उदयपुर। राजस्थानी विभाग, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय और चलकोई फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में राजवीर सिंह चलकोई राजस्थानी भाषा स्कॉलरशि...
उदयपुर। राजस्थानी विभाग, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय और चलकोई फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में राजवीर सिंह चलकोई राजस्थानी भाषा स्कॉलरशिप कार्यक्रम 2024 25 का आयोजन प्रबंध अध्ययन संकाय के सेमिनार हॉल में किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो हेमंत द्विवेदी अधिष्ठाता ने बताया कि बच्चों को अपनी मातृभाषा और अपनी संस्कृति को नहीं छोड़ना चाहिए और अपनी जड़ों से जुड़ा रहना चाहिए। सह अधिष्ठाता प्रो दिग्विजय भटनागर ने बताया कि हम अपनी मातृभाषा को भूल जाएंगे तो हम अपना इतिहास को देंगे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो मदन सिंह राठौड़ ने बताया की देश हो या विदेश मातृभाषा को हमेशा याद रखें और उसको अपनी आने वाली पीढ़ी तक हस्तांतरित करें। गौरतलब है कि चळकोई फाउंडेशन के संस्थापक और शिक्षाविद् पूरे राजस्थान के विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में राजस्थानी विषय से नियमित ड। में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की शुल्क अपने फाउंडेशन से भरने की घोषणा की थी।
इससे पूर्व महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय में समारोहपूर्वक छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम हुआ था। यह स्कोलरशिप राजस्थानी भाषा और संस्कृति के संवर्धन हेतु शुरु की गयी है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजवीर सिंह चलकोई ने अपने उद्बोधन में कहा कि राजस्थानी इतिहास और संस्कृति के संरक्षण के लिए राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता और राजकीय मान्यता अतिआवश्यक है। चलकोई ने राजस्थानी भाषा के लिए हर संभव आर्थिक व मानवीय मदद का आश्वासन दिया। विभागाध्यक्ष डॉ सुरेश सालवी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए अपने उद्बोधन में कहा कि व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसकी मातृभाषा से होती हैं साथ ही राजस्थानी भाषा के प्रति तन मन धन से समर्पित श्री राजवीर सिंह चलकोई का अभिनंदन किया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ लोकेश राठौड़ ने किया। कार्यक्रम में डॉ खुशपाल गर्ग, डॉ पीएस राजपूत, डॉ बालूदान बारहठ, डॉ अनील गारू, कवि छैलू दान, लोकेंद्र सिंह क़िलाणोत, शोधार्थी भूपेंद्र सिंह, जगदीश चंद्र गुर्जर एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन रावल राम पंवार ने किया।

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