प्रात: 8 बजे से इस्काॅन रथयात्रा मे गूंजेगा हरि कीर्तन, रथयात्रा मार्ग मे होगा स्वागत आरती उदयपुर, गंगूकुण्ड स्थित इस्काॅन मन्दिर मे रथयात्...
प्रात: 8 बजे से इस्काॅन रथयात्रा मे गूंजेगा हरि कीर्तन, रथयात्रा मार्ग मे होगा स्वागत आरती
उदयपुर, गंगूकुण्ड स्थित इस्काॅन मन्दिर मे रथयात्रा महामहोत्सव के निमित्त बुधवार को वैष्णव भक्तो एंव माताओ ने 11000 प्रसाद के पैकेट, रत्नाभूषण, सुगन्धित फूलमालाओ की तैयारी कर सायंकाल रथ यात्रा मार्ग को पूरा साफ सफाई कर गगांजल से प्रक्षालन कर मार्जन किया। मन्दिर अध्यक्ष मायापुर वासी ने बताया कि ठीक सवा आठ बजे मन्दिर से नागदा रेस्टोरेंट आनन्द प्लाजा से घुमकर यूनिवर्सिटी मार्ग से बोहरा गणेश चोराहे पर पहुँचेगी जहां स्थानीय समाज संगठनो के द्वारा भोग मंगल श्रृंगार आरती होगी। इसप्रकार महावीर हनुमान मंदिर के बाहर भी दीपदान कर महाआरती करेंगें। फिर धूलकोट चोराहे से श्री राम कालेज होते हुए इस्काॅन मन्दिर पहुँचेगी। इससे पूर्व प्रात मंगला आरती पश्चात 6 बजे से जगन्नाथ बलभद्र सुभद्रा जी को वैष्णव भक्त माताओ के हाथो निर्मित नई पौषाक फूलमालाओ रत्नाभूषणो को धरा भव्य श्रृंगार करा मुख्य मंच पर विराजमान किया जाएगा। जहां वैष्णवो के हाथो से बनाये 5000 तरह के शुद्ध व्यंजनो का भोग लगा स्वागत आरती होगी।जहां भगवान भक्तो को साक्षात दर्शन देवेंगे। मायापुर वासी के अनुसार "पहण्डी विजय" के रुप मे भगवान के तीनों विग्रहो को ब्रह्मचारी वैष्णव हाथो मे धारण कर लहराते झुलाते सुसज्जित रथ मे विराजमान कर रस्से से खींचते हुए,हाथी घोड़े ऊटं बैण्ड बाजे, बग्गी, लवाजमे के साथ मृदंग, झांझर, मंजीरे तथा शंखनाद की मधुर ध्वनि से गुंजायमान करते हुए नगर भ्रमण को प्रस्थान करेगें। 101माताऐं केसरिया लाल साडी गोपी ड्रेस मे सिर पर कलश धारण कर आगे चलेगी, तो पूणे के श्यामानन्द गौर प्रभु ,वृन्दावन के देवहरि प्रभु के दल के साथ वैष्णव जन इस्काॅन शैली मे नाचते कूदते बजाते गाते हरिनाम संकीर्तन करते चलेगें। माताऐं वैष्णव भक्त आगे आगे प्रसाद वितरण करते, झाडू बुहारते, रस्सा खिंचते चलेगें तो पीछे पीछे सेवक पवित्र मार्ग मे कचरा उठाते चलेगें। इससे पूर्व बुधवार को 100 से अधिक भक्तो ने पूरे मन्दिर को अन्दर बाहर से सफाई धुलाई कर शुद्ध किया।सायंकाल रथयात्रा मार्ग मे झाडू बुहार कर जल से प्रक्षालन किया। मिडिया प्रभारी डाॅ.बालकृष्ण शर्मा ने बताया कि बुधवार को न्यूजीलैंड निवासी, राजस्थान प्रमुख पंचरत्न प्रभु के आगमन पर भव्य स्वागत किया। प्रभु ने प्रवचन मे बताया कि जगन्नाथ जी, विष्णु कृष्ण का स्वरूप अवतार है। गुण्डिचा मन्दिर मे मौसी के रहने के बाद बहन सुभद्रा की ईच्छानुसार लकड़ी से बने रथ मे नगर भ्रमण को निकलते है। जिसे इस्काॅन भक्त पूरे विश्व मे मनाते है।रथयात्रा के उद्देश्य को श्री कृष्ण का द्वारका से वृन्दावन मे राधारानी के विरह भाव मे मिलने को जाना भी दर्शाता है। पुरी मे भगवान के विग्रह को स्वयं विश्वकर्मा भगवान ने बनाया है। मायापुर वासी के अनुसार दिल्ली मुम्बई पूणे अहमदाबाद हनुमान गढ जयपुर वृन्दावन सहित अनेक नगरो से इस्काॅन भक्त पहुँचे है। जो न्यूजीलैंड के पंचरत्न प्रभु के सानिध्य मे रथयात्रा की शोभा बढायेगें। पंचरत्न प्रभु के अनुसार रथयात्रा का दर्शनभाव मन मे आना ही पुण्यदायक है। इसके दर्शन मात्र से सब पाप नष्ट हो जाते। रथयात्रा मे शामिल होने से यज्ञ के बराबर पुण्य जबकि रस्से को खींचने या स्पर्श मात्र से सारे पाप मिट कर आलौकिक पुण्य मिलता है। जिसका तीनो लोक के देवी देवता स्वागत सत्कार कर पुष्पाभिषेक करते है। सवा एक बजे मन्दिर पहुंचने पर महाप्रसाद होगा।

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