उदयपुर। सिंधु एकता मंच द्वारा आयोजित पाँचवें अंतरराष्ट्रीय सिंधी सम्मेलन का तीन दिवसीय आयोजन ऐतिहासिक, भव्य एवं सफल रहा। देश के विभिन्न राज्...
उदयपुर। सिंधु एकता मंच द्वारा आयोजित पाँचवें अंतरराष्ट्रीय सिंधी सम्मेलन का तीन दिवसीय आयोजन ऐतिहासिक, भव्य एवं सफल रहा। देश के विभिन्न राज्यों तथा दुबई सहित विदेशों से आए 400 से अधिक प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में भाग लेकर सिंधी समाज की एकता, भाषा, साहित्य, संस्कृति एवं सामाजिक सरोकारों को नई दिशा देने का संकल्प लिया।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि इंदौर के सांसद श्री शंकर लालवानी ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि सिंधी समाज की इतनी विशाल और संगठित एकता देखकर उनका मन अत्यंत प्रफुल्लित हो गया है। उन्होंने कहा कि सिंधु एकता मंच द्वारा आयोजित यह पाँचवाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन वास्तव में ऐतिहासिक है और ऐसे सम्मेलन समय-समय पर होते रहने चाहिए। सिंधी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के लिए इस प्रकार के मंचों की आज सबसे अधिक आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, “जहाँ भी मेरी आवश्यकता होगी, मैं सदैव आपके साथ उपलब्ध रहूँगा। सिंधी समाज मेहनत, ईमानदारी और संघर्ष का समाज है। विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत आए सिंधी समाज ने अपने परिश्रम और प्रतिभा के बल पर न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान स्थापित की है। मुझे गर्व है कि मैं सिंधी हूँ और आप सभी के बीच आकर मुझे अत्यंत खुशी का अनुभव हो रहा है।”
पूर्व राज्यमंत्री हरीश राजानी ने सांसद शंकर लालवानी के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि ऐसे सम्मेलन समाज को एक मंच पर लाने का सबसे सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अत्यंत प्रसन्नता है कि सिंधु एकता मंच ने इस ऐतिहासिक सम्मेलन के लिए झीलों की नगरी उदयपुर का चयन किया। “पधारो म्हारे देश” की परंपरा के अनुरूप उन्होंने देश-विदेश से आए सभी प्रतिनिधियों का हार्दिक स्वागत, अभिनंदन एवं सम्मान किया।
उन्होंने कहा, “मैं आपका सदैव आभारी रहूँगा कि आपने उदयपुर को इस सम्मेलन के लिए चुना। भविष्य में भी जहां कहीं इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित हों, हमें भी अवश्य आमंत्रित करें। हम भी आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर समाज की एकता, सिंधी संस्कृति के संरक्षण और राष्ट्र की एकता के लिए सदैव कार्य करते रहेंगे।” उन्होंने अपने संबोधन का समापन “जय झूलेलाल” के उद्घोष के साथ किया।
सम्मेलन के दूसरे दिन मंगलवार को होटल लोटस के मैदान में देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया। इसके पश्चात स्विमिंग पूल परिसर में पारंपरिक सिंधी खेलों एवं विभिन्न मनोरंजक प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ, जिसमें सभी प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इन गतिविधियों का सफल संचालन भोपाल से आईं प्रिया ज्ञानचंदानी ने किया।
सम्मेलन के दौरान दिन-रात सिंधी भाषा, साहित्य, संस्कृति एवं सिंधियत के संरक्षण और संवर्धन पर विस्तृत चर्चा हुई। विभिन्न सत्रों में नई पीढ़ी को सिंधी भाषा से जोड़ने, सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने तथा विश्वभर में सिंधी समाज को और अधिक संगठित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
सिंधु एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कोटवानी ने कहा कि अब तक का यह सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय सिंधी सम्मेलन है, जिसमें देश-विदेश से 400 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लेकर इतिहास रच दिया है।
मंच के राष्ट्रीय प्रवक्ता ओमप्रकाश ओमी ने बताया कि सम्मेलन में देश के प्रसिद्ध सिंधी गायकों ने सिंधियत से ओतप्रोत गीतों की शानदार प्रस्तुतियाँ देकर पूरे वातावरण को सांस्कृतिक उल्लास से भर दिया। उन्होंने बताया कि समापन समारोह में उदयपुर सहित देश के विभिन्न शहरों से आए समाजसेवियों, साहित्यकारों एवं विशिष्ट व्यक्तियों का सम्मान किया गया तथा विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा में आकर्षक सांस्कृतिक परेड प्रस्तुत की।
सम्मेलन में दुबई से आए युवा समाजसेवी जितेन्द्र मतलानी ने वर्ष 2027 का अंतरराष्ट्रीय सिंधी सम्मेलन दुबई में आयोजित करने का प्रस्ताव रखा तथा इसकी संपूर्ण व्यवस्था दुबई सिंधी समाज द्वारा करने की घोषणा की। इस प्रस्ताव का उपस्थित प्रतिनिधियों ने जोरदार स्वागत किया।
मंच की महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष गीता टिलवानी ने कहा कि सम्मेलन में महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही तथा मातृशक्ति ने प्रत्येक गतिविधि में सक्रिय भूमिका निभाकर आयोजन को सफल बनाया।
उदयपुर सिंधी समाज द्वारा सम्मेलन में आए सभी प्रतिनिधियों का जवाहर नगर स्थित सिंधु महल में भव्य सम्मान किया गया। सम्मेलन की व्यवस्थाओं में जितेन्द्र खेलानी, राजकुमार खत्री, रेशमा वजीरानी, आशा कोटवानी, कविता देवनानी, नीलम मध्यान, जयश्री पंजवानी, भावना देवनानी, नरेश जसूजा, संगीता हिंदुजा, ज्योति चंचलानी, कशिश चावला, सरिता मोटवानी सहित अनेक कार्यकर्ताओं एवं स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
तीन दिवसीय यह सम्मेलन सिंधी समाज की एकता, संस्कृति, संगठन शक्ति और सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण बनकर संपन्न हुआ तथा देश-विदेश से आए प्रतिनिधि अपने साथ उदयपुर की आत्मीयता और सिंधियत की अविस्मरणीय यादें लेकर लौटे।


No comments