उदयपुर 25 अक्टूबर। डॉ. सुरेन्द्र छंगाणी ने कहा कि पशुपालक अपने बांझ पशुओं को बोझ न समझे अपितु उस बांझ पशु के बांझपन का निवारण करवाकर पुनः उ...
उदयपुर 25 अक्टूबर। डॉ. सुरेन्द्र छंगाणी ने कहा कि पशुपालक अपने बांझ पशुओं को बोझ न समझे अपितु उस बांझ पशु के बांझपन का निवारण करवाकर पुनः उत्पादन से जोड़े इस प्रकार प्रचार-प्रसार पशुधन सहायकों को अपने क्षेत्र में करकर अपने पशुपालकों की आर्थिक स्थिति सुधारने का प्रयास करना चाहिए। डॉ. छंगाणी ने कहा कि प्रशिक्षण में पशुओं के बांझपन के कारणों एवं उनके समाधानों की विस्तार से जानकारी दी गई हैं, जिसका पशुधन सहायकों को उपयोग करना चाहिए।
डॉ. सुरेन्द्र छंगाणी ने पशुधन सहायकों के पांच दिवसीय प्रत्यास्मरण प्रशिक्षण शिविर के समापन सत्र में यह बता कही। अतिरिक्त निदेशक डॉ. शरद अरोड़ा ने इस अवसर पर कहा कि कृत्रिम गर्भाधान कार्य को बेहतर करने के साथ इसका रिकॉर्ड संधारण एवं ऑनलाईन इन्द्राज भी समय पर करना चाहिए। प्रशिक्षण में पशु आहार विशेषज्ञ डॉ. चन्द्रशेखर वैष्णव ने बताया कि ग्याभन पशुओं का दिया जाने वाला आहार उसके वत्स के स्वास्थ्य पर भी असर डालता है। अतः संतुलित एवं उन्नत आहार प्रबंधन करना नितान्त आवश्यक है। प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. पदमा मील ने बताया कि प्रशिक्षण में डॉ. विजय माने, डॉ. सविता मीणा, डॉ. महेन्द्र मेहता, डॉ. सुभाष डॉ. योगेश, डॉ. हंस कुमार जैन, डॉ. मितेश गौड़, डॉ. सुरेन्द्र छंगाणी, डॉ. पदमा मील, डॉ. सुरेश शर्मा, श्री चन्द्रशेखर, श्री पन्नालाल शर्मा ने विभिन्न प्रजनन सम्बन्धित विषय वस्तुओं पर जानकारी देकर पशुधन सहायकों को लाभान्वित किया। प्रशिक्षण संयोजक डॉ. सुरेश शर्मा ने बताया कि उदयपुर एवं कोटा संभाग के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत 25 पशुधन सहायकों ने भाग लिया जिन्हें प्रायोगिक प्रशिक्षण में विशेष जोर दिया एवं प्रशिक्षण सम्बन्धित पाठ्यसामग्री भी उपलब्ध कराई।

No comments