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63 वर्ष की आयु में 200 घंटे का योग शिक्षक प्रशिक्षण पूरा कर बनीं प्रेरणा

घुटनों का प्रत्यारोपण होने के बावजूद योग व न्यूट्रिशन में हासिल की सफलता, अब समाज में दे रही हैं योग प्रशिक्षण उदयपुर। यह धारणा कि उम्र बढ़ने...


घुटनों का प्रत्यारोपण होने के बावजूद योग व न्यूट्रिशन में हासिल की सफलता, अब समाज में दे रही हैं योग प्रशिक्षण

उदयपुर। यह धारणा कि उम्र बढ़ने के साथ सीखने की क्षमता कम हो जाती है, पूर्व सीएमएचओ डॉ. सुरेश धन्यच की धर्मपत्नी ने गलत साबित कर दी है। उन्होंने 63 वर्ष की आयु में समत्वम् योगशाला में योग विशेषज्ञ डॉ. गुनीत मोंगा भार्गव के मार्गदर्शन में 200 घंटे का योग शिक्षक प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण किया। साथ ही उन्होंने न्यूट्रिशन का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर स्वास्थ्य एवं संतुलित जीवनशैली का व्यापक ज्ञान अर्जित किया।

विशेष बात यह है कि उनका घुटनों का प्रत्यारोपण हो चुका है। इसके बावजूद उन्होंने नियमित अभ्यास, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर योग शिक्षक प्रशिक्षण पूरा कर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।

प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने योगासन, प्राणायाम, ध्यान, योग दर्शन, शरीर रचना विज्ञान एवं स्वस्थ जीवनशैली के सिद्धांतों का अध्ययन किया। न्यूट्रिशन प्रशिक्षण के माध्यम से उन्होंने संतुलित आहार और स्वास्थ्य प्रबंधन की भी गहन जानकारी प्राप्त की।

प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद वे अपने समाज एवं आवासीय सोसायटी में नियमित रूप से योग कक्षाएं संचालित कर रही हैं तथा लोगों को योग, प्राणायाम और संतुलित आहार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनके प्रयासों से अनेक लोग स्वस्थ जीवनशैली की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

डॉ. गुनीत मोंगा भार्गव पिछले 20 वर्षों से योग शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत हैं। वे 8 वर्ष के बच्चों से लेकर 65 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के लोगों को योग का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। उनके मार्गदर्शन में अनेक विद्यार्थियों ने 200 घंटे का योग शिक्षक प्रशिक्षण पूर्ण कर प्रमाणित योग प्रशिक्षक के रूप में अपनी पहचान बनाई है और विभिन्न विद्यालयों, संस्थानों, कॉर्पाेरेट संगठनों तथा सामाजिक संस्थाओं में योग का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। उनका उद्देश्य समाज को अधिक से अधिक प्रशिक्षित एवं योग्य योग शिक्षक उपलब्ध कराना है, जिससे योग का लाभ हर वर्ग तक पहुँच सके।

इस अवसर पर डॉ. गुनीत मोंगा भार्गव ने कहा, ष्योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि सम्पूर्ण जीवन जीने की कला है। यदि व्यक्ति में सीखने का जुनून और निरंतर अभ्यास करने का संकल्प हो, तो उम्र कभी भी सफलता के मार्ग में बाधा नहीं बनती।ष्

यह उपलब्धि समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है कि ष्।हम पे श्रनेज ं छनउइमतष्। सीखने और स्वयं को बेहतर बनाने की कोई आयु सीमा नहीं होती। 63 वर्ष की आयु में योग शिक्षक एवं न्यूट्रिशन प्रशिक्षण पूर्ण कर समाज सेवा का कार्य करना वास्तव में अनुकरणीय उदाहरण है।


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