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"पशु नस्ल सुधार कार्यक्रम में सफलता के लिए नकारा पशुओं का बधियाकरण करना नितान्त आवश्यक"

उदयपुर, 21 अक्टूबर। पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान में राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड, जयपुर के आर्थिक सहयोग से उदयपुर एवं कोटा संभाग में कार्यरत 25 ...


उदयपुर, 21 अक्टूबर। पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान में राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड, जयपुर के आर्थिक सहयोग से उदयपुर एवं कोटा संभाग में कार्यरत 25 पशुधन सहायकों का पांच दिवसीय आवासीय कृत्रिम गर्भाधान प्रत्यास्मरण प्रशिक्षण शिविर प्रारंभ हुआ। प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र में संस्थान के उपनिदेशक डॉ. सुरेन्द्र छंगाणी ने कहा कि पशु नस्ल सुधार कार्यक्रम में सफलता अर्जित करने के लिए कृत्रिम गर्भाधान तकनिकी कार्य में कार्य कुशलता के साथ यह भी आवश्यक हैं कि उस क्षेत्र में व्याप्त अवर्गीकृत नस्ल के नकारा सांडों का भी बधियाकरण किया जाये। डॉ. छंगाणी ने बताया कि यह नकारा सांड हमारे कृत्रिम गर्भाधान को असफल बना देते है। अतः क्षेत्र में कार्यरत पशुधन सहायक का यह भी दायित्व हैं कि वे अपने क्षेत्र के पशुधन को गंभीरता से लेकर सांडो का तुरन्त बधिया करें। प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. पदमा मील ने बताया कि कृत्रिम गर्भाधान के पश्चात् ग्याभन पशुओं के आहार प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाना होता है अतः इस प्रशिक्षण में पशु आहार का भी विशेष प्रशिक्षण जायेगा। प्रशिक्षण संयोजक डॉ. सुरेश शर्मा ने बताया कि अधिकाधिक प्रायोगिक प्रशिक्षण पर जोर दिया जायेगा। ताकि पशुधन सहायक स्वयं कार्य कर सीखें एवं उसे अपनाये।

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