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विराट अहिंसा रैली के साथ महाप्रज्ञ विहार में हुआ मुनि संजय कुमार ठाना-3 का चातुर्मासिक मंगल प्रवेश

-मुनियों ने आत्मशुद्धि, धर्म साधना और जागरूक श्रावक जीवन का दिया संदेश उदयपुर, 24 जुलाई। तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशास्ता आचार्य श्री ...



-मुनियों ने आत्मशुद्धि, धर्म साधना और जागरूक श्रावक जीवन का दिया संदेश

उदयपुर, 24 जुलाई। तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण के आज्ञानुवर्ती मुनि संजय कुमार, मुनि प्रकाश कुमार एवं मुनि सिद्धप्रज्ञ महाराज का शुक्रवार को मर्यादा नगर स्थित कॉन्फ्रेंस के निवर्तमान अध्यक्ष राजकुमार फत्तावत के निवास से विराट अहिंसा रैली के रूप में महाप्रज्ञ विहार में चातुर्मासिक मंगल प्रवेश अत्यंत श्रद्धा, उल्लास एवं धार्मिक वातावरण के बीच हुआ। मंगल प्रवेश के अवसर पर तेरापंथ धर्मसंघ के श्रावक-श्राविकाओं ने जगह-जगह मंगल वंदना करते हुए साधु-संघ का भावभीना स्वागत किया। पूरा वातावरण धर्ममय जयघोषों, मंगल गीतों एवं आध्यात्मिक उत्साह से सरोबार रहा। विराट अहिंसा रैली में बड़ी संख्या में जैन पताका लेकर दो-दो की पंक्तियों में सैकड़ों महिलाएं उसके पीछे मुनि संजय कुमार, मुनि प्रकाश कुमार एवं मुनि सिद्धप्रज्ञ महाराज तथा अंत में दो-दो की कतार में सैकड़ों श्रावक अनुशासित रूप से शामिल हुए।
तेरापंथ सभा उदयपुर के मंत्री राकेश नाहर ने बताया कि प्रवेश पश्चात आयोजित विराट धर्म सभा में सभी संघीय संस्थाओं के अध्यक्षों ने शब्दों द्वारा स्वागत किया। जिसमें सभाध्यक्ष राजकुमार कच्छारा, महिला मंडल अध्यक्ष रेणु कच्छारा, युवक परिषद अध्यक्ष साजन माण्डोत, टीपीएफ अध्यक्ष राजेन्द्र चण्डालिया, अणुव्रत समिति अध्यक्षा प्रणिता तलेसरा, किशोर मण्डल प्रभारी देवांश नाहर एवं ज्ञानशाला संयोजिका सीमा बाबेल ने मुनि संघ के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए स्वागत अभिनंदन किया। तीनों ही मुनिव्रदों का संक्षिप्त परिचय सभा के संगठन मंत्री दीपक सिंघवी द्वारा दिया गया।
अपने प्रेरक प्रवचन में मुनि सिद्धप्रज्ञ महाराज ने कहा कि किसी का स्वागत केवल शब्दों या औपचारिकताओं से नहीं होता, बल्कि श्रेष्ठ विचारों और श्रेष्ठ आचरण से होता है। यदि व्यक्ति अपने विचारों को निर्मल, सकारात्मक और सरल बनाए रखे तो उसका संपूर्ण जीवन मंगलमय बन सकता है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास आत्ममंथन और आत्मपरिष्कार का श्रेष्ठ अवसर है, जिसका प्रत्येक व्यक्ति को भरपूर लाभ उठाना चाहिए।
मुनि प्रकाश कुमार ने कहा कि संसार में नियति से बढक़र कुछ भी नहीं है। ईश्वर या प्रकृति की योजना के अनुरूप ही घटनाएं घटित होती हैं। उन्होंने उदयपुर के श्रावक समाज की सक्रियता, समर्पण और धार्मिक निष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि गुरुदेव आचार्य महाश्रमण की कृपा दृष्टि तथा उदयपुर के श्रावक समाज की सजगता और संगठित प्रयासों के कारण ही यहां चातुर्मास का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने सभी से चातुर्मास को आध्यात्मिक उन्नयन का माध्यम बनाने का आह्वान किया।
मुनि संजय कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि मनुष्य के जीवन में आत्मा से बड़ा कोई साथी नहीं है। बाहरी संबंध और संसाधन एक सीमा तक साथ देते हैं, लेकिन आत्मा ही जन्म-जन्मांतर तक मनुष्य का सच्चा सहचर रहती है। उन्होंने कहा कि आत्मा जितनी अधिक निर्मल, संयमित और पवित्र होगी, जीवन उतना ही शांत, सुखी और सार्थक बनेगा। उन्होंने श्रावक समाज से आग्रह किया कि चातुर्मास के चार महीनों में धर्म, ध्यान, तप, जप, स्वाध्याय, सामायिक, प्रार्थना एवं सदाचार को अपने जीवन का हिस्सा बनाकर आत्मकल्याण के मार्ग को प्रशस्त करें।
कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ महिला मण्डल की बहिनों के मंगलाचरण से हुआ। आभार वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनोद माण्डोत द्वारा ज्ञापित किया गया तथा सुन्दर संचालन राकेश नाहर द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में महासभा के प्रतिनिधि धीरेन्द्र मेहता, महेन्द्र सिंघवी, अरूण कोठारी, सकल जैन समाज के अध्यक्ष राजकुमार फत्तावत, सभापदाधिकारी विनोद माण्डोत, अरूण चव्हाण, विनोद चण्डालिया, राकेश नाहर, दीपक सिंघवी, राजेन्द्र चण्डालिया, राजीव सुराणा, लोकेश कोठारी, चन्द्रप्रकाश चोरडिया, श्री महावीर युवा मंच संस्थान के अध्यक्ष अशोक कोठारी, जेजेसी अध्यक्ष अरूण मेहता, बीजेएस अध्यक्ष दीपक सिंघवी, वर्धमान स्थानकवासी श्रावक संघ सेक्टर 3 के अध्यक्ष ललित कोठारी, नितिन लोढ़ा, सोनल सिंघवी, नीता छाजेड़, मीना कावडिय़ा एवं राजसमंद, कांकरोली, आमेट, रिछेड़ आदि क्षेत्रों के विशिष्ठ श्रावकों सहित सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे।  
 

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