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