15 दिवसीय प्रस्तुति-परख नाट्य कार्यशाला में राजकीय विद्यालय के बच्चों ने दी नाट्य प्रस्तुति। उदयपुर, 24 जून। उदयपुर के नाट्य संस्थान ‘‘नाट्य...
15 दिवसीय प्रस्तुति-परख नाट्य कार्यशाला में राजकीय विद्यालय के बच्चों ने दी नाट्य प्रस्तुति।
उदयपुर, 24 जून। उदयपुर के नाट्य संस्थान ‘‘नाट्यांश सोसायटी ऑफ ड्रामेटिक एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स’’ द्वारा देवाली स्थित राजकीय विद्यालय में 15 दिवसीय प्रस्तुति-परख नाट्य कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में प्रतिभागी
विद्यार्थियों को रेखा सिसोदिया एवं अमित श्रीमाली द्वारा नाट्य प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यशाला के समापन अवसर पर विद्यार्थियों ने अमित श्रीमाली द्वारा लिखित नाटक ‘जीवन की दुकान’ का प्रभावशाली मंचन किया। यह नाटक विकास की अंधी दौड़ और व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण पर्यावरण को पहुँचाई जा रही क्षति पर आधारित है। साथ ही यह वर्तमान समय में पर्यावरण की नाजुक स्थिति को रेखांकित करते हुए पेड़ों के संरक्षण एवं वृक्षारोपण का संदेश देता है। नाटक में दिखाया गया कि किस प्रकार विकास और लालच के चलते मनुष्य प्राकृतिक संसाधनों का निरंतर दोहन कर रहा है तथा इस शोषण से भविष्य में उत्पन्न होने वाली संभावित प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अनजान बना हुआ है। समाज की इसी निष्क्रिय सोच को बदलने और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से इस नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया।
कार्यशाला संयोजक एवं नाटक की निर्देशिका रेखा सिसोदिया ने बताया कि नाटक ‘जीवन की दुकान’ के अब तक हमारी टीम के द्वारा कई मंचन किये जा चुके है और यह इस नाटक का 50वाँ मंचन है। उन्होंने यह भी बताया कि कार्यशाला के दौरान सभी बच्चों ने पहली बार रंगमंच पर अभिनय किया, जिसके बावजूद उन्होंने अत्यंत उत्साह और आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रस्तुति दी। कार्यशाला सहायक के रूप में लवेश प्रजापति का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। नाटक में बतौर कलाकार बाबूलाल मेघवाल, लीला मेघवाल, ललिता कुमारी, निशा कुमावत, साहिल जानी, तेजपाल सिंह कुमावत तथा चेष्टा जादौन ने अभिनय किया।
कार्यशाला के समापन अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य दुष्यंत कुमार नागदा ने कार्यशाला के आयोजकों को प्रशस्ति- पत्र एवं प्रतीक-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। साथ ही विद्यालय की अध्यापिकाओं पुष्पलता सोलंकी, कल्पना श्रीमाली तथा विमलेश कुमावत ने प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को प्रमाण-पत्र वितरित किए।
नाटक का सारांश
यह नाटक कुछ मित्रों की कहानी है, जो एक ऐसे व्यवसाय की योजना बनाते हैं जिसके अंतर्गत ऑक्सीजन निर्माण कारखाने के लाभ के लिए दुनिया भर के जंगलों और पेड़ों को नष्ट करने का विचार किया जाता है। किन्तु उनका एक मित्र उन्हें पेड़ों के महत्व को समझाता है तथा प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है। अपने मित्र के तर्क सुनने के बाद सभी अपनी सोच बदल लेते हैं और पेड़ों को काटने के बजाय उनके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कार्य करने का संकल्प लेते हैं।
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